{"_id":"599ef7524f1c1b7b0b8b4695","slug":"archiological-survey-of-india-said-tajmahal-is-a-tomb","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"ताजमहल मंदिर नहीं, मकबरा है! एएसआई ने कोर्ट में दिया ये जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ताजमहल मंदिर नहीं, मकबरा है! एएसआई ने कोर्ट में दिया ये जवाब
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Fri, 25 Aug 2017 11:23 AM IST
विज्ञापन
ताजमहल
- फोटो : getty
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा के स्थानीय कोर्ट में चल रहे तेजोमहालय बनाम ताजमहल के मामले में भारत सरकार और केंद्रीय पुरातत्व विभाग ने गुरुवार को अपना जवाब दाखिल कर दिया है। इसमें कहा गया है कि ताजमहल मंदिर नहीं, बल्कि मुगल शहंशाह शाहजहां द्वारा अपनी बेगम मुमताज महल की याद में बनवाया गया मकबरा है। यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि ताजमहल के संबंध में किसी भी मामले की सुनवाई स्थानीय कोर्ट में नहीं की जा सकती है।
स्थानीय कोर्ट में इस संबंध में याचिका आठ अप्रैल 2015 में लखनऊ के गोमती नगर निवासी अधिवक्ता हरीशंकर जैन और उनके पांच साथियों ने दायर की थी। उनका दावा है कि यह इमारत ताजमहल नहीं, बल्कि शिव मंदिर है, जिसका नाम है तेजोमहालय। इसमें केंद्र सरकार और केंद्रीय पुरातत्व विभाग को पक्षकार बनाया गया है। दोनों की ओर से पैरोकार ने गुरुवार को कोर्ट में जवाब दाखिल किया।
इस पर हरीशंकर जैन की ओर से अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ ने आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने जवाब को अपूर्ण बताया। कहा कि यह जवाब पोषणीय नहीं है। उन्होंने इस जवाब का प्रतिवाद करने के लिए कोर्ट से समय मांगा। पीठासीन न्यायाधीश अभिषेक सिन्हा ने उनके जवाब के लिए तारीख 11 सितंबर मुकर्रर की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
स्थानीय कोर्ट में इस संबंध में याचिका आठ अप्रैल 2015 में लखनऊ के गोमती नगर निवासी अधिवक्ता हरीशंकर जैन और उनके पांच साथियों ने दायर की थी। उनका दावा है कि यह इमारत ताजमहल नहीं, बल्कि शिव मंदिर है, जिसका नाम है तेजोमहालय। इसमें केंद्र सरकार और केंद्रीय पुरातत्व विभाग को पक्षकार बनाया गया है। दोनों की ओर से पैरोकार ने गुरुवार को कोर्ट में जवाब दाखिल किया।
विज्ञापन
इस पर हरीशंकर जैन की ओर से अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ ने आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने जवाब को अपूर्ण बताया। कहा कि यह जवाब पोषणीय नहीं है। उन्होंने इस जवाब का प्रतिवाद करने के लिए कोर्ट से समय मांगा। पीठासीन न्यायाधीश अभिषेक सिन्हा ने उनके जवाब के लिए तारीख 11 सितंबर मुकर्रर की है।
विज्ञापन
सूचना आयोग ने भी पूछा है सवाल
केंद्रीय सूचना आयोग ने भी हाल ही में केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने के लिए कहा है कि ताजमहल शाहजहां का बनवाया मकबरा है या शिव मंदिर, जिसे एक राजपूत राजा ने मुगल शासक को उपहार में दिया था। कुछ लोगों ने आरटीआई के माध्यम से यह प्रश्न पूछा था। यह मामला संस्कृति मंत्रालय के पास है।