ताजनगरी में खाकी का खौफ: आए दिन सड़कों पर जनता को पीट रही पुलिस... अफसर खानापूरी कर झाड़ते पल्ला
ताजनगरी में बदमाशों में नहीं जनता में खाकी का खौफ समाया है। यहां पुलिस आए दिन सड़कों पर जनता को पीट रही है। अफसर खानापूरी कर पल्ला झाड़ लेते हैं।
विस्तार
ताजनगरी आगरा में पुलिस की मनमानी थाने-चौकियों से लेकर सड़क तक नजर आती है। पीड़ितों से थाने में काम कराया जाता है। चौकी में लाकर थर्ड डिग्री तक दी जाती है। सड़क पर लोगों की पिटाई की बात हो या फिर वाहन चालकों से वसूली। इन मामलों में जितनी तेजी से लाइन हाजिर और निलंबन की कार्रवाई होती है, उतनी ही तेजी से पुलिसकर्मियों की बहाली भी हो जाती है। ऐसे में कार्रवाई सिर्फ खानापूरी रह जाती हैं। पेश है अमर उजाला की एक रिपोर्ट...।
केस- 1
मंगलवार को ट्रांस यमुना थाना में तैनात महिला दरोगा बिना वर्दी के टेढ़ी बगिया से ई-बस में रामबाग जा रही थी। रास्ते में टिकट को लेकर परिचालक से विवाद हुआ। उन्होंने परिचालक की पिटाई कर दी। घटना का वीडियो वायरल हो गया। डीसीपी सिटी ने बताया महिला दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया गया। विभागीय जांच के आदेश हुए हैं।
केस- 2
अप्रैल 2023 जगनेर के गांव नौनी निवासी मनोज शर्मा को सरेंधी चौकी पर ले जाकर थर्ड डिग्री दी गई थी। आरोप लगाया था कि रुपये की मांग की गई। एनकाउंटर का भय दिखाया गया। डर से मनोज की पत्नी ने घर में आत्महत्या कर ली। मामले में एक दरोगा और तीन सिपाहियों को निलंबित किया गया। बाद में पुलिसकर्मियों की बहाली हो गई।
केस- 3
जून 2022 में फाउंड्री नगर पुलिस चौकी में सादाबाद के चांदी कारीगरों से वसूली की गई। उन्हें चौकी में लाकर धमकाया गया। पुलिसकर्मियों पर एनकाउंटर की धमकी देकर परिजन से वसूली के आरोप लगाए गए थे। समाधान दिवस में एसएसपी को शिकायत हुई। चौकी प्रभारी और दो सिपाहियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई। मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
केस- 4
अक्तूबर में जगनेर का एक और मामला आया। पुलिस पर आरोप लगाए गए। थाना में शिकायत के लिए पहुंचे पीड़ित से ही काम कराया गया। थानाध्यक्ष ने उसे अपने घर में रख लिया। काम कराया। गांव भेजकर गोबर तक उठाया। बंधक बनाने के आरोप लगे। मामले में शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। मामला काफी चर्चा में रहा। बाद में समझौता हो गया।
छुट्टी नहीं, ज्यादा काम बढ़ा रहा गुस्सा
मानसिक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा संस्थान के निदेशक डाॅ. दिनेश राठौर का कहना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में पुलिस के पास समय की कमी है। ऑफिस से छुट्टी नहीं मिल पाती है। परिवार के लिए समय नहीं दे पाते हैं। ऐसे में गुस्सा आता है। इसको कम करने के लिए इन्हें योग करना चाहिए। जब भी समय मिले, परिवार के साथ ही बिताएं। बच्चों से बातचीत करें। मां-बाप और पत्नी से अपनी दिनचर्या को साझा करें।
विशेष परिस्थिति में ही अधिकार
आगरा के पूर्व डीआईजी (सेवानिवृत्त) महेश कुमार मिश्र ने बताया कि कानून सबके लिए बराबर है। पुलिस एक्ट में किसी की पिटाई का अधिकार नहीं दिया गया है। विशेष परिस्थिति में ही बल प्रयोग किया जा सकता है। गिरफ्तार और हिरासत में लिए गए व्यक्ति की जनरल डायरी में जानकारी दर्ज की जानी चाहिए। व्यक्ति का मेडिकल कराया जाए। थाने-चौकी पर लाने और जेल भेजने के दौरान चोटों का ब्योरा दर्ज हो। आम लोगों की तरह पुलिसकर्मियों पर भी मुकदमा दर्ज करके कार्रवाई हो सकती है।
मानवाधिकार में करें शिकायत, होगी कार्रवाई
युवा अधिवक्ता संघ के मंडल अध्यक्ष नितिन वर्मा ने बताया कि थाने-चौकियों में मानवाधिकारों के उल्लंघन के रोजाना मामले सामने आ रहे हैं। गालीगलौज, पिटाई सहित अन्य पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हो सकता है। मारपीट की शिकायत पर अधिकारियों से शिकायत करें। अगर, सुनवाई न हो तो कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया जा सकता है। मानवाधिकार आयोग में भी सुनवाई होगी। पीड़ित व्यक्ति को हर्जाना दिलवाने का भी प्रावधान है।