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अमर उजाला संवाद: 'चिकित्सा और प्रबंधन की व्यवस्था अलग-अलग करने की जरूरत'
Sun, 19 Jan 2020 12:36 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 19 Jan 2020 12:36 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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चिकित्सकीय स्टाफ की कमी और उपकरण व महंगी मशीनों का मेंटीनेंस नहीं होना बेहतर इलाज में सबसे बड़ी बाधा है। लेकिन संसाधनों को पूरा करने के साथ ही चिकित्सा और प्रबंधन की अलग-अलग व्यवस्था करने की जरूरत है। क्योंकि, चिकित्सा विशेषज्ञों को प्रबंधन के कार्य में लगाना उनकी विशेषज्ञता को जाया करना ही है।
'सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं क्या हों, कैसे इनमें सुधार हो सकता है' के मुद्दे पर संवाद का यही सार रहा। शनिवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक और समाजसेवी शमिल हुए।
समाजसेवियों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बाल रोग समेत विशेषज्ञों की कमी, चिकित्सकों के केंद्रों से गैरहाजिर रहने, एसएन मेडिकल कॉलेज में खराब पड़े वेंटीलेटर, एक्सरे मशीन और गंदगी की समस्या उठाई।
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आईएमए ने जिला प्रशासन और अस्पताल प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल को जरूरी बताया। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बजट और चिकित्सकों की कमी को वजह बताते हुए सीमित संसाधनों में बेहतर इलाज देने की बात कही।
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'सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं क्या हों, कैसे इनमें सुधार हो सकता है' के मुद्दे पर संवाद का यही सार रहा। शनिवार को अमर उजाला कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक और समाजसेवी शमिल हुए।
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समाजसेवियों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बाल रोग समेत विशेषज्ञों की कमी, चिकित्सकों के केंद्रों से गैरहाजिर रहने, एसएन मेडिकल कॉलेज में खराब पड़े वेंटीलेटर, एक्सरे मशीन और गंदगी की समस्या उठाई।
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आईएमए ने जिला प्रशासन और अस्पताल प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल को जरूरी बताया। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बजट और चिकित्सकों की कमी को वजह बताते हुए सीमित संसाधनों में बेहतर इलाज देने की बात कही।
बजट बढ़े तो बेहतर सुविधाएं
चिकित्सकों और स्टाफ की कमी से सेवाएं प्रभावित होती हैं। अस्पतालों में स्तरीय इलाज के लिए सरकार कार्य कर रही है, लेकिन अभी और बजट बढ़ाने की जरूरत है, जिससे सरकारी अस्पतालों में स्तरीय सुविधाएं मिल सकें। - डॉ. एसके वर्मा, एसआइसी जिला अस्पताल
बजट का नहीं हुआ सदुपयोग
सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों को बजट खूब दिया जा रहा है, लेकिन इनका सदुपयोग नहीं किया जाता। इसकी मानीटरिंग और ऑडिट सख्त होना चाहिए। जवाबदेही तय होने पर सुविधाएं बेहतर होंगी। एनजीओ भी सेवाएं देने को तैयार हैं। - सुनील विकल, अध्यक्ष, क्षेत्र बजाजा कमेटी
विशेषज्ञों की कमी से प्रभाव
विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, नर्सिंग स्टाफ का भी यही हाल है। इसके चलते सेवाएं प्रभावित होती हैं, लेकिन सीमित संसाधनों में बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास है। लोगों को भी सरकारी सुविधाएं लेने के लिए जागरूक होना चाहिए। - डॉ. पीके शर्मा, एसीएमओ
चिकित्सकों और स्टाफ की कमी से सेवाएं प्रभावित होती हैं। अस्पतालों में स्तरीय इलाज के लिए सरकार कार्य कर रही है, लेकिन अभी और बजट बढ़ाने की जरूरत है, जिससे सरकारी अस्पतालों में स्तरीय सुविधाएं मिल सकें। - डॉ. एसके वर्मा, एसआइसी जिला अस्पताल
बजट का नहीं हुआ सदुपयोग
सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों को बजट खूब दिया जा रहा है, लेकिन इनका सदुपयोग नहीं किया जाता। इसकी मानीटरिंग और ऑडिट सख्त होना चाहिए। जवाबदेही तय होने पर सुविधाएं बेहतर होंगी। एनजीओ भी सेवाएं देने को तैयार हैं। - सुनील विकल, अध्यक्ष, क्षेत्र बजाजा कमेटी
विशेषज्ञों की कमी से प्रभाव
विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, नर्सिंग स्टाफ का भी यही हाल है। इसके चलते सेवाएं प्रभावित होती हैं, लेकिन सीमित संसाधनों में बेहतर सुविधाएं देने का प्रयास है। लोगों को भी सरकारी सुविधाएं लेने के लिए जागरूक होना चाहिए। - डॉ. पीके शर्मा, एसीएमओ
दान किए उपकरण भी खराब
एसएन में ब्रेकीथेरेपी, वेंटीलेटर भी दिए लेकिन इनका रखरखाव नहीं होने से मरीजों को लाभ नहीं मिल पाता। इससे सामाजिक संगठन का मन भी दुखी रहता है। दान किए सामान की मेंटीनेंस हो तो सेवा के लिए तमाम एनजीओ तत्पर हो जाएंगी। - किशन अग्रवाल, महामंत्री हेल्प आगरा
चिकित्सा-प्रबंधन अलग हो
चिकित्सा और प्रबंधन का जिम्मा अलग-अलग बांटा जाए। चिकित्सा के लिए डॉक्टर और व्यवस्थाओं के लिए इंजीनियर एवं प्रबंधन के जानकार रखे जाने चाहिए। इससे दोनों ही विशेषज्ञ अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करेंगे। अभी चिकित्सक प्रबंधन कार्य भी देख रहे हैं। - गौतम सेठ, महामंत्री, सत्यमेव जयते
इमारत, उपकरण, स्टाफ मिले
बेहतर चिकित्सकीय सेवाओं के लिए इमारत, उपकरण और स्टाफ महत्वपूर्ण हैं। लेकिन इन तीनों के लिए जिला प्रशासन, शासन और जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं हैं। जब तक इन तीनों की उपलब्धता नहीं होगी शहर-देहात में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार संभव नहीं है। - डॉ. आरएम पचौरी, आईएमए अध्यक्ष
एसएन में ब्रेकीथेरेपी, वेंटीलेटर भी दिए लेकिन इनका रखरखाव नहीं होने से मरीजों को लाभ नहीं मिल पाता। इससे सामाजिक संगठन का मन भी दुखी रहता है। दान किए सामान की मेंटीनेंस हो तो सेवा के लिए तमाम एनजीओ तत्पर हो जाएंगी। - किशन अग्रवाल, महामंत्री हेल्प आगरा
चिकित्सा-प्रबंधन अलग हो
चिकित्सा और प्रबंधन का जिम्मा अलग-अलग बांटा जाए। चिकित्सा के लिए डॉक्टर और व्यवस्थाओं के लिए इंजीनियर एवं प्रबंधन के जानकार रखे जाने चाहिए। इससे दोनों ही विशेषज्ञ अपने क्षेत्र में बेहतर कार्य करेंगे। अभी चिकित्सक प्रबंधन कार्य भी देख रहे हैं। - गौतम सेठ, महामंत्री, सत्यमेव जयते
इमारत, उपकरण, स्टाफ मिले
बेहतर चिकित्सकीय सेवाओं के लिए इमारत, उपकरण और स्टाफ महत्वपूर्ण हैं। लेकिन इन तीनों के लिए जिला प्रशासन, शासन और जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं हैं। जब तक इन तीनों की उपलब्धता नहीं होगी शहर-देहात में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार संभव नहीं है। - डॉ. आरएम पचौरी, आईएमए अध्यक्ष
एआरवी, दवाओं का इंतजाम हो
जिला अस्पताल-सीएचसी में एआरवी खत्म हो जाती हैं। मरीज प्राइवेट में लगवाते हैं। अस्पतालों में जो भी सेवा शुरू हुई है, वह नियमित रहे और दवा, वैक्सीन आदि उपलब्धता पहले ही कर देनी चाहिए। इससे यहां आने वाले मरीजों की परेशानी कम होगी। - रवि बंसल, कार्यकारिणी सदस्य, सत्यमेव जयते
साफ-सफाई तक का बुरा हाल
एसएन मेडिकल कॉलेज में गंदगी सबसे बड़ी बीमारी बन गई है। मरीजों के चादर तक गंदे रहते हैं, कचरा पड़ा रहता है। येे मामूली समस्याएं हैं, लेकिन इन तक का समाधान नहीं हो पाता है। इससे यहां आने वाले मरीजों में अच्छा संदेश नहीं जाता है। - प्रमोद सिंघल, ब्रज क्षेत्र संगठन मंत्री, भाविप
टीकाकरण को जागरूक हों
टीकाकरण, अस्पताल में प्रसव के लिए लोगों में चेतना तो आई है, लेकिन अभी भी शतप्रतिशत जागरूकता नहीं है। गर्भवती महिलाओं के लिए 102 एंबुलेंस सेवा बेहतर है, बावजूद इसके अभी भी लोग गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल के बजाय झोलाछाप पर ले जाते हैं। - कुलदीप भारद्वाज, जिला कार्यक्रम अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग
सभी के सहयोग की दरकार
स्वास्थ्य सेवाएं चिकित्सक, समाज, एनजीओ, मीडिया के सहयोग से ही बेहतर हो सकती हैं। एनजीओ उस क्षेत्र में चिकित्सकीय सेवाएं विकसित करें जहां पहले से ही कोई नहीं है। मीडिया सरकारी अस्पतालों की अव्यवस्था के साथ सुविधाओं के बारे में भी लिखे। - डॉ. संजय चतुर्वेदी, आईएमए सचिव
जिला अस्पताल-सीएचसी में एआरवी खत्म हो जाती हैं। मरीज प्राइवेट में लगवाते हैं। अस्पतालों में जो भी सेवा शुरू हुई है, वह नियमित रहे और दवा, वैक्सीन आदि उपलब्धता पहले ही कर देनी चाहिए। इससे यहां आने वाले मरीजों की परेशानी कम होगी। - रवि बंसल, कार्यकारिणी सदस्य, सत्यमेव जयते
साफ-सफाई तक का बुरा हाल
एसएन मेडिकल कॉलेज में गंदगी सबसे बड़ी बीमारी बन गई है। मरीजों के चादर तक गंदे रहते हैं, कचरा पड़ा रहता है। येे मामूली समस्याएं हैं, लेकिन इन तक का समाधान नहीं हो पाता है। इससे यहां आने वाले मरीजों में अच्छा संदेश नहीं जाता है। - प्रमोद सिंघल, ब्रज क्षेत्र संगठन मंत्री, भाविप
टीकाकरण को जागरूक हों
टीकाकरण, अस्पताल में प्रसव के लिए लोगों में चेतना तो आई है, लेकिन अभी भी शतप्रतिशत जागरूकता नहीं है। गर्भवती महिलाओं के लिए 102 एंबुलेंस सेवा बेहतर है, बावजूद इसके अभी भी लोग गर्भवती महिला को सरकारी अस्पताल के बजाय झोलाछाप पर ले जाते हैं। - कुलदीप भारद्वाज, जिला कार्यक्रम अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग
सभी के सहयोग की दरकार
स्वास्थ्य सेवाएं चिकित्सक, समाज, एनजीओ, मीडिया के सहयोग से ही बेहतर हो सकती हैं। एनजीओ उस क्षेत्र में चिकित्सकीय सेवाएं विकसित करें जहां पहले से ही कोई नहीं है। मीडिया सरकारी अस्पतालों की अव्यवस्था के साथ सुविधाओं के बारे में भी लिखे। - डॉ. संजय चतुर्वेदी, आईएमए सचिव