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95 साल की मां को कांवड़ में बैठाकर परिक्रमा करा रहे ये 'श्रवण कुमार'
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
Updated Mon, 04 Jun 2018 05:27 PM IST
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डोली में 95 साल की बुजुर्ग महिला
- फोटो : अमर उजाला
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कलयुग में जहां कुछ लोग अपने बुजुर्ग मां-बाप को बोझ समझकर वृद्धाश्रम में छोड़ आते हैं। वहीं, ऐसे लोग भी हैं जो 'श्रवण कुमार' बनकर अपने बूढ़े मां-बाप की सेवा कर रहे हैं।
अलीगढ़ जिले के बहमती गांव निवासी सुरेश सिंह, राजू सिंह, भोलाराम और मोती सिंह अपनी 95 साल की वृद्ध मां हरकेबेदी को कांवड़ में बैठाकर बृज चौरासी कोस की परिक्रमा लगवा रहे हैं।
मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह इन पुत्रों के सेवा भाव को देखने वाले इनकी वाह-वाह कर रहे हैं। कांवड़ में लेटी मां भी हाथ उठाकर अपने बच्चों को आशीर्वाद दे रही है।
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अलीगढ़ जिले के बहमती गांव निवासी सुरेश सिंह, राजू सिंह, भोलाराम और मोती सिंह अपनी 95 साल की वृद्ध मां हरकेबेदी को कांवड़ में बैठाकर बृज चौरासी कोस की परिक्रमा लगवा रहे हैं।
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मथुरा के परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह इन पुत्रों के सेवा भाव को देखने वाले इनकी वाह-वाह कर रहे हैं। कांवड़ में लेटी मां भी हाथ उठाकर अपने बच्चों को आशीर्वाद दे रही है।
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इनका कहना है कि उनकी मां का सपना है कि वो पूरे परिवार के सदस्यों के साथ ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा लगाए। मां को उठने-बैठने में दिक्कत होती है इसलिए उन्होंने उनके लिए खटिया की डोली तैयार की और पूरे परिवार के साथ एक जून को राया से परिक्रमा शुरू कर दी।
सुरेश ने बताया कि वो लोग मां को रास्ते में आने वाले बृज के तीर्थ स्थलों के दर्शन भी करा रहे हैं। मां की इच्छा के अनुसार उनके साथ बहू मुन्नी देवी, राजवती, प्रपौत्र भूपेंद्र, सुरेश चंद, क्षेत्रपाल, विजय और प्रपौत्री शिवम, प्रियंका, कीर्ति सहित परिवार के 25 लोग परिक्रमा लगा रहे हैं।
रविवार को सौंख पहुंचने पर भोलाराम ने बताया कि मां को डोली से चार बार चौरासी कोस की परिक्रमा लगवा चुके हैं, लेकिन मां के कहे अनुसार पूरे परिवार के साथ पहली बार ही आए हैं।
सुरेश ने बताया कि वो लोग मां को रास्ते में आने वाले बृज के तीर्थ स्थलों के दर्शन भी करा रहे हैं। मां की इच्छा के अनुसार उनके साथ बहू मुन्नी देवी, राजवती, प्रपौत्र भूपेंद्र, सुरेश चंद, क्षेत्रपाल, विजय और प्रपौत्री शिवम, प्रियंका, कीर्ति सहित परिवार के 25 लोग परिक्रमा लगा रहे हैं।
रविवार को सौंख पहुंचने पर भोलाराम ने बताया कि मां को डोली से चार बार चौरासी कोस की परिक्रमा लगवा चुके हैं, लेकिन मां के कहे अनुसार पूरे परिवार के साथ पहली बार ही आए हैं।