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आगरा: लाखों का ऑक्सीजन प्लांट बना शोपीस, सिलिंडरों के भरोसे नवजातों का इलाज; सात दिन में इतने हो गए खर्च
Sat, 24 Oct 2026 11:56 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 24 Oct 2026 11:56 AM IST
सार
आगरा के जिला महिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट पिछले एक सप्ताह से खराब है, जिसके चलते एसएनसीयू समेत अन्य वार्डों में ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए सिलिंडरों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस दौरान बड़े और छोटे सिलिंडरों पर करीब 1.43 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं।
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खराब पड़ा हुआ है ऑक्सीजन प्लांट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा जिला महिला अस्पताल में पिछले एक सप्ताह से ऑक्सीजन प्लांट खराब पड़ा हुआ है। और पूरी व्यवस्था महंगे सिलिंडरों के भरोसे चलाई जा रही है। अस्पताल में सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की जरूरत नवजात शिशु गहन देखभाल इकाई (एसएनसीयू) वार्ड में पड़ती है, जहां लगभग 16 मशीनें लगी हुई हैं। इन मशीनों में भर्ती गंभीर नवजात बच्चों की सांसें बचाने के लिए बाहर से ऑक्सीजन सिलिंडर मंगाने पड़ रहे हैं। अस्पताल में एक सप्ताह में ल्रगभग 20 बडे और 16 छोटे मंगाए जा चुके है। लेकिन प्लांट ठप होने से संकट गहरा गया है।
अस्पताल में दो तरह के सिलेंडरों का उपयोग होता है। 46.7 लीटर क्षमता वाले बड़े जंबो सिलिंडर की कीमत लगभग 8,000 से 10,000 रुपये (किट और रेगुलेटर के साथ 14,000 रुपये) है, जिसका उपयोग एसएनसीयू, ओटी और बैकअप के लिए होता है। वहीं, लगभग 10 लीटर क्षमता वाले छोटे सिलेंडर की कीमत 4,500 से 6,500 रुपये होती है, जो इमरजेंसी वार्ड और एम्बुलेंस में मरीज की शिफ्टिंग के दौरान काम आते हैं। पिछले एक सप्ताह में प्लांट खराब रहने के कारण बड़े और छोटे सिलेंडरों पर लगभग 1,43,000 रुपये खर्च हो चुके हैं।
नवजात शिशुओं के अलावा सिजेरियन डिलीवरी और एनेस्थीसिया देने के दौरान भी मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि जब केवल एक सप्ताह में सिलेंडरों पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, तो लाखों की लागत से लगा ऑक्सीजन प्लांट महज शोपीस बनकर रह गया है।
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जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुष्पलता ने बताया कि प्लांट को जल्द ही ठीक करवा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मैकेनिक को बोल दिया गया है, जो प्लांट की मोटर निकालकर ले गया है और जल्द ही ऑक्सीजन आपूर्ति सुचारू कर दी जाएगी।
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अस्पताल में दो तरह के सिलेंडरों का उपयोग होता है। 46.7 लीटर क्षमता वाले बड़े जंबो सिलिंडर की कीमत लगभग 8,000 से 10,000 रुपये (किट और रेगुलेटर के साथ 14,000 रुपये) है, जिसका उपयोग एसएनसीयू, ओटी और बैकअप के लिए होता है। वहीं, लगभग 10 लीटर क्षमता वाले छोटे सिलेंडर की कीमत 4,500 से 6,500 रुपये होती है, जो इमरजेंसी वार्ड और एम्बुलेंस में मरीज की शिफ्टिंग के दौरान काम आते हैं। पिछले एक सप्ताह में प्लांट खराब रहने के कारण बड़े और छोटे सिलेंडरों पर लगभग 1,43,000 रुपये खर्च हो चुके हैं।
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नवजात शिशुओं के अलावा सिजेरियन डिलीवरी और एनेस्थीसिया देने के दौरान भी मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि जब केवल एक सप्ताह में सिलेंडरों पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, तो लाखों की लागत से लगा ऑक्सीजन प्लांट महज शोपीस बनकर रह गया है।
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जिला महिला अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पुष्पलता ने बताया कि प्लांट को जल्द ही ठीक करवा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मैकेनिक को बोल दिया गया है, जो प्लांट की मोटर निकालकर ले गया है और जल्द ही ऑक्सीजन आपूर्ति सुचारू कर दी जाएगी।