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मिट्टी में दबा दिए 300 करोड़
मिट्टी में दबा दिए 300 करोड़
Updated Wed, 11 Jan 2017 12:06 AM IST
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मिट्टी में दबा दिए 300 करोड़
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर की सीवर समस्या से निदान के लिए जवाहर लाल नेहरू अरबन रिन्यूवल मिशन (जेनर्म) के तहत डाली गई लाइनें शहरवासियों के लिए छलावा साबित हो रही हैं। जल निगम की यमुना एक्शन प्लान शाखा ने करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से लाइन तो बिछा दी हैं लेकिन कहीं कनेक्टिविटी न होने कारण समस्या विकराल हो गई है। इसकी वजह से जनता के साथ-साथ जलकल विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं।
गौरतलब है कि जेनर्म के तहत शहर के नार्थ, वेस्ट और सेंट्रल जोन में करीब करीब 280 करोड़ रुपये की लागत सीवर लाइन डाली गई थीं। यह काम जल निगम की यमुना एक्शन प्लान इकाई ने कराया था। सीवर ट्रीटमेंट के लिए पंपिंग स्टेशन और ट्रीटमेंट प्लाटों की व्यवस्था थी। लाइन बिछाने का काम 2012 तक कंप्लीट हो गया। लाइनें जलकल विभाग को हैंडओवर भी कर दी गई,ं लेकिन अभी तक विभाग ने जनता को कनेक्शन तक नहीं दिए हैं। जिन इलाकों में कनेक्शन दिए थे वहां कुछ ही महीनों में नारकीय हालात हो गए हैं। सीवर चोक हो चुके हैं और गंदा पानी सड़कों और घरों में भर रहा है। ऐसे ही हालात दयालबाग में पुष्पांजलि बाग के हैं। यहां निवासी जसवंत वर्मा, डीएस तिवारी और सचिव महेंद्र सिंह ने बताया कि कई बार जलकल विभाग को लिखकर दिया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। अब जीएम ने स्वयं एक्शन लिया है तब जाकर पता चला है कि कालोनी से बाहर लाइन की कनेक्टिविटी ही नहीं है।
इनबाक्स...
इन इलाकों में डाली गई थी सीवर लाइन
जेनर्म योजना के तहत शहर में लाजपत कुंज, भरतपुर हाउस, खंदारी, बाग फरजाना, नेहरू नगर, सूर्य नगर, यमुना किनारा, दयालबाग, कमला नगर एक्सटेंशन, बल्केश्वर, मारुति एस्टेट, सुंदरपाड़ा, रामनगर पुलिया, शाहगंज, न्यू राजामंडी, तहसील, कैलाशपुरी तक सीवर लाइन डाली गई थी।
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इनबाक्स...
हाउस कनेक्टिंग चेंबर तक नहीं बनाए
शहर में डाली गई सीवर लाइन में पैसा आंख बंद करके फूंका गया। कई इलाकों में लाइन 35-35 फुट गहराई में डाली गई। शहर की मुख्य सड़कों को और कालोनियों की सड़कों को खोदकर डाल दिया गया लेकिन इंजीनियरिंग का फेलियर देखिए कि सड़कों का निर्माण भी कर दिया लेकिन किसी इंजीनियर के दिमाग में यह नहीं आया कि बिना हाउस कनेक्टिंग चेंबर के कनेक्शन कैसे दिए जाएंगे। बाद में इंजीनियरों ने यह देखा तब दोबारा सर्वे हुए और करीब 35 हजार हाउस कनेटिंग चेंबरों के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया।
इनबाक्स...
11-11 हजार रुपये में दिए हैं कनेक्शन
पुष्पांजलि बाग के निवासियों ने बताया कि जलकल विभाग ने प्रति कनेक्शन 11 हजार रुपये की फीस लेकर कनेक्शन दिए हैं। चंद महीनों में जलकल विभाग और जलनिगम की हकीकत सामने आ गई है। ये तो उन क्षेत्रों का हाल है जहां अभी कनेक्शन दिए हैं, अभी तो शहर का काफी हिस्सा है जहां कनेक्शन देने की कोई सूरत ही दिखाई नहीं दे रही है।
‘समस्या बेहद गंभीर है। पुष्पांजलि बाग में सीवर की पड़ताल की गई है। उसमें मिट्टी निकल रही है। ऐसा लग रहा है कि कालोनी के बाहर सीवर लाइन की कोई कनेक्टिवटी नहीं है। इस संबंध में जल निगम को पत्र लिखा गया है। यह जांच का विषय है कि बिना लाइनों की टेस्टिंग के सीवर टेकओवर कैसी की गई है।’
शैलेंद्र कुमार वर्मा, जीएम जलकल
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गौरतलब है कि जेनर्म के तहत शहर के नार्थ, वेस्ट और सेंट्रल जोन में करीब करीब 280 करोड़ रुपये की लागत सीवर लाइन डाली गई थीं। यह काम जल निगम की यमुना एक्शन प्लान इकाई ने कराया था। सीवर ट्रीटमेंट के लिए पंपिंग स्टेशन और ट्रीटमेंट प्लाटों की व्यवस्था थी। लाइन बिछाने का काम 2012 तक कंप्लीट हो गया। लाइनें जलकल विभाग को हैंडओवर भी कर दी गई,ं लेकिन अभी तक विभाग ने जनता को कनेक्शन तक नहीं दिए हैं। जिन इलाकों में कनेक्शन दिए थे वहां कुछ ही महीनों में नारकीय हालात हो गए हैं। सीवर चोक हो चुके हैं और गंदा पानी सड़कों और घरों में भर रहा है। ऐसे ही हालात दयालबाग में पुष्पांजलि बाग के हैं। यहां निवासी जसवंत वर्मा, डीएस तिवारी और सचिव महेंद्र सिंह ने बताया कि कई बार जलकल विभाग को लिखकर दिया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। अब जीएम ने स्वयं एक्शन लिया है तब जाकर पता चला है कि कालोनी से बाहर लाइन की कनेक्टिविटी ही नहीं है।
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इन इलाकों में डाली गई थी सीवर लाइन
जेनर्म योजना के तहत शहर में लाजपत कुंज, भरतपुर हाउस, खंदारी, बाग फरजाना, नेहरू नगर, सूर्य नगर, यमुना किनारा, दयालबाग, कमला नगर एक्सटेंशन, बल्केश्वर, मारुति एस्टेट, सुंदरपाड़ा, रामनगर पुलिया, शाहगंज, न्यू राजामंडी, तहसील, कैलाशपुरी तक सीवर लाइन डाली गई थी।
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हाउस कनेक्टिंग चेंबर तक नहीं बनाए
शहर में डाली गई सीवर लाइन में पैसा आंख बंद करके फूंका गया। कई इलाकों में लाइन 35-35 फुट गहराई में डाली गई। शहर की मुख्य सड़कों को और कालोनियों की सड़कों को खोदकर डाल दिया गया लेकिन इंजीनियरिंग का फेलियर देखिए कि सड़कों का निर्माण भी कर दिया लेकिन किसी इंजीनियर के दिमाग में यह नहीं आया कि बिना हाउस कनेक्टिंग चेंबर के कनेक्शन कैसे दिए जाएंगे। बाद में इंजीनियरों ने यह देखा तब दोबारा सर्वे हुए और करीब 35 हजार हाउस कनेटिंग चेंबरों के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया।
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11-11 हजार रुपये में दिए हैं कनेक्शन
पुष्पांजलि बाग के निवासियों ने बताया कि जलकल विभाग ने प्रति कनेक्शन 11 हजार रुपये की फीस लेकर कनेक्शन दिए हैं। चंद महीनों में जलकल विभाग और जलनिगम की हकीकत सामने आ गई है। ये तो उन क्षेत्रों का हाल है जहां अभी कनेक्शन दिए हैं, अभी तो शहर का काफी हिस्सा है जहां कनेक्शन देने की कोई सूरत ही दिखाई नहीं दे रही है।
‘समस्या बेहद गंभीर है। पुष्पांजलि बाग में सीवर की पड़ताल की गई है। उसमें मिट्टी निकल रही है। ऐसा लग रहा है कि कालोनी के बाहर सीवर लाइन की कोई कनेक्टिवटी नहीं है। इस संबंध में जल निगम को पत्र लिखा गया है। यह जांच का विषय है कि बिना लाइनों की टेस्टिंग के सीवर टेकओवर कैसी की गई है।’
शैलेंद्र कुमार वर्मा, जीएम जलकल