देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर हुआ आगरा, दिल्ली से बुरा है ताज नगरी का हाल
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मानसून में देश की सबसे स्वच्छ हवा वाला शहर रहा था आगरा, लेकिन अब लगातार कूड़ा जलाने और निर्माण सामग्री के कारण धूल उड़ने से शनिवार को आगरा देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर हो गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से शनिवार शाम को जारी किए गए एयर क्वालिटी इंडेक्स (वायु गुणवत्ता सूचकांक) में भिवाड़ी 398 अंक के साथ सबसे प्रदूषित शहरों में नंबर एक पर रहा, जबकि आगरा 336 अंक के साथ दूसरे नंबर पर रहा। दिल्ली, फरीदाबाद, नोएडा, गुड़गांव जैसे शहरों में प्रदूषण आगरा से कम दर्ज किया गया।
मानक से छह गुना ज्यादा प्रदूषण
कार्बन मोनोक्साइड के लिए पर्यावरण नियमों में प्रति 8 घंटे में 2 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर मानक है, जबकि प्रति घंटे के लिए यह मानक 4 है, लेकिन शनिवार को जारी एक्यूआई में यह 27 गुना ज्यादा यानी 108 पर रहा। इसी तरह पीएम 2.5 कणों की संख्या मानक से 6 गुना तक ज्यादा रही। केवल रात में ही पीएम कण कम रहे, लेकिन दिन में सुबह से रात 12 बजे तक इनकी संख्या ज्यादा दर्ज की गई। पहली बार नाइट्रोजन डाइक्साइड की मात्रा 6 गुना ज्यादा तक रही।
कूड़ा जलाने से बेकाबू हो रहे हालात
एक सप्ताह से कूड़ा जलाने की घटनाएं शहर में बढ़ी थीं, ऐसे में शहर में प्रदूषण के स्तर में लगातार बढ़ोतरी हुई, लेकिन शनिवार को यह खतरनाक स्तर पर पहुंच गया। दरअसल, जहां पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का आटोमेटिक स्टेशन लगा हुआ है, उसके आसपास ही कूड़ा भारी मात्रा में जलाया गया।
संजय प्लेस में सबस्टेशन के पीछे रातभर कूड़ा जला, वहीं हरीपर्वत रेलवे पुल पर कपड़ों और चमड़े की कतरन में आग लगी रही, जिससे काला धुंआ आटो-मेटिक स्टेशन की तरफ ही निकला। इधर, पंचकुइयां पर जीआईसी मैदान के पास बनाए गए डंपिंग जोन में भी रात में कूड़े में आग लगा दी गई थी। यह आग इतनी विकराल हो उठी कि फायर ब्रिगेड को बुलाकर बुझानी पड़ी।
भिवाड़ी 398
आगरा 336
गाजियाबाद 332
गुड़गांव 325
फरीदाबाद 306
बागपत 293
नवी मुंबई 282
ग्रेटर नोएडा 281
-कार्बन मोनोक्साइड, नाइट्रोजन डाइक्साइड और पीएम कणों में वृद्धि के कारण अस्थमा के अटैक आ सकते हैं, वहीं लंबे समय तक ऐसा प्रदूषण रहने पर दिल की बीमारी का खतरा बढ़ता है। सर्दी में स्मॉग में बढ़ोतरी होगी, ऐसे में सांस के रोगियों के लिए अब बचाव के लिए उपाय करने की जरूरत है। यह प्रदूषण उनके लिए काफी खतरनाक है।
डा. जीबी सिंह, चिकित्सक, क्षय रोग विभाग, एसएन मेडिकल कालेज