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स्मार्ट सिटी आगरा का हाल: 375 करोड़ खर्च, बढ़ाए गए दो हजार सफाईकर्मी...फिर भी सड़कों पर कूड़े के ढेर!
Thu, 14 May 2026 11:34 AM IST
Dhirendra Singh
संवाद न्यूज एजेंसी,आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी,आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Thu, 14 May 2026 11:34 AM IST
सार
आगरा नगर निगम सफाई व्यवस्था पर हर साल 375 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं। स्वच्छ सर्वेक्षण से पहले गंदगी और बंद डलावघरों ने नगर निगम के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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कूड़े का ढेर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शहर में सफाई व्यवस्था के नाम पर आगरा नगर निगम हर साल 375 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। दो हजार सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन शहर में कचरे के ढेर नहीं घटे। मंदिरों, सड़कों, कॉलोनियों, रेलवे लाइन और प्रमुख चौराहों के पास कचरे के ढेर लगे हैं। नगर निगम के अधिकारी 88 फीसदी घरों से कचरा लेने का दावा कर रहे हैं, लेकिन सड़क किनारे अवैध डलावघरों और कॉलोनियों के खाली प्लॉटों में कचरे के ढेर लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। यह हाल तब है, जब स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम इसी माह आनी है।
मन:कामेश्वर और पृथ्वीनाथ मंदिर के पास कचरे के ढेर लगे होने पर श्रद्धालुओं ने आक्रोश जताया। वहीं कमला नगर रोड पर अबुल उला दरगाह के पास मैदान में कचरा पड़ा हुआ मिला। यहां हर बृहस्पतिवार को हजारों लोग पहुंचते हैं। बल्केश्वर, ट्रांसपोर्ट नगर, अवधपुरी, दयालबाग, पश्चिमपुरी, अलबतिया रोड, मारुति एस्टेट रोड, ताजगंज में कचरे के ढेर लगे हुए हैं। खास बात ये है कि ये स्थान डलावघर के रूप में पंजीकृत नहीं हैं। नगर निगम डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन कर इसे कुबेरपुर लैंडफिल साइट तक पहुंचाने के लिए हर साल 70 करोड़ रुपये खर्च करता है।
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मन:कामेश्वर और पृथ्वीनाथ मंदिर के पास कचरे के ढेर लगे होने पर श्रद्धालुओं ने आक्रोश जताया। वहीं कमला नगर रोड पर अबुल उला दरगाह के पास मैदान में कचरा पड़ा हुआ मिला। यहां हर बृहस्पतिवार को हजारों लोग पहुंचते हैं। बल्केश्वर, ट्रांसपोर्ट नगर, अवधपुरी, दयालबाग, पश्चिमपुरी, अलबतिया रोड, मारुति एस्टेट रोड, ताजगंज में कचरे के ढेर लगे हुए हैं। खास बात ये है कि ये स्थान डलावघर के रूप में पंजीकृत नहीं हैं। नगर निगम डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन कर इसे कुबेरपुर लैंडफिल साइट तक पहुंचाने के लिए हर साल 70 करोड़ रुपये खर्च करता है।
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सफाई व्यवस्था पर ये है सालाना खर्च
डोर-डू-डोर कूड़ा कलेक्शन - 70 करोड़
ठोस कूड़ा निस्तारण योजना - 70 करोड़
सफाई कर्मचारियों पर - 100 करोड़
आउटसोर्स सफाईकर्मी - 90 करोड़
सफाई में लगे वाहनों का ईंधन - 26 करोड़
वाहनों की मरम्मत पर खर्च - 14 करोड़
सफाई निरीक्षक वेतन - सात करोड़
डोर-डू-डोर कूड़ा कलेक्शन - 70 करोड़
ठोस कूड़ा निस्तारण योजना - 70 करोड़
सफाई कर्मचारियों पर - 100 करोड़
आउटसोर्स सफाईकर्मी - 90 करोड़
सफाई में लगे वाहनों का ईंधन - 26 करोड़
वाहनों की मरम्मत पर खर्च - 14 करोड़
सफाई निरीक्षक वेतन - सात करोड़
कूड़ा न उठे तो ये है जुर्माने की व्यवस्था
- घरों से कूड़ा न लेने पर 25 रुपये प्रति घर और 2500 रुपये प्रति वाहन
- कॉलोनी में वाहन न आए तो संबंधित वाहन पर 2500 रुपये जुर्माना
- कर्मचारी यूनिफॉर्म में न हो तो 50 रुपये प्रतिदिन कंपनी पर जुर्माना
- डलावघर के अलावा कहीं भी कचरा डालने पर 10 हजार रुपये जुर्माना
- कचरा फैलाते हुए और बिना ढके ले जाने पर पांच हजार रुपये जुर्माना
- घरों से कूड़ा न लेने पर 25 रुपये प्रति घर और 2500 रुपये प्रति वाहन
- कॉलोनी में वाहन न आए तो संबंधित वाहन पर 2500 रुपये जुर्माना
- कर्मचारी यूनिफॉर्म में न हो तो 50 रुपये प्रतिदिन कंपनी पर जुर्माना
- डलावघर के अलावा कहीं भी कचरा डालने पर 10 हजार रुपये जुर्माना
- कचरा फैलाते हुए और बिना ढके ले जाने पर पांच हजार रुपये जुर्माना
एक साल में खत्म करने थे सभी डलावघर
नगर निगम ने घरों से कचरा लेने के लिए बंगलूरू की स्वच्छता काॅर्पोरेशन से करार किया है। उसे 90 दिन में 100 फीसदी घरों से कचरा लेना था। चार साल बाद भी कंपनी का 88 फीसदी घरों से ही कूड़ा उठाने का दावा है। कंपनी को एक साल में शहर के सभी डलावघरों को खत्म करना था, लेकिन सड़कों और चौराहों के साथ खाली प्लॉटों और नालों में कचरा भरा पड़ा है।
नगर निगम ने घरों से कचरा लेने के लिए बंगलूरू की स्वच्छता काॅर्पोरेशन से करार किया है। उसे 90 दिन में 100 फीसदी घरों से कचरा लेना था। चार साल बाद भी कंपनी का 88 फीसदी घरों से ही कूड़ा उठाने का दावा है। कंपनी को एक साल में शहर के सभी डलावघरों को खत्म करना था, लेकिन सड़कों और चौराहों के साथ खाली प्लॉटों और नालों में कचरा भरा पड़ा है।
सिर्फ प्रमुख सड़कों पर सफाई
पार्षद बंटी माहौर ने बताया कि शहर की सफाई व्यवस्था ठप पड़ी है। केवल मुख्य सड़कों पर काम चल रहा है, जबकि गलियां, बस्तियां और मोहल्लों में गंदगी के ढेर लगे हैं। निगम सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये बर्बाद कर रहा है।
पार्षद बंटी माहौर ने बताया कि शहर की सफाई व्यवस्था ठप पड़ी है। केवल मुख्य सड़कों पर काम चल रहा है, जबकि गलियां, बस्तियां और मोहल्लों में गंदगी के ढेर लगे हैं। निगम सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये बर्बाद कर रहा है।
नालों में भरा कचरा
पार्षद यशपाल सिंह ने बताया कि सफाई न होने पर जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन निगम अधिकारी इस पर भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। सफाई व्यवस्था का हाल बेहद खराब है। नालों में कचरा भरा पड़ा है, जबकि इस पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं।
पार्षद यशपाल सिंह ने बताया कि सफाई न होने पर जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन निगम अधिकारी इस पर भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। सफाई व्यवस्था का हाल बेहद खराब है। नालों में कचरा भरा पड़ा है, जबकि इस पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं।
पार्षद करें सफाई का सत्यापन
पार्षद कप्तान सिंह ने बताया कि सफाई व्यवस्था के लिए विशेष कार्यबल बनाया जाए, जो पूरी तरह जवाबदेह हो। पार्षदों से सड़क और नालों की सफाई का सत्यापन कराया जाए। हर पार्षद को पांच से 10 सफाईकर्मी दिए जाएं, ताकि उनके माध्यम से क्षेत्र में कचरा हटवाया जा सके।
पार्षद कप्तान सिंह ने बताया कि सफाई व्यवस्था के लिए विशेष कार्यबल बनाया जाए, जो पूरी तरह जवाबदेह हो। पार्षदों से सड़क और नालों की सफाई का सत्यापन कराया जाए। हर पार्षद को पांच से 10 सफाईकर्मी दिए जाएं, ताकि उनके माध्यम से क्षेत्र में कचरा हटवाया जा सके।