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बेबस सिस्टम: ट्रेन-बसों से चांदी की तस्करी का खेल, 3 मामलों में 431 किलो बरामद; उठ रहे ये सवाल
Wed, 21 Oct 2026 10:29 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Wed, 21 Oct 2026 10:29 AM IST
सार
आगरा से ट्रेन और बसों के जरिए दूसरे राज्यों में चांदी के आभूषणों की कथित कर चोरी और तस्करी के मामले सामने आए हैं। 5 सितंबर, 10 अक्तूबर और 19 अक्तूबर 2026 की तीन घटनाओं में कुल 431 किलो चांदी बरामद होने के बाद जीएसटी की जांच व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
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चांदी।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
चांदी की मंडी बन चुकी ताजनगरी से बड़े पैमाने पर तस्करी का खेल चल रहा है। ट्रेन और बसों से गैर राज्यों में चांदी के आभूषण भेजे जा रहे हैं। रोकथाम में सिस्टम बेबस है। आरोप हैं कि यह पूरा खेल जीएसटी की एसआईबी और मोबाइल टीमों की सांठगांठ से चल रहा है।
जीएसटी की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) और मोबाइल टीमों की कथित मिलीभगत से यह पूरा सिंडिकेट संचालित है। कार्रवाई के नाम पर यदा-कदा माल पकड़ा भी जाता है, तो विभागीय स्तर पर तस्करी के पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल करने के बजाय महज जुर्माना वसूलकर खानापूर्ति कर दी जाती है।
चांदी के इस अवैध कारोबार में कर चोरी के लिए ट्रेनों की सामान्य बोगियों और यूपी व राजस्थान रोडवेज के अलावा ट्रेवल्स की बसों का सहारा लिया जा रहा है। कूरियर एजेंट अपने पिट्ठू बैग, कपड़ों में विशेष बेल्ट बांधकर भारी मात्रा में चांदी के जेवर व सिल्लियां ले जाते हैं। इसके अलावा कभी सीट की प्लाई काटकर चांदी छुपाई जाती हैं, तो कभी सवारी के सामान में छिपाकर चोरी होती है। बिना ई-वे बिल और पक्के कागजात के माल की डिलीवरी हो जाती है। जांच टीमों की अनदेखी और रेलवे स्टेशन, ट्रेवल्स के बस अड्डों पर नियमित चेकिंग न होने से तस्कर आसानी से माल पार करा लेते हैं।
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सिंडिकेट तक नहीं पहुंचते हाथ
बिना बिल का माल पकड़े जाने पर एसआईबी और मोबाइल टीम केवल कर और जुर्माना जमा करवाकर इतिश्री कर लेती है। माल सप्लाई करने वाले बड़े बुलियन व्यापारियों और इसे खरीदने वाले मुख्य सरगनाओं का बैकवर्ड व फॉरवर्ड लिंकेज नहीं खंगाला जाता। यही वजह है कि जुर्माना भरने के तुरंत बाद तस्कर नए कूरियर के साथ फिर सक्रिय हो जाते हैं। चांदी पकड़े जाने के बाद जीएसटी टीम की जांच केवल वजन और कर मूल्यांकन तक सीमित रहती है। संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, बेनामी फर्मों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच न होने से तस्करी के असली सूत्रधार हमेशा बच निकलते हैं। अपर आयुक्त ग्रेड-2 अंजनी अग्रवाल ने बताया कि बसों में सवारियां जांच नहीं करने देती। यात्री सामान की आड़ में बसों में इन्हें ले जाया जाता है। सभी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
केस-एक
5 सितंबर 2026 को सैंया टोल पर राधिका ट्रेवल्स की बस से 250 किलो चांदी जब्त की गई। यह चांदी मूंगफली की बोरियों में छिपाकर इंदौर भेजी जा रही है। सचल दल ने जुर्माना जमा कराकर मामला दाखिल दफ्तर कर दिया।
केस- दो
10 अक्तूबर 2026 को आगरा से वाराणसी जा रही संजय ट्रेवल्स की बस से 48 किलो चांदी के आभूषण पकड़े गए। इन्हें सीट की प्लाई काटकर छिपाकर ले जाया जा रहा था। मामले में जीएसटी विभाग जांच में जुटा है।
केस-तीन
19 अक्तूबर 2026 को एपी एक्सप्रेस से झांसी में 133 किलो चांदी के आभूषण बरामद हुए। आगरा से प्लास्टिक की चार बोरियों में आभूषण ट्रेन में लादे गए थे। नागपुर ले जाया जा रहा था। मामले में जांच शुरू हो गई है।
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जीएसटी की विशेष अनुसंधान शाखा (एसआईबी) और मोबाइल टीमों की कथित मिलीभगत से यह पूरा सिंडिकेट संचालित है। कार्रवाई के नाम पर यदा-कदा माल पकड़ा भी जाता है, तो विभागीय स्तर पर तस्करी के पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल करने के बजाय महज जुर्माना वसूलकर खानापूर्ति कर दी जाती है।
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चांदी के इस अवैध कारोबार में कर चोरी के लिए ट्रेनों की सामान्य बोगियों और यूपी व राजस्थान रोडवेज के अलावा ट्रेवल्स की बसों का सहारा लिया जा रहा है। कूरियर एजेंट अपने पिट्ठू बैग, कपड़ों में विशेष बेल्ट बांधकर भारी मात्रा में चांदी के जेवर व सिल्लियां ले जाते हैं। इसके अलावा कभी सीट की प्लाई काटकर चांदी छुपाई जाती हैं, तो कभी सवारी के सामान में छिपाकर चोरी होती है। बिना ई-वे बिल और पक्के कागजात के माल की डिलीवरी हो जाती है। जांच टीमों की अनदेखी और रेलवे स्टेशन, ट्रेवल्स के बस अड्डों पर नियमित चेकिंग न होने से तस्कर आसानी से माल पार करा लेते हैं।
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सिंडिकेट तक नहीं पहुंचते हाथ
बिना बिल का माल पकड़े जाने पर एसआईबी और मोबाइल टीम केवल कर और जुर्माना जमा करवाकर इतिश्री कर लेती है। माल सप्लाई करने वाले बड़े बुलियन व्यापारियों और इसे खरीदने वाले मुख्य सरगनाओं का बैकवर्ड व फॉरवर्ड लिंकेज नहीं खंगाला जाता। यही वजह है कि जुर्माना भरने के तुरंत बाद तस्कर नए कूरियर के साथ फिर सक्रिय हो जाते हैं। चांदी पकड़े जाने के बाद जीएसटी टीम की जांच केवल वजन और कर मूल्यांकन तक सीमित रहती है। संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, बेनामी फर्मों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच न होने से तस्करी के असली सूत्रधार हमेशा बच निकलते हैं। अपर आयुक्त ग्रेड-2 अंजनी अग्रवाल ने बताया कि बसों में सवारियां जांच नहीं करने देती। यात्री सामान की आड़ में बसों में इन्हें ले जाया जाता है। सभी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
केस-एक
5 सितंबर 2026 को सैंया टोल पर राधिका ट्रेवल्स की बस से 250 किलो चांदी जब्त की गई। यह चांदी मूंगफली की बोरियों में छिपाकर इंदौर भेजी जा रही है। सचल दल ने जुर्माना जमा कराकर मामला दाखिल दफ्तर कर दिया।
केस- दो
10 अक्तूबर 2026 को आगरा से वाराणसी जा रही संजय ट्रेवल्स की बस से 48 किलो चांदी के आभूषण पकड़े गए। इन्हें सीट की प्लाई काटकर छिपाकर ले जाया जा रहा था। मामले में जीएसटी विभाग जांच में जुटा है।
केस-तीन
19 अक्तूबर 2026 को एपी एक्सप्रेस से झांसी में 133 किलो चांदी के आभूषण बरामद हुए। आगरा से प्लास्टिक की चार बोरियों में आभूषण ट्रेन में लादे गए थे। नागपुर ले जाया जा रहा था। मामले में जांच शुरू हो गई है।