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घोटाला: कूड़ा कलेक्शन कंपनियों के फर्जी बिल किसने पास किए... पुलिस ने मांगा रिकॉर्ड

Wed, 15 Jul 2020 12:03 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 15 Jul 2020 12:03 AM IST
सार

  • कंपनी के कर्मचारियों ने मई और जून, 2019 में घरों से कचरा उठाया। आरोप है कि बहुत कम घरों से कूड़ा उठाया गया , जबकि बिल ज्यादा के लगाए गए।

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agra police investigating door to door garbage scam
घोटाला - फोटो : amar ujala

विस्तार

आगरा में 2.82 करोड़ रुपये के डोर-टू-डोर कूड़ा घोटाले में जांच शुरू करते हुए पुलिस ने नगर आयुक्त से उन कर्मचारियों की जानकारी मांगी है, जिन्होंने कूड़ा कलेक्शन कंपनियों के फर्जी बिल पास किए। पुलिस को शक है कि घोटाले में निगम कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है। आरोपी कंपनियों के प्रबंधकों को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किए गए थे लेकिन वे चार दिन बाद भी थाने नहीं आए।

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एफआईआर में झांसी की तीन फर्म मैसर्स अरवा एसोसिएट, मैसर्स सोसाइटी फॉर एजुकेशन एंड वेलफेयर, ओम मोटर्स और ग्वालियर की कंपनी मैसर्स एसआरएमटी वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी बनाया गया है।
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इन फर्म ने मई और जून, 2019 में घरों से कचरा उठाया। आरोप है कि बहुत कम घरों से कूड़ा उठाया गया , जबकि बिल ज्यादा के लगाए गए। इसके लिए फर्जी बिल का सहारा लिया गया। इन पर भुगतान हुआ। नगर निगम ने पहले खुद इसकी जांच की। इसके बाद हरीपर्वत थाना में एफआईआर कराई।

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उठ रहे ये सवाल

थाना प्रभारी निरीक्षक अजय कौशल ने बताया कि निगम की जांच रिपोर्ट की स्टडी की गई है। इसके बाद यह सवाल निकला है कि बिल फर्जी थे तो पास कैसे हो गए? इन्हें किसने तसदीक किया? 

मौके पर काम देखने के लिए कौन अधिकारी या कर्मचारी गए? साथ ही भुगतान किस माध्यम से किया गया? ये सभी जानकारी नगर निगम से मांगी गई हैं। आरोपी कंपनी के अधिकारियों को बुलाया गया लेकिन वे नहीं आए। उनके बयान दर्ज किए जाने हैं।

काम न होने पर भी भुगतान कैसे हुआ

पुलिस की जांच में यह भी देखा जा रहा है कि जब कंपनियों ने काम नहीं किया, इसकी जानकारी के बाद उन्हें भुगतान कैसे मिलता रहा। उनके शपथपत्र फर्जी प्रतीत हो रहे हैं, यह भी देखा जा रहा है कि नगर निगम ने इनकी जांच कराई थी या नहीं।
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