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Agra News: हेमनदास जैसवानी हत्याकांड में प्रांजल, प्रवीन और चेतन दोषी, कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

Thu, 05 Jun 2025 07:49 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 05 Jun 2025 07:49 AM IST
सार

राजामंडी बाजार व्यापार मंडल के अध्यक्ष हेमनदास जैसवानी हत्याकांड में तीन भाई प्रांजल, प्रवीन और चेतन दोषी पाए गए। कोर्ट ने तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। 

 

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Agra News Hemandas Murder Case Pranjal and Two Others Sentenced to Life Imprisonment
court new - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के राजामंडी बाजार व्यापार मंडल के अध्यक्ष हेमनदास की हत्या में अदालत ने तीन भाइयों प्रांजल, प्रवीन व चेतन को दोषी पाया। बुधवार को विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट पुष्कर उपाध्याय ने उन्हें आजीवन कारावास और 65-65 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं आपराधिक षड्यंत्र के आरोपी सूरज और मोनू वर्मा को संदेह का लाभ मिला, उन्हें दोषमुक्त किया गया।
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वारदात 28 नवंबर 2014 को हुई थी। जयपुर हाउस, आलोक नगर निवासी हेमनदास राजामंडी बाजार व्यापार मंडल के अध्यक्ष थे। उनकी मंशादेवी गली निवासी प्रांजल व अन्य से पुरानी रंजिश चल रही थी। आरोप लगाया गया कि प्रांजल ने 2009 में भी हेमनदास के बड़े बेटे हरीश पर जान से मारने की नीयत से फायर किया था। वह कई महीने जेल में रहा था। जेल से छूटने के बाद प्रांजल लगातार हेमनदास और उनके छोटे बेटे को धमकी दे रहा था।

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परिजनों के मुताबिक 28 नवंबर 2014 को दोपहर करीब 2 बजे हेमनदास स्कूटर से अपनी दुकान जा रहे थे। गोविंद नगर में साबिर की दुकान के सामने बाइक सवार प्रांजल, चेतन और प्रवीन ने उन्हें रोक लिया। गाली-गलौज कर हेमनदास को गोली मार दी। हेमनदास के बेटे सुशील ने थाना शाहगंज में केस दर्ज कराया। 10 दिसंबर 2014 को पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
 
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पैरवी करने वाले बेटे की भी हुई हत्या
पिता की मौत के बाद उनके बेटे सुशील कुमार मुकदमे की पैरवी कर रहे थे। परिजन के मुताबिक 12 जून 2015 को वह अपनी राजामंडी बाजार स्थित दुकान पर बैठे थे। आरोपियों ने दुकान के अंदर आकर ताबड़तोड़ फायरिंग कर हत्या कर दी। हेमनदास के दूसरे बेटे मनोज भी गंभीर घायल हुए थे। वादी की हत्या हो जाने से उनकी गवाही दर्ज नहीं हो सकी थी। घटना के प्रत्यक्षदर्शियों एवं वादी मुकदमा सुशील के भाई महेश जेसवानी सहित 10 गवाह अदालत में पेश किए गए।

 

एडीजीसी हेमंत दीक्षित ने बताया कि वादी की मौत हो गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों और उनके दूसरे बेटे महेश की गवाही हुई। अदालत ने उसे और असलहा बरामदगी को अहम साक्ष्य माना। महेश को आरोपियों के डर से कड़ी पुलिस सुरक्षा और बुलेट प्रूफ जैकेट पहनाकर अदालत लाया जाता था।

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कब क्या हुआ
- 28 नवंबर 2014 को हत्या हुई
- 10 दिसंबर 2014 को पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा
- जनवरी 2015 को पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र भेजा
- दो महीने से अधिक सीजेएम की अदालत में सुनवाई हुई। - 16 मार्च से सत्र न्यायालय में सुनवाई हुई।

 

इन धाराओं में सजा
- धारा 302 सपठित धारा 34 में आजीवन कारावास के साथ 50-50 हजार रुपये जुर्माना
- धारा 504 में दो साल कारावास 5-5 हजार रुपये जुर्माना
- धारा 506 में दो साल कारावास 5-5 हजार रुपये जुर्माना
- 3/25 आयुष अधिनियम में दो साल कारावास 5-5 हजार रुपये जुर्माना
(सभी सजा साथ-साथ चलेंगी)
 
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