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यूपी: दिनदहाड़े तीन बूथों पर कैप्चरिंग! धांधली का आरोप; आगरा के दामन पर दाग लगा गया एमएलसी चुनाव

Tue, 27 Oct 2026 09:07 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा Published by: Dhirendra Singh Updated Tue, 27 Oct 2026 09:07 AM IST
सार

आगरा खंड शिक्षक एवं स्नातक निर्वाचन-2026 में कथित चुनावी गड़बड़ियों के बाद छह अधिकारियों के निलंबन और 21 अन्य कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई से राजनीतिक जवाबदेही पर सवाल उठे हैं। सपा ने भाजपा पर बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाए, जबकि भाजपा ने आरोपों को खारिज किया; अब कार्रवाई केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित रहने को लेकर बहस तेज है।
 

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Agra MLC Election Controversy: Action Against 27 Officials, Questions Remain Over Political Accountability
पुनर्मतदान के दाैरान तैनात पुलिस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के आगरा खंड शिक्षक व स्नातक निर्वाचन-2026 के दौरान हुई चुनावी गड़बड़ी ने आगरा के सियासी इतिहास पर गहरा दाग लगा दिया है। आगरा में एमएलसी चुनाव के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब धांधली और बूथ कैप्चरिंग के आरोपों की पुष्टि के बाद निर्वाचन आयोग को मतदान रद कर पुनर्मतदान का फैसला लेना पड़ा।
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आयोग की ओर से 6 अधिकारियों के निलंबन और 21 अन्य कर्मियों के खिलाफ की गई कार्रवाई ने चुनावी निष्पक्षता पर लगे आरोपों को सच साबित कर दिया है। हालांकि इस कार्रवाई पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। दरअसल, भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 6 अधिकारियों को निलंबित करने और 21 अन्य कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तलवार तो चला दी गई लेकिन इस पूरी घटना के पीछे मुख्य भूमिका निभाने वाले राजनीतिक चेहरों और नेताओं पर कोई आंच न आने से एकतरफा कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
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सपा नेताओं ने कई भाजपा नेताओं का नाम लेकर बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगाए। भाजपा नेता भी सपा नेताओं पर अराजकता करने के आरोप लगाते रहे। शुरू में तो बात अनसुनी की गई लेकिन जब वीडियो वायरल हुए तो प्रशासनिक अमले ने भी आरोपों को सही मानते हुए कार्रवाई की सिफारिश की, पर वह सरकारी कर्मियों तक ही सीमित रही। पुलिस प्रशासन ने न तो किसी सियासी दल के नेता या कार्यकर्ता को आरोपी बनाया, न ही अब तक कोई कार्रवाई हुई।
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निर्वाचन आयोग के आदेश पर सैंया और फतेहाबाद के बूथों पर तैनात सेक्टर मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारियों, पीठासीन अधिकारियों और पुलिस कांस्टेबलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर खानापूर्ति कर ली गई। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि केवल ड्यूटी निभा रहे कर्मियों को बलि का बकरा बना दिया गया जबकि गड़बड़ी कराने वाले मुख्य साजिशकर्ता साफ बच निकले। बता दें, कि 23 अक्तूबर को हुए मतदान में सैंया, खेरागढ़ और फतेहाबाद के बूथों पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी और बूथ कैप्चरिंग के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद आयोग को पुनर्मतदान कराने का फैसला लेना पड़ा।

1991 में भाजपा पर लगे थे 40 बूथ लूटने के आरोप
चुनाव में बूथ कैप्चरिंग के आरोप सत्तारूढ़ भाजपा पर पहली बार नहीं लगे। साल 1991 में कांग्रेस के प्रत्याशी गुलाब सेहरा ने भाजपा पर 40 बूथों को लूटने और बूथ कैप्चरिंग का आरोप लगाया था। आगरा पश्चिम सीट पर चल रहे मतदान के दौरान लगे इन आरोपों को साबित तो नहीं किया जा सका। हालांकि इस बार के चुनाव में भाजपा पर जिन तीन बूथों पर अराजकता और बूथ कैप्चरिंग के आरोप लगे, वहां सरकारी अधिकारियों पर ही हुई कार्रवाई ने भाजपा के चरित्र को भी सवालों में ला दिया। पार्टी हमेशा सपा को ही अराजकता के आरोप में घेरती थी लेकिन पहली बार भाजपा खुद सवालों के घेरे में हैं।

प्रशासन भी नहीं भांप सका हालात
सत्तारूढ़ भाजपा यूं तो शुरू से चुनाव जीतने का दम भर रही थी। सपा भी अपनी कदमताल कर रहा था। हालांकि जिले में पहली बार जिस तरह पढ़े-लिखे मतदाताओं वाले चुनाव के दौरान अराजकता हुई, उसे भांपने में प्रशासनिक अमला पूरी तरह विफल रहा। बूथ कैप्चरिंग के बाद शत-प्रतिशत तक वोटिंग ने उसकी सारी तैयारियों को धता बता दिया। फिलहाल प्रशासन और पुलिस ने जिस सख्ती से हालात को संभाला, उसे आने वाले विधानसभा चुनाव के दौरान ड्यूटी करने वाले कर्मियों के लिए नजीर माना जा रहा है।

समाजवादी पार्टी महानगर अध्यक्ष शब्बीर अब्बास का कहना है कि बूथ कैप्चरिंग भाजपा के लोगों ने की, फिर भी प्राथमिकी अज्ञात के खिलाफ दर्ज की गई। अब आयोग ने छोटे कर्मियों पर कार्रवाई की है लेकिन नेताओं पर कार्रवाई नहीं की। साफ दर्शाता है कि चुनावी मशीनरी और भाजपा में मिलीभगत है और इसीलिए भाजपा के लोगों को बचाया जा रहा है।


जिलाध्यक्ष भाजपा प्रशांत पौनिया ने बताया कि भाजपा अनुशासन वाली पार्टी है। चुनाव में सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अराजकता की। पार्टी कार्यकर्ताओं ने ऐसे लोगों को फर्जी मतदान करने से रोका। बूथ कैप्चरिंग से न तो पार्टी का कोई लेना देना है, न ही पार्टी की ऐसी विचारधारा है। हम संविधान को मानने और उसका पालन करने में विश्वास रखते हैं। 
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