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UP: जेल चौपाटी पर ताला, नाश्ते को तरस रहे मुलाकाती; कारागार मंत्री ने दो साल पहले किया था उद्घाटन
Mon, 06 Apr 2026 07:43 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Mon, 06 Apr 2026 07:43 AM IST
सार
आगरा जिला जेल के बाहर बंदी कल्याण योजना के तहत शुरू की गई जेल चौपाटी पर ताला लटका हुआ है। ग्राहक न मिलने के कारण प्रोजेक्ट घाटे में चला गया, जिससे मुलाकातियों को अब बाहर ठेलों से नाश्ता लेना पड़ रहा है।
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जेल चौपाटी
- फोटो : wildlife sos
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विस्तार
आगरा जिला जेल के मुख्य गेट पर दो साल पहले फरवरी 2024 में शुरू की गई जेल चौपाटी बंद हो गई। इसमें 50 रुपये में खाने की थाली से लेकर बेड़ई, जलेबी और समोसे के नाश्ते की व्यवस्था की गई थी। मगर ग्राहक नहीं मिल पाने के कारण इसको बंद कर दिया गया। इससे मुलाकातियों को परिसर के बाहर खड़ी ठेल पर से ही सामान खरीदना पड़ता है।
जेल चौपाटी का शुभारंभ कारागार मंत्री ने किया था। चौपाटी में सुबह 7 बजे से नाश्ते में पूड़ी, सब्जी, समोसा, बेड़ई, जलेबी, चाय व काॅफी की व्यवस्था की गई थी। थाली और टिफिन में चार रोटी, सब्जी, दाल, चावल, अचार, पापड़ आदि दिया जाना था। जेल थीम पर सेल्फी पाॅइंट भी बनाया जा रहा था जिससे मुलाकातियों के साथ अन्य ग्राहकों को भी आकर्षित किया जा सके। चौपाटी में ग्राहकों की संख्या उतनी नहीं रही, जितनी उम्मीद की गई थी। इस वजह से खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया था।
जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा ने बताया कि जेल चौपाटी की स्थापना बंदी कल्याण एवं पुनर्वास योजना के तहत की गई थी। लागत खर्च ना निकल पाने के कारण जेल चौपाटी को बंद कर दिया गया है। जल्द ही इसे नए तरीके से शुरू कराया जाएगा। बंदियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।
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10 हजार पारिश्रमिक दिया जाना था
जेल अधीक्षक ने बताया कि लागत मूल्य से 10 फीसदी अधिक ही खाद्य वस्तु की कीमत रखी जाएगी। जो बंदी चौपाटी में कार्य करेंगे उनको 8 से 10 हजार प्रतिमाह पारिश्रमिक दिया जाना था, लेकिन यह चौपाटी मुलाकातियों तक ही सीमित रह गई। इससे संचालन मुश्किल हो रहा था। जेल में निरुद्ध बंदी मिठाई, सब्जी सहित अन्य सामान बनाते थे जबकि बाहर बिक्री के लिए पूर्व में रिहा हुए बंदी काम में लगाए जाते थे।
यह रखा गया था आउटलेट का मेन्यू
खाद्य सामग्री - धनराशि
थाली - 50 रुपये (चार रोटी, दाल, सब्जी, अचार, पापड़)
टिफिन - 50 रुपये
समोसा - 10 रुपये
चाय - 10 रुपये
काॅफी - 15 रुपये
पराठा - 15 रुपये
पांच पूड़ी सब्जी - 20 रुपये
छोले-चावल, राजमा - 30 रुपये फुल, 20 रुपये हाफ
पेटीज - 15 रुपये
ब्रेड पकौड़ा - 10 रुपये
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जेल चौपाटी का शुभारंभ कारागार मंत्री ने किया था। चौपाटी में सुबह 7 बजे से नाश्ते में पूड़ी, सब्जी, समोसा, बेड़ई, जलेबी, चाय व काॅफी की व्यवस्था की गई थी। थाली और टिफिन में चार रोटी, सब्जी, दाल, चावल, अचार, पापड़ आदि दिया जाना था। जेल थीम पर सेल्फी पाॅइंट भी बनाया जा रहा था जिससे मुलाकातियों के साथ अन्य ग्राहकों को भी आकर्षित किया जा सके। चौपाटी में ग्राहकों की संख्या उतनी नहीं रही, जितनी उम्मीद की गई थी। इस वजह से खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया था।
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जेल अधीक्षक हरिओम शर्मा ने बताया कि जेल चौपाटी की स्थापना बंदी कल्याण एवं पुनर्वास योजना के तहत की गई थी। लागत खर्च ना निकल पाने के कारण जेल चौपाटी को बंद कर दिया गया है। जल्द ही इसे नए तरीके से शुरू कराया जाएगा। बंदियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी।
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10 हजार पारिश्रमिक दिया जाना था
जेल अधीक्षक ने बताया कि लागत मूल्य से 10 फीसदी अधिक ही खाद्य वस्तु की कीमत रखी जाएगी। जो बंदी चौपाटी में कार्य करेंगे उनको 8 से 10 हजार प्रतिमाह पारिश्रमिक दिया जाना था, लेकिन यह चौपाटी मुलाकातियों तक ही सीमित रह गई। इससे संचालन मुश्किल हो रहा था। जेल में निरुद्ध बंदी मिठाई, सब्जी सहित अन्य सामान बनाते थे जबकि बाहर बिक्री के लिए पूर्व में रिहा हुए बंदी काम में लगाए जाते थे।
यह रखा गया था आउटलेट का मेन्यू
खाद्य सामग्री - धनराशि
थाली - 50 रुपये (चार रोटी, दाल, सब्जी, अचार, पापड़)
टिफिन - 50 रुपये
समोसा - 10 रुपये
चाय - 10 रुपये
काॅफी - 15 रुपये
पराठा - 15 रुपये
पांच पूड़ी सब्जी - 20 रुपये
छोले-चावल, राजमा - 30 रुपये फुल, 20 रुपये हाफ
पेटीज - 15 रुपये
ब्रेड पकौड़ा - 10 रुपये