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'जन्नत' की मिट्टी से महका था ताजनगरी का 'गुलिस्तां', 430 साल पुराना है कश्मीर से नाता
Thu, 08 Aug 2019 08:44 AM IST
मुकेश कुमार
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 08 Aug 2019 08:44 AM IST
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
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मुगलिया राजधानी रहे आगरा का कश्मीर से 430 साल पुराना नाता है। यह नाता जुड़ा मुगलिया दौर में। जून, 1589 में मुगल शहंशाह अकबर ने कश्मीर घाटी को अपनी सल्तनत का हिस्सा बनाया। तब से लेकर तीन मुगल शहंशाहों की सल्तनत में आगरा से ही कश्मीर के फैसले होते रहे। अकबर, जहांगीर और शाहजहां के दौर में आगरा और कश्मीर घाटी के बीच कारोबारी रिश्ते भी पनपे। आगरा और कश्मीर के बीच रिवर फ्रंट गार्डन एक समान विकसित हुए। कला और कारोबार के लिए वो सुनहरा दौर रहा।
कश्मीर में विदेशी पर्यटक
- फोटो : फाइल फोटो
मुगल बादशाह अकबर ने तीन बार 1589, 1582 और 1597 में कश्मीर का रुख किया। उन्होंने वैवाहिक संबंध भी जोड़े। कश्मीर के लोगों को जोड़ने के लिए उन पर कर का बोझ कम किया। अकबर के बाद मुगल बादशाह जहांगीर और साम्राज्ञी नूरजहां ने कश्मीर को धरती का स्वर्ग बताकर कश्मीर का विकास किया। उस दौर में 'जन्नत' की मिट्टी की महक ताजनगरी में बिखरी थी। इसके बाद शाहजहां ने वहां कई बाग, इमारतें, किले बनवाए। उस दौर में 'जन्नत' की मिट्टी की महक ताजनगरी में बिखरी थी।
आगरा किला
- फोटो : अमर उजाला
आगरा के किले में मुसम्मन बुर्ज से सटे खास महल के सामने मुगल साम्राज्ञी नूरजहां ने अंगूरी बाग बनवाया। इसके लिए मिट्टी खास तौर पर कश्मीर से लाई गई थी। आगरा में गुलाब के फूलों को भी कश्मीर से ही लाया गया। यहीं पर नूरजहां ने गुलाब जल समेत कई इत्र बनवाए। कश्मीर से केसर, कपूर, चंदन, भोजपत्र, लिखने की सामग्री आगरा आती थी। मुगल दौर में राजधानी होने के कारण मध्य एशिया, चीन, तिब्बत के व्यापारी कश्मीर, लाहौर होकर आगरा कारोबार के लिए आते रहे।
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आगरा का कश्मीरी बाजार
- फोटो : अमर उजाला
मुगल शहंशाह अकबर से लेकर शाहजहां तक आगरा राजधानी रही। मुगल बादशाहों के कश्मीर प्रेम के कारण आगरा और कश्मीर के बीच कारोबार शुरू हुआ। शॉल, सिल्क, गर्म कपड़े, पेपर, पेपरमसी आर्ट, वुड कार्विंग, स्टोन कार्विंग, स्टोन पॉलिश, कढ़ाई, जरदोजी, चमड़ा, कांच बनाने के हुनरमंदों ने किले के पास कश्मीरी बाजार में अपने घर और दुकानें बनाईं। इसी वजह से किनारी बाजार के पास का यह बाजार कश्मीरी बाजार के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मुगलिया दौर खत्म होने के बाद यहां से कश्मीरी कारीगर और प्रतिष्ठान भी खत्म हो गए।
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कश्मीर की झील में नौकायन करते मुगल शहंशाह की पेंटिंग
- फोटो : अमर उजाला
प्रख्यात पुरातत्वविद और इतिहासकार पद्मश्री केके मुहम्मद ने बताया कि आगरा और कश्मीर के बीच मुगलों के जमाने से अटूट संबंध बने। दोनों जगह की संस्कृति, कला और शैली का आदान-प्रदान हुआ। मुगलों की चार पीढ़ियों का आगरा से कश्मीर के बीच आना-जाना लगातार बना रहा, जिसका असर यहां के रिवरफ्रंट गार्डन पर नजर आता है।