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Agra: लापरवाही और अनदेखी की आग, जोखिम में जान, जनवरी से अब तक 800 अग्निकांड, पांच की मौत

Sat, 08 Oct 2022 03:16 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sat, 08 Oct 2022 03:16 PM IST
सार

आगरा में जनवरी से अब तक के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो अग्निकांड की 800 घटनाएं हुई हैं, जिसमें पांच की जान जा चुकी है। शॉर्ट सर्किट से सर्वाधिक घटनाएं हुई हैं।
 
 

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Agra 800 fires since January five have been killed
आर मधुराज अस्पताल में लगी आग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ताजनगरी में लापरवाही और अनदेखी से कई बार आग भड़क चुकी है। जनवरी से अब तक अग्निकांड की 800 से अधिक घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसमें करोड़ों के माल का नुकसान तो हुआ, साथ ही पांच लोगों की जान भी जा चुकी है। खराब और क्षतिग्रस्त वायरिंग में शॉर्ट सर्किट, कबाड़ सामान, जूता बनाने का सामान और ज्वलनशील केमिकल आग लगने की वजह बन चुके हैं। लोग सावधानी बरतें तो आग से बचाव संभव है। 

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नरीपुरा स्थित आर मधुराज हॉस्पिटल में दुकान में रखे फोम में बुधवार को आग लगी। आग से घर में धुआं भर गया। इसमें तीन लोगों की जान चली गई। इस घटना ने लोगों को चिंतित कर दिया है। अग्निशमन विभाग लोगों को जागरूक कर रहा है। छोटे से लेकर बड़े स्तर पर कारखाने संचालित हो रहे हैं। इनमें जूता बनाने का सामान से लेकर केमिकल रखा होता है। इसके उचित रखने की व्यवस्था न होने की वजह से कई बार आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 

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इन बातों का रखें ध्यान

- घर में एक सॉकेट में ज्यादा प्लग नहीं होने चाहिए। लोड के हिसाब से वायरिंग भी बदलवा लें।
- रसोई में काम खत्म होने पर रात में गैस सिलिंडर को रेग्युलेटर से बंद कर दें। गैस पाइप पुराना होने पर बदलवा दें। 
- कारखाने में कबाड़ सामान, केमिकल, माल रखने की अलग-अलग व्यवस्था होनी चाहिए। 
- कारखानों और अस्पतालों में फायर फाइटिंग सिस्टम लगा होना चाहिए। यह कार्यशील हो। कबाड़ सामान प्रवेश द्वार पर नहीं होना चाहिए। आपातकालीन रास्ता होना चाहिए। 

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- आग बुझाने के लिए औद्योगिक भवन के हिसाब से कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिलाना चाहिए, जिससे आग लगने पर वो बचाव कार्य कर सकें।
- प्रवेश और निकास द्वार मानक के हिसाब से बनाए जाएं। दमकल के पहुंचने की उचित व्यवस्था हो। आपातकाल के लिए अलग से स्ट्रेचर होने चाहिए। 
- अपार्टमेंट में पानी का टैंक भूतल और छत पर होना चाहिए। हौज रील लगी हो। 
 

दिवाली पर ऐसे करें बचाव

- दिवाली पर घरों में दीपक और मोमबत्तिया जलाई जाती हैं। इन्हें ऐसे स्थान पर न लगाएं, जहां पर पर्दा लगा हो। कोई कबाड़ सामान रखा हो।

- दिवाली पर लोग आतिशबाजी करते हैं। जलता हुआ पताका गिरने से बाहर रखे वाहन और सामान में आग लग सकती है। इसलिए सामान और वाहन को उचित स्थान पर रखें। 
- बच्चे पटाखे चलाएं तो बड़े भी साथ होने चाहिए। अपने पास पानी की बाल्टी भी रखें।
- खुले स्थान पर ही पटाखे चलाने चाहिए। 

(जैसा मुख्य अग्निशमन अधिकारी अक्षय रंजन शर्मा ने बताया)

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