{"_id":"5b867dca42c792463b3b65d5","slug":"a-part-of-the-construction-of-archaeological-remains-fell","type":"story","status":"publish","title_hn":"पुरातत्व विभाग की लापरवाही आई सामने, फिर एक नामचीन इमारत का हिस्सा गिरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पुरातत्व विभाग की लापरवाही आई सामने, फिर एक नामचीन इमारत का हिस्सा गिरा
टीम डिजिटल, आगरा
Updated Thu, 30 Aug 2018 12:48 PM IST
विज्ञापन
इमारत का ढहा हिस्सा, इनसेट में मंदिर में गिरा मलबा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एएसआई अपनी पुरातत्व की इमारतों को सहेज नहीं पा रहा है। उनके रखरखाव पर भी ध्यान नहीं दे रहा है। इससे एक के बाद एक इमारत के गिरने का सिलसिला जारी है। आगरा के यमुना किनारे एक एतिहासिक इमारत का बड़ा हिस्सा गिर गया। इसके बाद भी एएसआई विभाग का अमला वहां नहीं पहुंचा।
मोहन उपाध्याय यमुना ब्रिज के पास कटरा वजीर खां पर रहते हैं। वहां महाकाली दुर्गा और शनिदेव का पुराना मंदिर है। वे साढ़े सात बजे पूजा-अर्चना करके मंदिर से बाहर निकले, तभी इमारत का ऊपरी हिस्सा गिर गया। इससे मंदिर भी क्षतिग्रस्त हो गया। मोहन ने बताया कि इस इमारत के गिरने की सूचना एएसाई के संबंधित अधिकारी को दी। उन्होंने कहा कि उच्च अधिकारी मामले पर निर्णय लेंगे। इस सूचना के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे।
मालूम हो कि इससे पहले भी फतेहपुरीसीकरी में एतिहासिक इमारत के दो बार हिस्से गिर चुके हैं। पुरानी इमारतों को लेकर न्यायालय तक बहुत गंभीर है। वे इन्हें सहेजने के लिए बार-बार सुझाव और आदेश दे रहे हैं। ताजमहल को लेकर सुप्रीम कोर्ट लगातार चिंतित बना हुआ है। उसके विजन प्लान पर जोर दिया जा रहा है। वहीं इन्हें इमारतों को सहेजने का जिन कंधों पर जिम्मा है, वे लापरवाही बरत रहे हैं। हालांकि पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ये इमारत पुरानी जरूर है, पर संरक्षित नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मोहन उपाध्याय यमुना ब्रिज के पास कटरा वजीर खां पर रहते हैं। वहां महाकाली दुर्गा और शनिदेव का पुराना मंदिर है। वे साढ़े सात बजे पूजा-अर्चना करके मंदिर से बाहर निकले, तभी इमारत का ऊपरी हिस्सा गिर गया। इससे मंदिर भी क्षतिग्रस्त हो गया। मोहन ने बताया कि इस इमारत के गिरने की सूचना एएसाई के संबंधित अधिकारी को दी। उन्होंने कहा कि उच्च अधिकारी मामले पर निर्णय लेंगे। इस सूचना के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे।
विज्ञापन
मालूम हो कि इससे पहले भी फतेहपुरीसीकरी में एतिहासिक इमारत के दो बार हिस्से गिर चुके हैं। पुरानी इमारतों को लेकर न्यायालय तक बहुत गंभीर है। वे इन्हें सहेजने के लिए बार-बार सुझाव और आदेश दे रहे हैं। ताजमहल को लेकर सुप्रीम कोर्ट लगातार चिंतित बना हुआ है। उसके विजन प्लान पर जोर दिया जा रहा है। वहीं इन्हें इमारतों को सहेजने का जिन कंधों पर जिम्मा है, वे लापरवाही बरत रहे हैं। हालांकि पुरातत्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ये इमारत पुरानी जरूर है, पर संरक्षित नहीं है।
विज्ञापन