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Agra News: इंजेक्शन की ओवरडोज से 20 माह के बच्चे की मौत, छह माह बाद प्राथमिकी दर्ज, कोर्ट के आदेश पर चिकित्सक और अन्य पर लापरवाही से मौत और एससी एक्ट में की गई कार्रवाई

Thu, 16 Apr 2026 01:40 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Thu, 16 Apr 2026 01:40 AM IST
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A 20-month-old child died from an overdose of an injection. An FIR was filed six months later. Following court orders, the doctor and others were charged with causing death due to negligence and under the SC Act.
आगरा। थाना लोहामंडी के जयपुर हाउस क्षेत्र में 30 सितंबर को 20 माह के मासूम की मौत के 6 माह बाद प्राथमिकी दर्ज की गई है। न्यायालय के आदेश पर चिकित्सक दंपती, मेडिकल स्टोर संचालक बेटा और कंपाउंडर पर लापरवाही से मौत और एससी-एसटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
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पीड़ित योगेश कुमार (निवासी बुद्ध बिहार गली, खतैना) ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र देकर कार्रवाई की मांग की थी। बताया था कि उनका 20 माह का पुत्र योगेंद्र नाथ उर्फ यश 27 सितंबर, 2025 को अचानक बीमार हो गया था। वह पत्नी सुमन के साथ उसे सूरी मैटेरनिटी सेंटर लेकर गए। वहां डॉ. एसएस सूरी और नीलम सूरी ने बच्चे को भर्ती कर उपचार किया और अगले दिन छुट्टी दे दी। इसके बाद तीन दिन तक लगातार इंजेक्शन लगवाने की सलाह दी।
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आरोप है कि 30 सितंबर, 2025 की रात करीब 8 बजे जब बच्चे को इंजेक्शन लगाया गया तो उसकी हालत अचानक बिगड़ गई। डॉक्टर उसे तत्काल ऑपरेशन थिएटर में ले गए लेकिन कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। परिजन जांच के लिए बच्चे को पुष्पांजलि अस्पताल भी ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पीड़ित ने जब लापरवाही का विरोध किया तो अस्पताल संचालक और स्टाफ ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अभद्रता की और जान से मारने की धमकी दी। आरोपी चिकित्सक के बेटे अंकित सूरी ने पिस्टल निकालकर धमकाया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमाॅर्टम के लिए भेजा, जहां विसरा सुरक्षित रखा गया है। 6 अक्तूबर 2025 को मुख्यमंत्री पोर्टल और पुलिस अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। थाना प्रभारी लोहामंडी ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज कर आरोपों की जांच की जा रही है।
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अस्पताल संचालक डॉ. एसएस सूरी ने बताया कि बच्चा उनके यहां एडमिट नहीं था। परिजन उसे इंजेक्शन लगवाने लाए थे। कंपाउंडर से इंजेक्शन लगवाने के बाद चले गए और चार घंटे बाद आकर हंगामा किया। मामले की जांच सीएमओ आगरा ने की है। न्यायालय का जो भी आदेश है, उसके आधार पर जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।
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