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जीआईएस सबस्टेशन दूर करेगा टेंशन
Agra
Updated Fri, 23 Nov 2012 12:00 PM IST
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अमित कुलश्रेष्ठ
आगरा। विद्युत सब स्टेशन स्थापित करने को भूमि अधिग्रहण में आ रही समस्याओं केचलते प्रदेश सरकार ने फैसला किया है कि 400 केवी सबस्टेशनों को गैस इंसुलेटेड सिस्टम पर बनाया जाए। इससे जमीन भी कम लगेगी और भू अधिग्रहण में आने वाली समस्या भी काफी कम हो जाएगी।
यूपी पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन को भूमि अधिग्रहण करने में काफी मुश्किलें आ रही है। किसानों से मोलभाव और उन्हें मनाने में सालों बीत जाते हैं। जैसे, 132 केवी पोइयाघाट सबस्टेशन की जमीन के लिए 7 साल का इंतजार, 765 केवी के लिए मांट में जमीन के लिए इंतजार। इस समस्या से निपटने को कारपोरेशन ने तकनीक में बदलाव किया है। 400 केवी के नए सब स्टेशनों को गैस इंसुलेटेड सिस्टम तकनीक से बनाने पर पांच एकड़ की जमीन ही चाहिए, जबकि एयर इंसुलेटेड सिस्टम पर बनने वाले सब स्टेशन 50 एकड़ में बनते हैं।
हालांकि नई तकनीक लागू करने में लगभग पौने दो गुना बजट बढ़ जाएगा लेकिन भूमि कम लगेगी और अधिग्रहण में आने वाली समस्याएं भी कम होंगी। पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन सीधे किसानों से ही करार करके पांच एकड़ जमीन ले सकेगा और अपने प्रोजेक्ट को जल्द अमली जामा पहना सकेगा।
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‘‘ट्रांसमिशन कारपोरेशन 400 केवी के नए सबस्टेशनों को जीआईएस पर बनाएगा। इसमें एआईएस के उलट कम जमीन चाहिए। केवल 5 एकड़ जमीन में यह सबस्टेशन बन सकता है। एक या दो किसानों से सीधे करार करके भी जमीन खरीदी जा सकती है। जबकि अधिग्रहण में लंबा वक्त लगता है’’
डी पी लूथरा
चीफ इंजीनियर
यूपी पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन
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आगरा। विद्युत सब स्टेशन स्थापित करने को भूमि अधिग्रहण में आ रही समस्याओं केचलते प्रदेश सरकार ने फैसला किया है कि 400 केवी सबस्टेशनों को गैस इंसुलेटेड सिस्टम पर बनाया जाए। इससे जमीन भी कम लगेगी और भू अधिग्रहण में आने वाली समस्या भी काफी कम हो जाएगी।
यूपी पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन को भूमि अधिग्रहण करने में काफी मुश्किलें आ रही है। किसानों से मोलभाव और उन्हें मनाने में सालों बीत जाते हैं। जैसे, 132 केवी पोइयाघाट सबस्टेशन की जमीन के लिए 7 साल का इंतजार, 765 केवी के लिए मांट में जमीन के लिए इंतजार। इस समस्या से निपटने को कारपोरेशन ने तकनीक में बदलाव किया है। 400 केवी के नए सब स्टेशनों को गैस इंसुलेटेड सिस्टम तकनीक से बनाने पर पांच एकड़ की जमीन ही चाहिए, जबकि एयर इंसुलेटेड सिस्टम पर बनने वाले सब स्टेशन 50 एकड़ में बनते हैं।
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हालांकि नई तकनीक लागू करने में लगभग पौने दो गुना बजट बढ़ जाएगा लेकिन भूमि कम लगेगी और अधिग्रहण में आने वाली समस्याएं भी कम होंगी। पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन सीधे किसानों से ही करार करके पांच एकड़ जमीन ले सकेगा और अपने प्रोजेक्ट को जल्द अमली जामा पहना सकेगा।
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‘‘ट्रांसमिशन कारपोरेशन 400 केवी के नए सबस्टेशनों को जीआईएस पर बनाएगा। इसमें एआईएस के उलट कम जमीन चाहिए। केवल 5 एकड़ जमीन में यह सबस्टेशन बन सकता है। एक या दो किसानों से सीधे करार करके भी जमीन खरीदी जा सकती है। जबकि अधिग्रहण में लंबा वक्त लगता है’’
डी पी लूथरा
चीफ इंजीनियर
यूपी पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन