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एक माह की तपस्या पर बैठा बाबूलाल पंडा
Updated Wed, 31 Jan 2018 07:54 PM IST
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- फोटो : SELF
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कोसीकलां (मथुरा)। फालैन में होली के जलते अंगारों के मध्य निकलने के लिए बाबूलाल पंडा बुधवार को एक मास के कठोर तप पर बैठ गया। एक मार्च को वह धधकते अंगारों से निकलेगा। पंडा ने ग्रामीणों के साथ गांव की परिक्रमा कर होलिका स्थल पर पूजा अर्चना की। उसके बाद मंदिर में भक्त प्रह्लाद की माला को धारण किया।
बाबूलाल पंडा ने प्रह्लाद कुंड में स्नान किया, इसके बाद ग्रामीणों ने झांझ, मंजीरे, ढोलक के साथ गांव की परिक्रमा की। नाचते, गाते ग्रामीण परिक्रमा कर प्रह्लाद मंदिर के निकट होलिका चौक पहुंचे। यहां भगवान सहाय ने पंडा को पूजा-अर्चना कराई। इसी के साथ उन्होंने एक माह के कठोर व्रत-तप के लिए भक्त प्रह्लाद की माला धारण की।
एक मार्च की रात में पंडा होलिका दहन वाले दिन धधकती अग्नि से गुजरेगा। करीब 50 वर्षीय बाबूलाल पंडा के व्रत पर बैठते ही ग्रामीणों ने मंदिर के चौक पर गायन-वादन किया, होली के पद गाए गए। रसिया की जुगलबंदी पर महिला श्रद्धालु झूमती रहीं। बताते चलें कि एक माह की पूजा के दौरान पंडा घर की दहलीज नहीं देखते। इस दौरान जमीन पर ही आराम करना होगा। एक माह तक दिन में एक बार केवल फलाहार ही करेंगे। मंदिर परिसर के अलावा कहीं भी जाना वर्जित है।
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बाबूलाल पंडा ने प्रह्लाद कुंड में स्नान किया, इसके बाद ग्रामीणों ने झांझ, मंजीरे, ढोलक के साथ गांव की परिक्रमा की। नाचते, गाते ग्रामीण परिक्रमा कर प्रह्लाद मंदिर के निकट होलिका चौक पहुंचे। यहां भगवान सहाय ने पंडा को पूजा-अर्चना कराई। इसी के साथ उन्होंने एक माह के कठोर व्रत-तप के लिए भक्त प्रह्लाद की माला धारण की।
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एक मार्च की रात में पंडा होलिका दहन वाले दिन धधकती अग्नि से गुजरेगा। करीब 50 वर्षीय बाबूलाल पंडा के व्रत पर बैठते ही ग्रामीणों ने मंदिर के चौक पर गायन-वादन किया, होली के पद गाए गए। रसिया की जुगलबंदी पर महिला श्रद्धालु झूमती रहीं। बताते चलें कि एक माह की पूजा के दौरान पंडा घर की दहलीज नहीं देखते। इस दौरान जमीन पर ही आराम करना होगा। एक माह तक दिन में एक बार केवल फलाहार ही करेंगे। मंदिर परिसर के अलावा कहीं भी जाना वर्जित है।
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