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धर्म के रास्ते को अपनाने का संकल्प लिया
Updated Sun, 31 Dec 2017 11:24 PM IST
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मैनपुरी। रविवार को नगर के ज्योति रोड स्थित निरंकारी आश्रम में सत्संग हुआ। कार्यक्रम में संतजनों ने ज्ञान की चर्चा कर धर्म के रास्ते को अपनाने का संकल्प लिया।
गुरुगद्दी पर विराजमान कृष्ण मुरारी ने गुरु की महिमा अनंत बताई। उन्होंने कहा कि परमात्मा डाक्टर है हकीम भी है, बालिस्टर भी हैं, मंत्री भी है वह चाहे सो कर सकता है। संत वही होता है जो एक-एक सास परमात्मा के नाम के लिए जिए। गुरु हमें सांसारिक खुशियां भी दे रहे हैं और परमात्मा से भी मिला रहे हैं। उन्होंने कहा कि खुद सीखें दूसरों को कम सीख दें। सदाचारी बनें और गलत कार्यों से दूर रहें। सद मार्ग पर चलें। उ
न्होंने कहा कि धरती जैसा बनो धरती मां में जैसा भी डाल देते हो वैसा ही फल हमें देती हैं। सत्संग अवसर पर भक्त ऋ षि कुमार ने अपने भजन में कहा कि भजन सतगुरु का कर दुख दूसरों का मिटाता रहेगा, तो कष्ट सद्गुरु तेरा मिटाता रहेगा, चंद्रपाल शाक्य ने जिंदगी के जगाने के ढंग को प्यार सद्गुरु से लखना पड़ेगा भजन प्रस्तुत किया। सत्संग के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम में दर्शना, रीता ,गीता, अंजू मीणा कल्पना, योगेंद्र सिंह, रमेश चंद ,आराधना, मधू, राकेश, मनोज कुमार, राकेश श्रीवास्तव आदि ने प्रवचन प्रस्तुत किए। संचालन बालेश्वर सिंह ने किया।
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गुरुगद्दी पर विराजमान कृष्ण मुरारी ने गुरु की महिमा अनंत बताई। उन्होंने कहा कि परमात्मा डाक्टर है हकीम भी है, बालिस्टर भी हैं, मंत्री भी है वह चाहे सो कर सकता है। संत वही होता है जो एक-एक सास परमात्मा के नाम के लिए जिए। गुरु हमें सांसारिक खुशियां भी दे रहे हैं और परमात्मा से भी मिला रहे हैं। उन्होंने कहा कि खुद सीखें दूसरों को कम सीख दें। सदाचारी बनें और गलत कार्यों से दूर रहें। सद मार्ग पर चलें। उ
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न्होंने कहा कि धरती जैसा बनो धरती मां में जैसा भी डाल देते हो वैसा ही फल हमें देती हैं। सत्संग अवसर पर भक्त ऋ षि कुमार ने अपने भजन में कहा कि भजन सतगुरु का कर दुख दूसरों का मिटाता रहेगा, तो कष्ट सद्गुरु तेरा मिटाता रहेगा, चंद्रपाल शाक्य ने जिंदगी के जगाने के ढंग को प्यार सद्गुरु से लखना पड़ेगा भजन प्रस्तुत किया। सत्संग के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम में दर्शना, रीता ,गीता, अंजू मीणा कल्पना, योगेंद्र सिंह, रमेश चंद ,आराधना, मधू, राकेश, मनोज कुमार, राकेश श्रीवास्तव आदि ने प्रवचन प्रस्तुत किए। संचालन बालेश्वर सिंह ने किया।
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