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मेडिकल चाहिए तो लगाइए अस्पताल की दौड़
Updated Thu, 31 Aug 2017 11:34 PM IST
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डॉक्टर
- फोटो : amar ujala
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एटा। यदि आपको चिकित्सा प्रमाण पत्र लेना है, तो अस्पताल की दौड़ लगानी होगी। जिले में स्वस्थ होने का प्रमाण पाने के चक्कर में लोगों की सेहत बिगड़ रही है। आलम यह है कि प्रमाण पत्र तो एक दिन में मिल जाता है, लेकिन अधिकारियों की गैर मौजूदगी में लोगों को परेशानी होती है।
नवासी आलोक कुमार का सरकारी सेवा में चयन हुआ है। उनको तैनाती से पहले अपना स्वास्थ्य प्रमाण पत्र विभाग को देना है। कई दिनों से जिला अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है। कभी डाक्टर नहीं मिलते हैं, तो कभी अस्पताल में जांच नहीं हो पाती।
अलीगंज निवासी विवेक को भी बीटीसी में प्रवेश लेना है। काउंसलिंग के दौरान स्वास्थ्य प्रमाण पत्र की आवश्यकता है। कई बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गए, लेकिन वहां कह दिया गया कि एटा जाओ वहां से बनेगा। सीएमओ कार्यालय में अधिकारियों के नहीं बैठने से प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है।
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यह है व्यवस्था
जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय में स्वास्थ्य प्रमाण पत्र की व्यवस्था ऑफलाइन है। विभाग का दावा है कि आवेदकों को एक दिन में प्रमाण पत्र दे दिया जाता है लेकिन हकीकत कुछ और है। आवेदक को प्रमाण पत्र के लिए सरकारी अस्पताल से पर्चा बनवाकर डाक्टर को दिखाना होता है। डाक्टर पर्चे पर कुछ जांचें लिख देते हैं। इसमें आंख, हीमोग्लोबिन, समेत तमाम जांच शामिल होती हैं। इसके बाद जिला अस्पताल अथवा सीएमओ कार्यालय में रिपोर्ट देने के बाद प्रमाण पत्र बनाया जाता है।
फीस को लेकर होता है खेल
शासन ने स्वास्थ्य प्रमाण पत्र को लेकर 68 रुपये फीस तय है लेकिन जिला अस्पताल में फीस को लेकर आवेदकों को ठगा जाता है। बाबू अधिक फीस लेते हैं। इसे लेकर कई बार हंगामा भी हो चुका है।
यहां करें शिकायत
स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अधिकांश एक दिन में दे दिया जाता है। आवेदक निर्धारित शुल्क से ज्यादा किसी को भी अदा नहीं करें। यदि कोई समस्या है तो शिकायत करें।
डा. बी. सागर, सीएमएस
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नवासी आलोक कुमार का सरकारी सेवा में चयन हुआ है। उनको तैनाती से पहले अपना स्वास्थ्य प्रमाण पत्र विभाग को देना है। कई दिनों से जिला अस्पताल के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है। कभी डाक्टर नहीं मिलते हैं, तो कभी अस्पताल में जांच नहीं हो पाती।
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अलीगंज निवासी विवेक को भी बीटीसी में प्रवेश लेना है। काउंसलिंग के दौरान स्वास्थ्य प्रमाण पत्र की आवश्यकता है। कई बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गए, लेकिन वहां कह दिया गया कि एटा जाओ वहां से बनेगा। सीएमओ कार्यालय में अधिकारियों के नहीं बैठने से प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है।
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यह है व्यवस्था
जिला अस्पताल और सीएमओ कार्यालय में स्वास्थ्य प्रमाण पत्र की व्यवस्था ऑफलाइन है। विभाग का दावा है कि आवेदकों को एक दिन में प्रमाण पत्र दे दिया जाता है लेकिन हकीकत कुछ और है। आवेदक को प्रमाण पत्र के लिए सरकारी अस्पताल से पर्चा बनवाकर डाक्टर को दिखाना होता है। डाक्टर पर्चे पर कुछ जांचें लिख देते हैं। इसमें आंख, हीमोग्लोबिन, समेत तमाम जांच शामिल होती हैं। इसके बाद जिला अस्पताल अथवा सीएमओ कार्यालय में रिपोर्ट देने के बाद प्रमाण पत्र बनाया जाता है।
फीस को लेकर होता है खेल
शासन ने स्वास्थ्य प्रमाण पत्र को लेकर 68 रुपये फीस तय है लेकिन जिला अस्पताल में फीस को लेकर आवेदकों को ठगा जाता है। बाबू अधिक फीस लेते हैं। इसे लेकर कई बार हंगामा भी हो चुका है।
यहां करें शिकायत
स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अधिकांश एक दिन में दे दिया जाता है। आवेदक निर्धारित शुल्क से ज्यादा किसी को भी अदा नहीं करें। यदि कोई समस्या है तो शिकायत करें।
डा. बी. सागर, सीएमएस