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मरीज आ रहे हजारों, दवा का इंतजाम नहीं
Updated Fri, 16 Jun 2017 12:00 AM IST
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अस्पताल में लगी मरीजों की लाइन
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मैनपुरी। जिला अस्पताल में हर रोज सैकड़ों संक्रामक रोगों से पीड़ित मरीज भर्ती हो रहे हैं। लेकिन यहां जीवन रक्षक और दर्द निवारक दवाओं के साथ सामान्य दवाओं का भी टोटा है। तीमारदारों को बाहर से दवाएं लाकर उपचार कराना पड़ रहा है।
दवाएं न होने का खामियाजा हर दिन आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हर रोज एक हजार से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं दवाओं के अभाव में अधिकांश मरीजों को मरहम-पट्टी कर सैफई और आगरा के लिए रेफर कर दिया जाता है। भीषण गर्मी के प्रकोप के कारण डायरिया का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। डायरिया पीड़ित को चढ़ाई जाने वाली ड्रिप में मेट्रोजिल और डाइक्लो तक उपलब्ध नहीं हैं। सिर्फ आरएल की बोतल चढ़ाकर ही काम चलाया जा रहा है।
एंटीबायोटिक के नाम पर एक मात्र डॉक्सी साइकलिन और सेप्ट्रॉन ही मौजूद है। जबकि लंबे समय से सिफाडेक्सिम एंटीबायोटिक की मांग की जा रही है। सड़क हादसों और अन्य दुर्घटनाओं के घायलों को भी भर्ती कराया जाता है। यहां दवाओं और आधुनिक उपचार के अभाव में अधिकांश मामलों में सिर्फ मरहम-पट्टी के बाद ही घायलों को सैफई और आगरा के लिए रेफर कर दिया जाता है। कारण यहां दर्द निवारक दवाएं ही नहीं हैं।
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दर्द के लिए डाइक्लोफेनिक इंजेक्शन बेहद कारगर है, लेकिन यह नहीं है। इससे चलते मरीज कराहता रहता है। टाइफाइड, घाव सुखान, बच्चों की उल्टी दस्त के सीरप, खांसी, पेशाब में जलन की दवा नहीं है।
सीएमएस डा. एके उपाध्याय ने कहा कि आवश्यक जीवन रक्षक और दर्द निवारक दवाओं की उपलब्धता के लिए पत्र लिखा गया है। बजट के अभाव में दवाएं नहीं आ पा रही हैं। हमारी कोशिश है कि किसी भी हाल में मरीजों की जीवनरक्षा कर उन्हें बेहतर उपचार दें।
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दवाएं न होने का खामियाजा हर दिन आने वाले मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। हर रोज एक हजार से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। वहीं दवाओं के अभाव में अधिकांश मरीजों को मरहम-पट्टी कर सैफई और आगरा के लिए रेफर कर दिया जाता है। भीषण गर्मी के प्रकोप के कारण डायरिया का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। डायरिया पीड़ित को चढ़ाई जाने वाली ड्रिप में मेट्रोजिल और डाइक्लो तक उपलब्ध नहीं हैं। सिर्फ आरएल की बोतल चढ़ाकर ही काम चलाया जा रहा है।
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एंटीबायोटिक के नाम पर एक मात्र डॉक्सी साइकलिन और सेप्ट्रॉन ही मौजूद है। जबकि लंबे समय से सिफाडेक्सिम एंटीबायोटिक की मांग की जा रही है। सड़क हादसों और अन्य दुर्घटनाओं के घायलों को भी भर्ती कराया जाता है। यहां दवाओं और आधुनिक उपचार के अभाव में अधिकांश मामलों में सिर्फ मरहम-पट्टी के बाद ही घायलों को सैफई और आगरा के लिए रेफर कर दिया जाता है। कारण यहां दर्द निवारक दवाएं ही नहीं हैं।
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दर्द के लिए डाइक्लोफेनिक इंजेक्शन बेहद कारगर है, लेकिन यह नहीं है। इससे चलते मरीज कराहता रहता है। टाइफाइड, घाव सुखान, बच्चों की उल्टी दस्त के सीरप, खांसी, पेशाब में जलन की दवा नहीं है।
सीएमएस डा. एके उपाध्याय ने कहा कि आवश्यक जीवन रक्षक और दर्द निवारक दवाओं की उपलब्धता के लिए पत्र लिखा गया है। बजट के अभाव में दवाएं नहीं आ पा रही हैं। हमारी कोशिश है कि किसी भी हाल में मरीजों की जीवनरक्षा कर उन्हें बेहतर उपचार दें।