{"_id":"5c017794bdec2241c802e9b4","slug":"71543600020-agra-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डूडा ने सरकार को किया गुमराह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डूडा ने सरकार को किया गुमराह
Updated Fri, 30 Nov 2018 11:17 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैनपुरी। जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) में केवल प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को ही नहीं बल्कि प्रभारी मंत्री को भी गुमराह कर दिया। समीक्षा बैठक में पेश की गई रिपोर्ट में डेढ़ सौ से भी अधिक आवासों को पूर्ण दिखा दिया गया। वहीं, तीन दिन पहले भेजी गई रिपोर्ट में एक भी आवास पूरा नहीं था। मामला सामने आने के बाद एक बार फिर डूडा के अधिकारी सवालों के घेरे में हैं।
जिला नगरीय विकास अभिकरण की ओर से प्रधानमंत्री आवासों के निर्माण के लिए लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेजी जाती है। इस धनराशि में घूसखोरी के अब तक कई मामले सामने आ चुके हैं। इसमें एक मामले में तीन कर्मचारी जहां बर्खास्त हो चुके हैं तो वहीं एक अन्य कर्मचारी पर प्रशासन की मेहरबानी के चलते अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इसी दौरान डूडा विभाग से प्रभारी मंत्री को दी गई आवास प्रगति रिपोर्ट में गड़बड़ी का एक मामला सामने आया है। यहां प्रभारी मंत्री को विभाग ने फर्जी रिपोर्ट दे डाली। हुआ ये कि 28 नवंबर को प्रभारी मंत्री गिरीश चंद्र यादव जिले में भ्रमण पर आए थे। समीक्षा बैठक के लिए जिला सांख्यिकीय अधिकारी कार्यालय ने डूडा से प्रधानमंत्री आवासों की प्रगति रिपोर्ट मांगी।
विज्ञापन
डूडा ने भेजी गई रिपोर्ट में स्वीकृत 1906 आवासों में से 1790 लाभार्थियों को प्रथम किस्त जारी होने, 1098 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त जारी होने और 177 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण होने की जानकारी दी गई। इसी रिपोर्ट को बैठक में पेश भी किया गया, लेकिन ये रिपोर्ट फर्जी निकली। ये पता तब चला जब दो दिन पहले डूडा द्वारा भेजी गई प्रधानमंत्री आवासों की रिपोर्ट हाथ आई।
दोनों में बहुत बढ़ा अंतर था। दो दिन पहले की रिपोर्ट में जहां 1740 लाभार्थियों को प्रथम किस्त जारी होने की जानकारी दी गई। इसमें द्वितीय किस्त शून्य और पूर्ण आवासों की जानकारी भी नहीं दी गई थी। ऐसे में ये दोनों रिपोर्ट एक दूसरे की विरोधात्मक थीं। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब प्रभारी मंत्री को फर्जी रिपोर्ट दी जा सकती है तो आम आदमी के साथ फर्जीवाड़ा करना डूडा के अधिकारियों के बाएं हाथ का खेल है।
विज्ञापन
जिला नगरीय विकास अभिकरण की ओर से प्रधानमंत्री आवासों के निर्माण के लिए लाभार्थियों के खाते में धनराशि भेजी जाती है। इस धनराशि में घूसखोरी के अब तक कई मामले सामने आ चुके हैं। इसमें एक मामले में तीन कर्मचारी जहां बर्खास्त हो चुके हैं तो वहीं एक अन्य कर्मचारी पर प्रशासन की मेहरबानी के चलते अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
विज्ञापन
इसी दौरान डूडा विभाग से प्रभारी मंत्री को दी गई आवास प्रगति रिपोर्ट में गड़बड़ी का एक मामला सामने आया है। यहां प्रभारी मंत्री को विभाग ने फर्जी रिपोर्ट दे डाली। हुआ ये कि 28 नवंबर को प्रभारी मंत्री गिरीश चंद्र यादव जिले में भ्रमण पर आए थे। समीक्षा बैठक के लिए जिला सांख्यिकीय अधिकारी कार्यालय ने डूडा से प्रधानमंत्री आवासों की प्रगति रिपोर्ट मांगी।
विज्ञापन
डूडा ने भेजी गई रिपोर्ट में स्वीकृत 1906 आवासों में से 1790 लाभार्थियों को प्रथम किस्त जारी होने, 1098 लाभार्थियों को द्वितीय किस्त जारी होने और 177 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण होने की जानकारी दी गई। इसी रिपोर्ट को बैठक में पेश भी किया गया, लेकिन ये रिपोर्ट फर्जी निकली। ये पता तब चला जब दो दिन पहले डूडा द्वारा भेजी गई प्रधानमंत्री आवासों की रिपोर्ट हाथ आई।
दोनों में बहुत बढ़ा अंतर था। दो दिन पहले की रिपोर्ट में जहां 1740 लाभार्थियों को प्रथम किस्त जारी होने की जानकारी दी गई। इसमें द्वितीय किस्त शून्य और पूर्ण आवासों की जानकारी भी नहीं दी गई थी। ऐसे में ये दोनों रिपोर्ट एक दूसरे की विरोधात्मक थीं। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब प्रभारी मंत्री को फर्जी रिपोर्ट दी जा सकती है तो आम आदमी के साथ फर्जीवाड़ा करना डूडा के अधिकारियों के बाएं हाथ का खेल है।