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40 साल से जमीन नाम कराने के लिए भटक रहा फौजी
Updated Fri, 12 Jan 2018 11:31 PM IST
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indian army
- फोटो : amar ujala
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कासगंज। सेवानिवृत्त फौजी सरकार से मिली जमीन को अपने नाम कराने के लिए 40 साल से परेशान है। समाधान दिवस में भी उसकी समस्या का निदान नहीं हो पाया। चक्कर काट-काटकर परेशान रिटायर्ड फौजी ने राष्ट्रपति को पत्र भेजकर इच्छा मृत्यु मांगी है।
पूर्व सैनिक 80 वर्षीय किशन लाल सागर निवासी वाहिदपुर खालसा का कहना है कि उसे 1971 में शासन से 45 बीघा जमीन का पट्टा दिया। शासन से मिली जमीन के खेत संख्या 338 का पट्टा तत्कालीन प्रधान ने निरस्त कर दिया। इस मामले को वे बोर्ड में ले गए। रेवेन्यू से 1975 में इसे बहाल कर दिया गया। इसके बाद भी आज तक इसका नामांतर नहीं किया गया।
जबकि खेत संख्या 297 का नामांतर आजतक नहीं किया गया। इस जमीन से अन्य को पट्टे कर दिए। खेत संख्या 71 पर वर्ष 2004 में तत्कालीन प्रधान ने कब्जा कर लिया। इसकी शिकायत 29 जून 2017 को शासन के पोर्टल पर की गई, लेकिन समस्या का समाधान आज तक नहीं हो सका है। वह अपनी शिकायत कई बार समाधान दिवस में भी कर चुके हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका है।
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जिलाधिकारी भी 20 सितंबर 17 तक समस्या का समाधान करने के आदेश कर चुके हैं, इस आदेश का भी पालन नहीं हुआ। वे अधिकारियों के चक्कर काटते थक चुके हैं। जिसके चलते राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु मांगी है।
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पूर्व सैनिक 80 वर्षीय किशन लाल सागर निवासी वाहिदपुर खालसा का कहना है कि उसे 1971 में शासन से 45 बीघा जमीन का पट्टा दिया। शासन से मिली जमीन के खेत संख्या 338 का पट्टा तत्कालीन प्रधान ने निरस्त कर दिया। इस मामले को वे बोर्ड में ले गए। रेवेन्यू से 1975 में इसे बहाल कर दिया गया। इसके बाद भी आज तक इसका नामांतर नहीं किया गया।
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जबकि खेत संख्या 297 का नामांतर आजतक नहीं किया गया। इस जमीन से अन्य को पट्टे कर दिए। खेत संख्या 71 पर वर्ष 2004 में तत्कालीन प्रधान ने कब्जा कर लिया। इसकी शिकायत 29 जून 2017 को शासन के पोर्टल पर की गई, लेकिन समस्या का समाधान आज तक नहीं हो सका है। वह अपनी शिकायत कई बार समाधान दिवस में भी कर चुके हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकल सका है।
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जिलाधिकारी भी 20 सितंबर 17 तक समस्या का समाधान करने के आदेश कर चुके हैं, इस आदेश का भी पालन नहीं हुआ। वे अधिकारियों के चक्कर काटते थक चुके हैं। जिसके चलते राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु मांगी है।