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विकास में मील का पत्थर बनेगी राख
Updated Sun, 17 Jun 2018 11:05 PM IST
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विकास में मील का पत्थर बनेगी राख
- फोटो : अमर उजाला
एटा। जवाहर तापीय परियोजना जिले में विकास के नए आयाम ला रही है। पिछड़ेपन का शिकार जिले के विकास में परियोजना की राख मील का पत्थर बनेगी। बिजली निर्माण के बाद निकलने वाली राख से सीमेंट बनाया जाएगा। इसके लिए तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। देश की बड़ी सीमेंट कंपनियों ने परियोजना अधिकारियों और विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को राख खरीदने और फैक्ट्री की स्थापना के लिए आवेदन किया है। परियोजना को शुरू करने से पहले ही सीमेंट कंपनियां पूरा खाका खींचने की तैयारी मेें हैं।
जिले के मलावन क्षेत्र में बन रही 660 मेगावाट की दो विद्युत परियोजनाओं से प्रतिदिन 1320 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। वहीं परियोजना से निकलने वाली राख पर सीमेंट कंपनियों की नजर है। दरअसल, बिजली निर्माण के दौरान एश हैंडलिंग प्लांट के जरिये बायलर में राख इकट्ठा की जाएगी। सूखी राख के नवीकरण के लिए इसे संयंत्र के जरिये अन्य क्षेत्र में इकट्ठा किया जाएगा। कोयले की यह राख सीमेंट निर्माण में मुफीद साबित होती है। ऐसे में इस राख पर सीमेंट कंपनियों की नजर है। देश की बड़ी सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक, मंगलम और कनोडिया सीमेंट से राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और परियोजना के अधिकारियों को पत्र लिखकर राख खरीदने के लिए आवेदन किया है। साथ ही कंपनियों ने परियोजना संयंत्र के आसपास यूनिट स्थापित करने के लिए भी हामी भरी है। परियोजना अधिकारियों के चयन के बाद फैक्ट्री की स्थापना के लिए कंपनी काम शुरू कर देगी। परियोजना के सहायक अभियंता सुमित यादव बताते हैं कि सीमेंट कंपनियों ने राख के लिए आवेदन किए हैं। इसे लेकर निगम के उच्चाधिकारियों को फैसला लेना है। जल्द ही इसकी कवायद शुरू होगी। बता दें कि जिले में बन रही परियोजना को दूशान पावर सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड दक्षिण कोरिया बना रही है, जिसे वर्ष 2021 तक पूरा किया जाना है।
कब कितनी राख का उत्पादन
पूर्ण लोड पर राख का उत्पादन- 231.31 टन प्रति घंटा
सूखी राख का उत्पादन- 185.05 टन प्रति घंटा
किस साल कितना उत्पादन
परियोजना शुरुआत के प्रथम वर्ष में- 50 फीसद
द्वितीय वर्ष में- 70 फीसदी
तृतीय वर्ष में- 90 फीसदी
चतुर्थ वर्ष में- 100 फीसदी
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जिले के मलावन क्षेत्र में बन रही 660 मेगावाट की दो विद्युत परियोजनाओं से प्रतिदिन 1320 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाएगा। वहीं परियोजना से निकलने वाली राख पर सीमेंट कंपनियों की नजर है। दरअसल, बिजली निर्माण के दौरान एश हैंडलिंग प्लांट के जरिये बायलर में राख इकट्ठा की जाएगी। सूखी राख के नवीकरण के लिए इसे संयंत्र के जरिये अन्य क्षेत्र में इकट्ठा किया जाएगा। कोयले की यह राख सीमेंट निर्माण में मुफीद साबित होती है। ऐसे में इस राख पर सीमेंट कंपनियों की नजर है। देश की बड़ी सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक, मंगलम और कनोडिया सीमेंट से राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड और परियोजना के अधिकारियों को पत्र लिखकर राख खरीदने के लिए आवेदन किया है। साथ ही कंपनियों ने परियोजना संयंत्र के आसपास यूनिट स्थापित करने के लिए भी हामी भरी है। परियोजना अधिकारियों के चयन के बाद फैक्ट्री की स्थापना के लिए कंपनी काम शुरू कर देगी। परियोजना के सहायक अभियंता सुमित यादव बताते हैं कि सीमेंट कंपनियों ने राख के लिए आवेदन किए हैं। इसे लेकर निगम के उच्चाधिकारियों को फैसला लेना है। जल्द ही इसकी कवायद शुरू होगी। बता दें कि जिले में बन रही परियोजना को दूशान पावर सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड दक्षिण कोरिया बना रही है, जिसे वर्ष 2021 तक पूरा किया जाना है।
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कब कितनी राख का उत्पादन
पूर्ण लोड पर राख का उत्पादन- 231.31 टन प्रति घंटा
सूखी राख का उत्पादन- 185.05 टन प्रति घंटा
किस साल कितना उत्पादन
परियोजना शुरुआत के प्रथम वर्ष में- 50 फीसद
द्वितीय वर्ष में- 70 फीसदी
तृतीय वर्ष में- 90 फीसदी
चतुर्थ वर्ष में- 100 फीसदी