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जरा-जरा सी बात पर युवा कर रहे जान देने की कोशिश

Sun, 10 Jun 2018 10:51 PM IST
Updated Sun, 10 Jun 2018 10:51 PM IST
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जरा-जरा सी बात पर युवा कर रहे जान देने की  कोशिश
मैनपुरी। युवा जरा-जरा सी बात पर नाराज होकर जहरीला पदार्थ खाकर जान देने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा मौसम का प्रभाव माना जा रहा है। जनपद में पिछले 24 घंटे में आठ युवाओं ने जहरीला पदार्थ खाकर जान देने की कोशिश की। इनमें छह युवतियां हैं। तीन को गंभीर हालत में मिनी पीजीआई सैफई के लिए रेफर किया गया है।
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थाना किशनी क्षेत्र के गांव नहगवां निवासी 18 वर्षीय युवती, कोतवाली थाना क्षेत्र में देवीरोड निवासी 15 वर्षीय युवती, पावर हाउस रोड निवासी 20 वर्षीय युवती, संसारपुर निवासी 16 वर्षीय युवती, हिंदपुरम निवासी 23 वर्षीय युवती, किर्रा निवासी 18 वर्षीय युवती, बेवर थाना क्षेत्र के गांव परोंखा निवासी 23 युवक, थाना दन्नाहार क्षेत्र के गांव नेकापुर निवासी 19 वर्षीय युवक ने जहरीला पदार्थ खाकर जान देने की कोशिश की। उन्हें परिजनों ने गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
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जिला अस्पताल से गंभीर हालत देखते हुए तीन को गंभीर हालत के चलते मिनी पीजीआई सैफई के लिए रेफर किया गया है। जिला अस्पताल में दर्ज रिकार्ड पर यदि नजर डालें तो पता चलता है कि एक सप्ताह में 34 लोगों ने जहर खाकर जान देने का प्रयास किया। जिसमें 29 युवा शामिल हैं। यदि पिछले एक महीने के रिकार्ड पर नजर डालें तो 109 लोगों ने जहर खाकर जान देने का प्रयास किया है।
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मैनपुरी। जिला अस्पताल में तैनात मनोवैज्ञानिक सलाहकार निर्मला देवी बताती हैं कि आत्म हत्या की बढ़ती मनोवृत्ति का कारण मानसिक तनाव है। गर्मी के मौसम में मानसिक तनाव और भी बढ़ जाता है। युवा वर्ग इस भागदौड़ और प्रतिस्पर्धा की जिंदगी में अपनी आकांक्षाओं को बहुत जल्द पूरा करना चाहते हैं। इसके लिए वे कोई भी कदम उठाने को तैयार रहते हैं। प्रेम प्रसंग में धोखा उठाने के बाद भी आज के युवा आत्महत्या का कदम उठा रहे हैं।

मैनपुरी। मनोवैज्ञानिक सलाहकार निर्मला देवी बताती हैं कि इस तरह के मामलों को रोकने के लिए काउंसलिंग होनी चाहिए। वहीं परिवार के लोगों को बच्चों की असफलता पर डांटने के बजाय उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए, समझाना चाहिए। इसके अलावा एनजीओ और सामाजिक संगठनों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में जागरूकता शिविर लगाकर युवाओं को ऐसा करने से रोकने का प्रयास किया जाना चाहिए।


मैनपुरी। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरके सागर कहते हैं कि बुजुर्गों को इस उम्र में अपने बच्चों व परिवार से प्यार की उम्मीदें होती हैं। लेकिन इसे भागमभाग की जिंदगी कहें या फिर काम का बोझ कि आज के युवा अपने बुजुर्गों की तरफ ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। इससे नाराज बुजुर्ग उन्हें डांटते हैं तो युवा जान देने की कोशिश करते हैं। बुजुर्गों को समय के साथ अपने आप में सामंजस्य बैठाना होगा।
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