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अठारह घंटे बाद उठने दिया किसान का शव
Updated Sat, 08 Dec 2018 11:52 PM IST
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सिरसागंज। सिरसागंज के अरांव चौकी क्षेत्र में शुक्रवार शाम को विद्युत करंट लगने से किसान सुरेंद्र की मौत हो गई थी, लेकिन विद्युत विभाग की लापरवाही से गई किसान की जान के बाद गुस्साए किसानों ने शव उठा कर ले जाने से मना कर दिया। शनिवार को अठारह घंटे बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया।
पिडसरा निवासी सुरेंद्र सिंह (37) पुत्र विजय बहादुर की विद्युत करंट से मौत हो गई थी। हादसे के बाद सूचना मिलने पर भी विद्युत विभाग का कोई भी अधिकारी मौके पर नही पहुंचा तो ग्रामीण एकत्रित हो गए। उन्होंने हंगामा करना शुरू कर दिया।
सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन मुआवजे की मांग पर अड़े ग्रामीणों ने सब उठने देने से इंकार कर दिया। देर रात तक प्रशासनकि अधिकारी मौके पर जमे रहे। शनिवार की सुबह जब पूर्व जिलापंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप, भारौल के नेता बबलू यादव मौके पर पहुंचे।
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सिरसागंज से एसडीएम, सीओ सिरसागंज व तहसीलदार ने मौके पर परिजनों को दो लाख रुपये का चेक दिया। साथ ही एक आवास और पांच लाख के किसान दुर्घटना बीमा का अश्वासन दिया जिसके बाद ग्रामीणों ने शव को पोस्टमार्टम के लिये जाने दिया।
वहीं विजय प्रताप छोटू ने कहा कि सुरेंद्र का परिवार बहुत ही गरीब है। वहीं सुरेंद्र की पत्नी अपाहिज है और उसके चार बच्चे हैं जिसके लिए उसके परिवार को उचित मुआवजा मिलना जरूरी है।
पिडसरा निवासी सुरेंद्र सिंह (37) पुत्र विजय बहादुर की विद्युत करंट से मौत हो गई थी। हादसे के बाद सूचना मिलने पर भी विद्युत विभाग का कोई भी अधिकारी मौके पर नही पहुंचा तो ग्रामीण एकत्रित हो गए। उन्होंने हंगामा करना शुरू कर दिया।
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सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजनों और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन मुआवजे की मांग पर अड़े ग्रामीणों ने सब उठने देने से इंकार कर दिया। देर रात तक प्रशासनकि अधिकारी मौके पर जमे रहे। शनिवार की सुबह जब पूर्व जिलापंचायत अध्यक्ष विजय प्रताप, भारौल के नेता बबलू यादव मौके पर पहुंचे।
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सिरसागंज से एसडीएम, सीओ सिरसागंज व तहसीलदार ने मौके पर परिजनों को दो लाख रुपये का चेक दिया। साथ ही एक आवास और पांच लाख के किसान दुर्घटना बीमा का अश्वासन दिया जिसके बाद ग्रामीणों ने शव को पोस्टमार्टम के लिये जाने दिया।
वहीं विजय प्रताप छोटू ने कहा कि सुरेंद्र का परिवार बहुत ही गरीब है। वहीं सुरेंद्र की पत्नी अपाहिज है और उसके चार बच्चे हैं जिसके लिए उसके परिवार को उचित मुआवजा मिलना जरूरी है।