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जय हो दाऊ दयाल की, 125 किलो दूध से हुआ जन्माभिषेक
Updated Mon, 28 Aug 2017 07:30 AM IST
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भक्तों की उमड़ी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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बलदेव (मथुरा)। ब्रज के राजा बलदाऊ महाराज का जन्मोत्सव बलदेव छठ के रूप में धूमधाम से मनाया गया। बलदेव में तो हर घर में जश्न था। दाऊजीमंदिर में बलदाऊ महाराज का जन्माभिषेक हुआ, वहीं समाज गायन किया और बलदाऊ को जन्म की बधाई दी गई। दाऊ का 125 किलो दूध से बने पंचामृत से अभिषेक कर 15 कुंतल लड्डूओं का भोग लगाया गया।
रविवार को बलदेव छठ पर हर तरफ उत्साह का माहौल था। बलदाऊ मंदिर में मंगला आरती के बाद दर्शन दिए गए। 12 बजे के बाद बलदाऊ महाराज का जन्म हुआ। वेदपाठी ब्राह्मणों व सेवायतों ने 125 किलो दूध, दही, शहद, बूरा और घी से बने पंचामृत से ठाकुर बलदाऊ महाराज का अभिषेक कराया। बलदाऊ महाराज को हीरा पन्ना, मूंगा, मोती सहित अन्य कीमती रत्न जड़ित पोशाक धारण कराई गई। ठाकुर बलदाऊ महाराज ने भक्तों को जन्म के दर्शन दिए।
गोस्वामी समाज के लोगों ने समाज गायन किया और बलदाऊ महाराज को जन्म की बधाई दी। इसमें बलदाऊ के जयकारे लगाए और जय दाऊ दयाल की’ का गायन किया गया। राजभोग के बाद बलदाऊ महाराज की आरती उतारी गई। इसके बाद गोस्वामी समाज के लोगों ने दधिकांदौ उत्सव किया। इसमें दही, हल्दी व मक्खन मिश्रित लाला की छीची भक्तों पर बिखेरी और नारियल, बर्तन, वस्त्र लुटाए गए।
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नारियल को बलदाऊ महाराज का प्रसाद माना जाता है। नारियल लूटने को गोस्वामी समाज के युवाओं ने बल प्रदर्शन किया। इसके बाद बलदाऊ मंदिर की परिक्रमा लगाई और 15 कुंतल बेसनी लड्डू का भोग लगाया और उसका प्रसाद बांटा। नगर में बलदाऊ महाराज की शोभायात्रा निकाली और सांस्कृतिक कार्यक्रम कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। मंदिर के रिसीवर आरके पांडेय ने बताया कि विदेशों से भी दाऊजी के भक्त आए।
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रविवार को बलदेव छठ पर हर तरफ उत्साह का माहौल था। बलदाऊ मंदिर में मंगला आरती के बाद दर्शन दिए गए। 12 बजे के बाद बलदाऊ महाराज का जन्म हुआ। वेदपाठी ब्राह्मणों व सेवायतों ने 125 किलो दूध, दही, शहद, बूरा और घी से बने पंचामृत से ठाकुर बलदाऊ महाराज का अभिषेक कराया। बलदाऊ महाराज को हीरा पन्ना, मूंगा, मोती सहित अन्य कीमती रत्न जड़ित पोशाक धारण कराई गई। ठाकुर बलदाऊ महाराज ने भक्तों को जन्म के दर्शन दिए।
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गोस्वामी समाज के लोगों ने समाज गायन किया और बलदाऊ महाराज को जन्म की बधाई दी। इसमें बलदाऊ के जयकारे लगाए और जय दाऊ दयाल की’ का गायन किया गया। राजभोग के बाद बलदाऊ महाराज की आरती उतारी गई। इसके बाद गोस्वामी समाज के लोगों ने दधिकांदौ उत्सव किया। इसमें दही, हल्दी व मक्खन मिश्रित लाला की छीची भक्तों पर बिखेरी और नारियल, बर्तन, वस्त्र लुटाए गए।
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नारियल को बलदाऊ महाराज का प्रसाद माना जाता है। नारियल लूटने को गोस्वामी समाज के युवाओं ने बल प्रदर्शन किया। इसके बाद बलदाऊ मंदिर की परिक्रमा लगाई और 15 कुंतल बेसनी लड्डू का भोग लगाया और उसका प्रसाद बांटा। नगर में बलदाऊ महाराज की शोभायात्रा निकाली और सांस्कृतिक कार्यक्रम कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। मंदिर के रिसीवर आरके पांडेय ने बताया कि विदेशों से भी दाऊजी के भक्त आए।