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UP: खतरे में 500 साल पुरानी लोदीकालीन मस्जिद, दो गुंबद तो ढह गए, अब तीसरा ढहने के कगार पर
Sat, 28 Mar 2026 12:50 PM IST
Dhirendra Singh
देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
देश दीपक तिवारी, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Sat, 28 Mar 2026 12:50 PM IST
सार
सिकंदर लोदी के दौर की करीब 500 साल पुरानी मस्जिद सिकंदरा में उपेक्षा और अतिक्रमण के चलते जर्जर हालत में पहुंच गई है। दो गुंबद ढहने के बाद भी मरम्मत नहीं हुई, जिससे अब इस ऐतिहासिक धरोहर के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है।
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लोदी काल की मस्जिद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
सुल्तान सिकंदर लोदी ने सिकंदरा को बसाने के साथ आगरा को राजधानी बनाया। यहां उसी दौर की 500 साल पुरानी एकमात्र मस्जिद का वजूद खतरे में है। तीन गुंबद वाली मस्जिद के दो गुंबद भारी बारिश के कारण डेढ़ साल पहले ढह गए। तब से अब तक इसकी मरम्मत हुई, न ही इसे बचाने की कवायद की गई। अब यहां बचे हुए हिस्से में एक परिवार ने अपने बसेरा बना लिया है, वहीं इसके पीछे की जमीन पर निर्माण शुरू हो गए हैं।
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आगरा की सबसे पुरानी मस्जिदों में शुमार लोदी काल की मस्जिद आठ फीट ऊंचे प्लेटफाॅर्म पर बनी थी। मिट्टी का ऊंचा टीला यहां वर्ष 1980 तक नजर आता था, लेकिन उसके बाद पहले मिट्टी का टीला खत्म किया गया। अब इस धरोहर का वजूद खतरे में है। इसमें तीन गुंबद थे। बीच का गुंबद बड़ा और किनारे के दो गुंबद छोटे आकार के थे। इसकी दीवारों पर लाइम पनिंग की गई थी।
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धरोहर का बचना है जरूरी
आगरा मुगल काल की धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। मुगलों से पहले लोदी वंश के सुल्तान सिकंदर लोदी ने वर्ष 1504 में आगरा में सिकंदरा को अपनी राजधानी बनाया था। सिकंदरा में लोदी काल की कई इमारतें बनी हैं, इनमें अकबर के मकबरे के प्रवेश द्वार के पास अष्टकोणीय मकबरा है जो लोदी काल का है, वहीं होली पब्लिक स्कूल के सामने यह मस्जिद है, जो 1510-20 के आसपास बनी है। तीन गुंबद वाली मस्जिद जमीन से 8 फीट ऊंचे प्लेटफॉर्म पर बनाई गई थी। इसकी मेहराब और अंदर की सजावट डायमंड कट की तरह से है, जो अब केवल एक गुंबद में ही बची है। लोदी काल की वास्तुकला इस इमारत के जरिए समझी जा सकती है।
आगरा मुगल काल की धरोहरों के लिए प्रसिद्ध है। मुगलों से पहले लोदी वंश के सुल्तान सिकंदर लोदी ने वर्ष 1504 में आगरा में सिकंदरा को अपनी राजधानी बनाया था। सिकंदरा में लोदी काल की कई इमारतें बनी हैं, इनमें अकबर के मकबरे के प्रवेश द्वार के पास अष्टकोणीय मकबरा है जो लोदी काल का है, वहीं होली पब्लिक स्कूल के सामने यह मस्जिद है, जो 1510-20 के आसपास बनी है। तीन गुंबद वाली मस्जिद जमीन से 8 फीट ऊंचे प्लेटफॉर्म पर बनाई गई थी। इसकी मेहराब और अंदर की सजावट डायमंड कट की तरह से है, जो अब केवल एक गुंबद में ही बची है। लोदी काल की वास्तुकला इस इमारत के जरिए समझी जा सकती है।
संरक्षण होना ही चाहिए
पुरातत्वविद पद्मश्री केके मुहम्मद का कहना है कि यह धरोहर इतिहास और उस दौर की वास्तुकला को बताती है, इसका संरक्षण होना ही चाहिए। नई पीढ़ी तक अपने इतिहास को पहुंचाने का यही जरिया है। एडॉप्ट हेरिटेज के जरिए प्रशासन चाहे तो निजी क्षेत्र की मदद से इसे सहेज सकता है।
पुरातत्वविद पद्मश्री केके मुहम्मद का कहना है कि यह धरोहर इतिहास और उस दौर की वास्तुकला को बताती है, इसका संरक्षण होना ही चाहिए। नई पीढ़ी तक अपने इतिहास को पहुंचाने का यही जरिया है। एडॉप्ट हेरिटेज के जरिए प्रशासन चाहे तो निजी क्षेत्र की मदद से इसे सहेज सकता है।
स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी
राज्य पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी ज्ञानेंद्र रस्तोगी ने बताया कि यह स्मारक राज्य पुरातत्व विभाग के संरक्षण में नहीं है। इसकी देखरेख और मरम्मत स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है, हमारा विभाग केवल वहीं काम कराएगा, जो संरक्षित हैं।
राज्य पुरातत्व विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी ज्ञानेंद्र रस्तोगी ने बताया कि यह स्मारक राज्य पुरातत्व विभाग के संरक्षण में नहीं है। इसकी देखरेख और मरम्मत स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है, हमारा विभाग केवल वहीं काम कराएगा, जो संरक्षित हैं।