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छप्पनभोग की खुशबू से महकी गिरिराज तलहटी
Updated Wed, 24 Oct 2018 12:05 AM IST
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छप्पन भोग के दर्शन।
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा। श्री गिर्राज सेवा ट्रस्ट के तत्वाधान में शरद पूर्णिमा पर धवल चांदनी के मध्य गोवर्धन स्थित आन्यौर परिक्रमा मार्ग में हीरे-जवाहरात से सजे गिर्राज जी को धराए गए छप्पन भोग के दर्शनों को श्रद्धालुओं का सैलाब देर रात्रि तक उमड़ता रहा। आयोजकों द्वारा दर्शनों के लिए किए गए सारे इंतजाम भीड़ के आगे बौने साबित हुए। देशी-विदेशी फूलों की हवा में बिखरती महक ओर भजनों की मस्ती ने हर किसी को झूमने के लिए मजबूर कर दिया।
ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा गिर्राजशिला का अद्भुत शृंगार किया गया। हीरे-जवारात व फूलों से सुसज्जित शृंगार के साथ-साथ श्वेत वस्त्रों से सजे विशाल पंडाल में कृष्ण लीला के दृश्यों को साकार किया गया। समूची गिर्राज तलहटी एवं छप्पनभोग स्थल को स्वर्ण जड़ित मंदिर में तब्दील किया गया था। यहां ट्रस्ट परिवार द्वारा ब्रज वसुंधरा से छप्पनभोग स्थल तक प्रसाद की टोकरियां नंगे पाव मानव श्रृंखला बनाकर पहुंचाई गई।
दोपहर दो बजे जैसे ही दीप प्रज्जवलित कर छप्पन भोग के दर्शनों का शुभारंभ किया गया। गिर्राज तलहटी से ब्रज वसुन्धरा तक बनाए गए पांच तोरण द्वारा हर किसी का ध्यान आकर्षित कर रहे थे। समीप ही बने मंच पर टी सीरीज कंपनी के कलाकारों ने ठाकुरजी का गुणगान किया। दर्शनार्थियों एवं श्रद्धालु संगीत मस्ती में झूम रहे थे। ट्रस्ट परिवार द्वारा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। रात्रि 1 बजे महाआरती के साथ दर्शनों का समापन हुआ। महोत्सव से पूर्व ब्रज वसुंधरा में साधु-संतों की सेवा की गई।
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ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा गिर्राजशिला का अद्भुत शृंगार किया गया। हीरे-जवारात व फूलों से सुसज्जित शृंगार के साथ-साथ श्वेत वस्त्रों से सजे विशाल पंडाल में कृष्ण लीला के दृश्यों को साकार किया गया। समूची गिर्राज तलहटी एवं छप्पनभोग स्थल को स्वर्ण जड़ित मंदिर में तब्दील किया गया था। यहां ट्रस्ट परिवार द्वारा ब्रज वसुंधरा से छप्पनभोग स्थल तक प्रसाद की टोकरियां नंगे पाव मानव श्रृंखला बनाकर पहुंचाई गई।
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दोपहर दो बजे जैसे ही दीप प्रज्जवलित कर छप्पन भोग के दर्शनों का शुभारंभ किया गया। गिर्राज तलहटी से ब्रज वसुन्धरा तक बनाए गए पांच तोरण द्वारा हर किसी का ध्यान आकर्षित कर रहे थे। समीप ही बने मंच पर टी सीरीज कंपनी के कलाकारों ने ठाकुरजी का गुणगान किया। दर्शनार्थियों एवं श्रद्धालु संगीत मस्ती में झूम रहे थे। ट्रस्ट परिवार द्वारा श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। रात्रि 1 बजे महाआरती के साथ दर्शनों का समापन हुआ। महोत्सव से पूर्व ब्रज वसुंधरा में साधु-संतों की सेवा की गई।
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