Exclusive : आगरा में 16 साल में नहीं हो पाई 32 तालाबों की खोदाई, 87 लाख रुपये की कार्ययोजना फेल
राजस्व व नगर निगम ने 2006 में तालाबों से कब्जे हटाने की कार्ययोजना बनाई थी। 16 साल बीते गए, अब तक न तालाबों से अतिक्रमण हटा और न ही पुनर्द्धार हो सका।
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आगरा विकास प्राधिकरण, राजस्व विभाग और नगर निगम 16 साल में 32 तालाबों की खोदाई नहीं कर पाए। 87 लाख रुपये की कार्य योजना फेल हो गई। तालाबों से अतिक्रमण हटे न पुर्नउद्धार हो सका। ये हाल तब है जब जनहित याचिका के जवाब में कार्य योजना बनी, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से अंजाम तक नहीं पहुंच सकी।
शहर डार्क जोन में शामिल है, फिर भी 16 साल से शहरी क्षेत्र में तालाबों की खोदाई, डिसील्टिंग व जीर्णोद्धार नहीं हो सका। सूबे में सूखे के हालात हैं, जबकि आगरा सर्वाधिक वर्षा वाला जिला है। यहां 25% अधिक बारिश दर्ज हो चुकी है। आसमान से बरसने वाले अमृत को सहेजने के इंतजाम लापरवाही की भेंट चढ़ गए।
2012 में हाईकोर्ट ने दिए थे निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीके जोशी की जनहित याचिका 77444/2006 में पारित आदेश में दिनांक 30 अगस्त 2012 को चिह्नित तालाबों से अतिक्रमण हटाने व खोदाई की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए थे।
जिसके लिए तत्कालीन कमिश्नर अशोक कुमार और डीएम अजय चौहान के आदेश पर एडीए ने 16 और नगर निगम व राजस्व विभाग ने 16 कुल 32 तालाबों की खोदाई के लिए करीब 87 लाख रुपये का एस्टिमेट बनाया था, जिसे 2006 में हाईकोर्ट में दाखिल किया गया। तब तीन से चार महीने में खोदाई कार्य पूर्ण होना था। 2012 में हाईकोर्ट ने याचिका पर आदेश जारी किए, लेकिन 10 साल बाद भी नतीजा सिफर है। एक भी तालाब से कब्जा हटा न खोदाई हो सकी।