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माल के मुकदमे भी अब शीघ्र होंगे निस्तारित
Updated Sat, 18 Aug 2018 11:06 PM IST
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मैनपुरी। दीवानी न्यायालयों में लंबित माल के मुकदमों का अब शीघ्र निस्तारण होगा। मुकदमों को लंबित करने के लिए पक्षकारों द्वारा दिए जाने वाले स्थगन प्रार्थना पत्र विशेष परिस्थितियों में ही स्वीकार होंगे। 10 सालों से चल रहे मुकदमों को जल्द निस्तारित करने की पहल मुकदमों का बोझ कम करने में सहायक साबित होगी।
दीवानी न्यायालयों में माल (जमीन, खेती, मकान) के तमाम मुकदमे सालों से चल रहे हैं। मुकदमों को लंबित करने के लिए पक्षकार आम तौर पर स्थगन प्रार्थना पत्र अदालत में देते रहते हैं। जिससे मुकदमों का समय से निस्तारण नहीं हो पाता है। अब पुराने मुकदमों को शीघ्र निस्तारित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। विशेष परिस्थितियों में ही स्थगन प्रार्थना पत्र स्वीकार होंगे। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सालों से चल रहे माल के मुकदमे शीघ्र निस्तारित होने से अदालतों पर काम का बोझ भी कम होगा।
पूर्व डीजीसी उस्मान अली का कहना है कि स्थगन प्रार्थना पत्र कम से कम स्वीकार किए जाने से माल के मुकदमे भी जल्द ही निस्तारित हो सकेंगे। अदालतों पर काम का बोझ भी कम होगा। पूर्व डीजीसी संतोष कुमार दीक्षित ने बताया कि मुकदमों को लटकाने की प्रवृति ठीक नहीं है। इससे पीड़ित को समय से न्याय नहीं मिल पाता है। देरी से मिलने वाला न्याय फिर न्याय नहीं रहता है।
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दीवानी न्यायालयों में माल (जमीन, खेती, मकान) के तमाम मुकदमे सालों से चल रहे हैं। मुकदमों को लंबित करने के लिए पक्षकार आम तौर पर स्थगन प्रार्थना पत्र अदालत में देते रहते हैं। जिससे मुकदमों का समय से निस्तारण नहीं हो पाता है। अब पुराने मुकदमों को शीघ्र निस्तारित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। विशेष परिस्थितियों में ही स्थगन प्रार्थना पत्र स्वीकार होंगे। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सालों से चल रहे माल के मुकदमे शीघ्र निस्तारित होने से अदालतों पर काम का बोझ भी कम होगा।
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पूर्व डीजीसी उस्मान अली का कहना है कि स्थगन प्रार्थना पत्र कम से कम स्वीकार किए जाने से माल के मुकदमे भी जल्द ही निस्तारित हो सकेंगे। अदालतों पर काम का बोझ भी कम होगा। पूर्व डीजीसी संतोष कुमार दीक्षित ने बताया कि मुकदमों को लटकाने की प्रवृति ठीक नहीं है। इससे पीड़ित को समय से न्याय नहीं मिल पाता है। देरी से मिलने वाला न्याय फिर न्याय नहीं रहता है।
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