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पॉलीथिन का प्रयोग मानव के जीवन से कर रहा खिलवाड़
Updated Sat, 09 Jun 2018 11:00 PM IST
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मैनपुरी/ कुसमरा। कोर्ट के आदेश और शासन के निर्देशों के बाद भी जनपद में पॉलीथिन और प्लास्टिक का प्रयोग बंद नहीं हो पा रहा है। बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहे प्लास्टिक और पॉलीथिन ने इंसान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कभी न सड़ने वाली प्लास्टिक की पन्नियों से शहर के नाले, नालियां जाम हो जाती हैं। वहीं इसका बेधड़क प्रयोग लोगों को बीमार बना रहा है।
वर्ष 2017 में 50 माइक्रान से पतली पॉलीथिन पर पूरी तरह से रोक के लिए कोर्ट ने निर्देश जारी किए थे। कोर्ट के आदेश पर शासन ने भी जिला प्रशासन को कार्रवाई के लिए आगाह किया था। इसके बाद भी जनपद में धड़ल्ले से पॉलीथिन का प्रयोग दुकानों में किया जा रहा है। इसके कई प्रकार से दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। पॉलीथिन और प्लास्टिक का प्रयोग पशुओं की मौत का कारण भी बनता जा रहा है।
ऐसे में इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की जरूरत है, लेकिन जिला प्रशासन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। नतीजन बड़ी संख्या में हो रहे पॉलीथिन के प्रयोग के कारण पर्यावरण दूषित हो रहा है और कई प्रकार की खतरनाक बीमारियां जनपद में बढ़ रही हैं। व्यवसायी अनूप पांडेय कहते हैं कि प्लास्टिक का प्रयोग हमारे जीवन में सर्वाधिक होने लगा है। इसका प्रयोग नुकसान दायक है यह जानते हुए भी हम धड़ल्ले से इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। यह अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मारने जैसा है। इसके प्रयोग पर रोक लगे तो बात बने।
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वर्ष 2017 में 50 माइक्रान से पतली पॉलीथिन पर पूरी तरह से रोक के लिए कोर्ट ने निर्देश जारी किए थे। कोर्ट के आदेश पर शासन ने भी जिला प्रशासन को कार्रवाई के लिए आगाह किया था। इसके बाद भी जनपद में धड़ल्ले से पॉलीथिन का प्रयोग दुकानों में किया जा रहा है। इसके कई प्रकार से दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। पॉलीथिन और प्लास्टिक का प्रयोग पशुओं की मौत का कारण भी बनता जा रहा है।
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ऐसे में इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की जरूरत है, लेकिन जिला प्रशासन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। नतीजन बड़ी संख्या में हो रहे पॉलीथिन के प्रयोग के कारण पर्यावरण दूषित हो रहा है और कई प्रकार की खतरनाक बीमारियां जनपद में बढ़ रही हैं। व्यवसायी अनूप पांडेय कहते हैं कि प्लास्टिक का प्रयोग हमारे जीवन में सर्वाधिक होने लगा है। इसका प्रयोग नुकसान दायक है यह जानते हुए भी हम धड़ल्ले से इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। यह अपने पैर पर खुद कुल्हाड़ी मारने जैसा है। इसके प्रयोग पर रोक लगे तो बात बने।
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