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30 फीसदी बच्चे नाटेपन के शिकार
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा।
Updated Wed, 20 Jan 2016 02:28 AM IST
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देश के 30 फीसदी बच्चे ग्रोथ डिसआर्डर (नाटेपन) के शिकार हैं। एसएन मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग की कंटीन्यू मेडिकल एजूकेशन (सीएमई) में ऐसे बच्चों के इलाज पर चर्चा हुई। मुख्य वक्ता टेक्सास टेक यूनीवर्सिटी हेल्थ साइंसेज के प्रो. सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि नाटेपन का बड़ा कारण कुपोषण और हार्मोंस का असंतुलन है। स्थिति ये है कि विश्व का हर चौथा नाटा बच्चा भारतीय है। ऐसे बच्चों का इलाज ग्रोथ चार्ट के मुताबिक करना चाहिए। वजन-ऊंचाई कम होने पर जांच कर, मर्ज में कमी लाई जा सकती है। बाल रोग विभागाध्यक्ष डा. राजेश्वर दयाल ने बताया, तीन से दस साल तक के बच्चे की ऊंचाई प्रति साल पांच सेमी तक बढ़नी चाहिए। वजन की बात करें तो पांच साल में वजन 20 किग्रा रहे। औसतन हर साल 2-3 किग्रा बढे़। 10 साल की उम्र में बच्चे का वजन लगभग 28 किग्रा हो। मेडिकल कालेज के कार्यवाहक प्राचार्य डा. अजय अग्रवाल, डा. राकेश भाटिया, डा. मनोज कुमार सिंह, डा. एसपी सिंह और डा. पंकज कुमार ने भी अपने विचार रखे।
एसएन में होगी नवजात बच्चों के हाइपोथाइराइडिज्म की जांच
- एसएन मेडिकल कालेज का बाल रोग विभाग अनूठी पहल करने जा रहा है। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के साथ मिलकर हाइपोथाइराइडिज्म की जांच की जा सकेगी। बच्चे के जन्म लेते ही रक्त जांच से इसकी संभावना जानकर, इसका इलाज शुरू किया जा सकेगा। अभी तक यह सुविधा प्रदेश के अन्य किसी मेडिकल कालेज में नहीं है। हाइपोथाइराइडिज्म की कमी से शिशु मेंटली डिसआर्डर के शिकार होते हैं। मस्तिष्क का विकास प्रभावित होता है। बच्चा देर से चलना-बैठना सीखता है। जीभ भी बाहर रहती है। अधिकांश परिवारीजन इसे बीमारी नहीं मानते हैं।
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एसएन में होगी नवजात बच्चों के हाइपोथाइराइडिज्म की जांच
- एसएन मेडिकल कालेज का बाल रोग विभाग अनूठी पहल करने जा रहा है। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के साथ मिलकर हाइपोथाइराइडिज्म की जांच की जा सकेगी। बच्चे के जन्म लेते ही रक्त जांच से इसकी संभावना जानकर, इसका इलाज शुरू किया जा सकेगा। अभी तक यह सुविधा प्रदेश के अन्य किसी मेडिकल कालेज में नहीं है। हाइपोथाइराइडिज्म की कमी से शिशु मेंटली डिसआर्डर के शिकार होते हैं। मस्तिष्क का विकास प्रभावित होता है। बच्चा देर से चलना-बैठना सीखता है। जीभ भी बाहर रहती है। अधिकांश परिवारीजन इसे बीमारी नहीं मानते हैं।
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