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Agra News: 24 घंटे पानी का ढिंढोरा पीटा, योजना का स्काडा सिस्टम फेल

Fri, 09 Jan 2026 02:32 AM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 09 Jan 2026 02:32 AM IST
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24-hour water supply was touted, but the SCADA system of the scheme failed.
अमर उजाला असर
आगरा। ताजमहल के पास ताजगंज में सीवर लाइन के मैनहोल में पानी की लाइन बिछाने में आगरा स्मार्ट सिटी कंपनी की लापरवाही सामने आई थी। जलकल विभाग ने ताजगंज में पानी की लाइन बिछाने के प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया। इसमें खुलासा हुआ कि ताजगंज के एक लाख लोगों को 24 घंटे शुद्ध पानी देने का ढिंढोरा स्मार्ट सिटी कंपनी ने पीटा, उस 140 करोड़ रुपये की योजना का स्काडा सिस्टम ही फुस्स हो गया।
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ऐसे में सीवर लाइन के अंदर पड़ी पानी की लाइन लीक हुई तो दूषित पानी रोकने की कोई व्यवस्था स्मार्ट सिटी कंपनी के पास नहीं है। ताजगंज के छह वार्डों के एक लाख से ज्यादा लोगों तक पानी पहुंचाने की यह योजना है, जिसमें 140 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद खराब रखरखाव और तकनीकी लापरवाही से यह फेल साबित हो रहा है।
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जलकल महाप्रबंधक अरुणेंद्र राजपूत ने बताया कि जल निगम नगरीय योजना से इन खामियों के आकलन और तकनीकी परीक्षण कराकर समस्या के समाधान के लिए सिफारिश की गई है। डीपीआर के आधार पर विस्तृत निरीक्षण की भी जरूरत बताई है ताकि हैंडओवर से पहले खामियों की पूरी जानकारी हो सके।
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गायब हो गए पानी के स्मार्ट मीटर
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कंपनी ने ताजगंज के 17,225 घरों में से 14,723 पर स्मार्ट वाटर मीटर लगाए थे, उनमें से लगभग 80 फीसदी मौके पर नहीं हैं। जो बचे हैं, बंद पड़े हैं। इसके अलावा, शहर के 6 प्रमुख वाटर टैंकों (जलाशयों) की सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए। यहां चहारदीवारी है और न ही गेट, जिससे कोई भी अज्ञात व्यक्ति टैंक पर चढ़ सकता है और 1993 जैसी जल त्रासदी दोहराई जा सकती है।

स्मार्ट सिटी जलापूर्ति योजना का यह है हाल
- ताजगंज में सीवर लाइन के मैनहोल के अंदर से पानी की लाइन बिछाई गई जो असुरक्षित है।
-17,225 वाटर मीटर में से 14,723 वाटर मीटर लगाए थे, जिनमें से 80 फीसदी गायब और खराब पड़े।
- जीवनी मंडी प्लांट पर तीन मोटरें पाइपलाइन से जुड़ी नहीं हैं। 6 में से केवल दो मोटरें चलती हैं।
- प्लांट के फ्लो मीटर खराब पड़े हैं। प्लांट पर भी स्काडा सिस्टम काम नहीं कर रहा है।
- स्काडा सिस्टम की जगह मैनुअल वाॅल्व लगाए, जिनसे स्काडा संचालित करना संभव ही नहीं है।
- जलाशय में 8 फीट पानी होने पर ही आपूर्ति संभव है। 1200 मिमी का पाइप इसी ऊंचाई पर लगाया है।
- ताजगंज में 150 हॉर्स पावर और 60 हॉर्स पावर की मोटरें खराब स्थिति में हैं।
- ताजगंज में जलाशय पर लगा स्काडा सिस्टम खराब है, जलापूर्ति की जानकारी नहीं हो पा रही है।
- छह जलाशयों के लिए बेहद कम क्षमता की मेन राइजिंग डाली गई, जिससे पानी भरने में मुश्किल।

दूषित पानी से संक्रमण के बढ़े मामले
- पर्यावरणविद और सुप्रीम कोर्ट में पानी मामलों के याचिकाकर्ता चिकित्सक डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि दूषित पानी से लिवर इंफेक्शन के मामले बढ़ गए हैं। इनमें बच्चों की संख्या काफी है। पानी की लाइनों में लीकेज के कारण दूषित पानी की आपूर्ति से डायरिया, पीलिया का खतरा कई गुना तक बढ़ा है।

सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि दूषित पानी पीने से डायरिया, टाइफाइड और पीलिया का खतरा अधिक है। इसमें उल्टी-दस्त, पेट में दर्द की परेशानी बनती है। दूषित पानी के नहाने से त्वचा की एलर्जी भी हो रही है। इससे खुजली, चकत्ते और अन्य परेशानी बनती हैं। ऐसे में खाने-पीने में शुद्ध पानी का उपयोग जरूरी है। परेशानी होने पर चिकित्सक को जरूर दिखाएं।

अमर उजाला असर

अमर उजाला असर

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