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सूख रहे धान को अब कुतरने लगे कीड़े
Updated Wed, 23 Aug 2017 12:14 AM IST
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मथुरा। बरसात न होने से सूख रहे धान को अब कीड़े कुतरने लगे हैं। ज्वार और बाजरा पर भी कीड़ों ने हमला कर दिया है। राया और मांट ब्लाक में सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है।
मथुरा में सूखे जैसे हालात हैं। धान की फसल चौपट हो रही है। जिनके पास सिंचाई के संसाधन हैं वह तो किसी तरह से फसल को बचाने में लगे हैं वरना बाकी किसान तो अपने सामने फसल को चौपट होते देख रहे हैं।
मांट से अलीगढ़ गोरई रोड किनारे बसे गांव आराखेड़ा, थना अमर सिंह, नीम गांव, गईजरा, बाढ़ोन, खरवा, अंदुवा, मगदा, नगला सिलिया, ढबोई और मूरजा गांवों में धान की फसल प्रभावित हो रही है। उप कृषि निदेशक शोध यतेंद्र सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों के साथ इन गांवों का दौरा करके फसलों को देखा। डा. यतेंद्र सिंह ने बताया कि धान की जड़ में कत्थई रंग का कीड़ा मिल रहा है। कीड़ा जड़ को खा रहा है। इससे धान की जड़ काली पड़ रही है और पौधे खराब हो रहे हैं। इस तरह का कीड़ा टिड्डा दल की तरह हमला कर फसल खराब कर रहा है। इसी तरह बाजरा व ज्वार में सफेद रंग की फंगस बन रही है।
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कम बरसात, बढ़ी उमस से बढ़ रहे कीड़े
मथुरा। उप कृषि निदेशक शोध डा. यतेंद्र सिंह बताते हैं कि कम बरसात और ज्यादा उमस के चलते इस तरह के कीड़े पनप रहे हैं। बताया कि अप्रैल से अब तक कुल 271 मिमी बरसात हुई है। यह सामान्य से 220 मिमी कम है। वहीं उमस अधिक रहने से ऐसे हालात बन रहे हैं।
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मथुरा में सूखे जैसे हालात हैं। धान की फसल चौपट हो रही है। जिनके पास सिंचाई के संसाधन हैं वह तो किसी तरह से फसल को बचाने में लगे हैं वरना बाकी किसान तो अपने सामने फसल को चौपट होते देख रहे हैं।
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मांट से अलीगढ़ गोरई रोड किनारे बसे गांव आराखेड़ा, थना अमर सिंह, नीम गांव, गईजरा, बाढ़ोन, खरवा, अंदुवा, मगदा, नगला सिलिया, ढबोई और मूरजा गांवों में धान की फसल प्रभावित हो रही है। उप कृषि निदेशक शोध यतेंद्र सिंह ने कृषि वैज्ञानिकों के साथ इन गांवों का दौरा करके फसलों को देखा। डा. यतेंद्र सिंह ने बताया कि धान की जड़ में कत्थई रंग का कीड़ा मिल रहा है। कीड़ा जड़ को खा रहा है। इससे धान की जड़ काली पड़ रही है और पौधे खराब हो रहे हैं। इस तरह का कीड़ा टिड्डा दल की तरह हमला कर फसल खराब कर रहा है। इसी तरह बाजरा व ज्वार में सफेद रंग की फंगस बन रही है।
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कम बरसात, बढ़ी उमस से बढ़ रहे कीड़े
मथुरा। उप कृषि निदेशक शोध डा. यतेंद्र सिंह बताते हैं कि कम बरसात और ज्यादा उमस के चलते इस तरह के कीड़े पनप रहे हैं। बताया कि अप्रैल से अब तक कुल 271 मिमी बरसात हुई है। यह सामान्य से 220 मिमी कम है। वहीं उमस अधिक रहने से ऐसे हालात बन रहे हैं।