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सांसद आदर्श गांव नहीं हो सका ओडीएफ
Updated Sat, 29 Sep 2018 11:17 PM IST
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मिरहची। जिले मेें ओडीएफ को लेकर तेजी से काम चल रहा है। मारहरा ब्लॉक को प्रशासन पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त घोषित करने का दावा कर रहा है, लेकिन ब्लॉक क्षेत्र में स्थित सांसद आदर्श गांव सूरतपुर माफी में शौचालय अधूरे पड़े हैं। इसके अलावा अन्य गांवों की हालत बदतर है।
पिछले साल सांसद राजवीरसिंह उर्फ राजू भैया ने विकासखंड के गांव सूरतपुर माफी को गोद लिया था। उस वक्त गांव के वाशिंदों की खुशी का ठिकाना नहीं था कि अब उनके गांव के विकास कार्यों को जरूर पंख लगेंगे, लेकिन गांव में इसका बिल्कुल उल्टा हुआ। सांसद ने एक बार भी मुड़कर गांव की ओर नहीं देखा। आलम यह हुआ कि गांव में ओडीएफ अभियान की भी हवा निकल गई। शौचालय आज भी अधूरे पड़े हैं और किश्तों के लिए ग्रामीण चक्कर काट रहे हैं।
कागजों में ओडीएफ हुआ मारहरा
विकासखंड मारहरा का चौथाई भाग भी ओडीएफ नहीं हुआ है, जबकि कागजों में इसे डेढ़ वर्ष पहले ही ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। अब जिले को आगामी दो अक्तूबर को पूरी तरह से ओडीएफ घोषित किए जाने की योजना बनाई जा रही है। ऐसे में सवाल है कि बिना विकासखंडों को ओडीएफ हुए, जिले को ओडीएफ कैसे घोषित किया जा सकता है?
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जिन्हैरा को मिल चुका है स्वच्छता पुरस्कार
ब्लॉक की एक और ग्राम पंचायत जिन्हैरा को शौच मुक्त होने पर शासन सेे एक लाख का चेक देकर पुरस्कृत भी किया जा चुका है। ग्राम पंचायत के लोगों ने शौचालयों का दस लाख अस्सी हजार रुपया तत्कालीन जिलाधिकारी अमित किशोर को सरकार के लिए वापस सौंपा था। गांव की स्वच्छता की हकीकत की पड़ताल विदेशी टीम भी कर चुकी है। जिसमें लंदन से आईं प्रोफेसर वावारा ईवंश, संयुक्त सचिव भारत सरकार राधा, स्वच्छ भारत मिशन की सलाहकर महिमा सिंह के साथ अलीगढ़ से उपनिदेशक पंचायत नंदनी जैन ने निरीक्षण किया। जिसमें अव्वल पाए जाने पर ग्राम प्रधान लक्ष्मी उपाध्याय के विकास कार्यों की लंदन में जाकर सराहना की गई। जो जिले के लिए स्वच्छता की मिसाल बन रही है।
गांव में सभी पात्रों को धनराशि मुहैया करा दी गई है। अगर कोई ग्रामीण वंचित रह गया है तो जानकारी करते हुए उसे भी धनराशि मुहैया करा दी जाएगी। अगर किसी ने धनराशि प्राप्त करने के बाद शौचालय का निर्माण नहीं किया है तो यह भी चेक किया जाएगा।
वीरेंद्र सिंह लोधी, विधायक मारहरा तथा सांसद प्रतिनिधि
अमरौली रतनपुर भी ओडीएफ नहीं
फर्रुखाबाद सांसद मुकेश राजपूत के गोद लिए गांव अमरौली रतनपुर का हाल भी कुछ ऐसा ही है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक गांव में 488 में से महज 481 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। जबकि हकीकत में तमाम शौचालय बने ही नहीं है। सांसद ने भी गांव को ओडीएफ करने को लेकर कोई सुध नहीं ली है।
प्रशासनिक अमला मदद नहीं कर रहा है। इसलिए गांव ओडीएफ घोषित नहीं हो पा रहा है। गांव में पानी की समस्या है। टैंक बनवा दिया गया है। मगर सप्लाई पूरे गांव में नहीं हो पा रही है। हालांकि धनराशि सभी के खातों में पहुंचवा दी गई है। सभी के शौचालय जल्द बन जाएंगे।
मुन्नाबाबू राजपूत, फर्रुखाबाद - सांसद प्रतिनिधि
जिले को ओडीएफ करने के साथ-साथ सांसद आदर्श गांवों पर प्राथमिकता से ध्यान दिया जा रहा है। गांवों में शौचालयों का निर्माण अंतिम चरण में है। इसे जल्द ओडीएफ किया जाएगा।
उग्रसेन पांडेय, सीडीओ
पिछले साल सांसद राजवीरसिंह उर्फ राजू भैया ने विकासखंड के गांव सूरतपुर माफी को गोद लिया था। उस वक्त गांव के वाशिंदों की खुशी का ठिकाना नहीं था कि अब उनके गांव के विकास कार्यों को जरूर पंख लगेंगे, लेकिन गांव में इसका बिल्कुल उल्टा हुआ। सांसद ने एक बार भी मुड़कर गांव की ओर नहीं देखा। आलम यह हुआ कि गांव में ओडीएफ अभियान की भी हवा निकल गई। शौचालय आज भी अधूरे पड़े हैं और किश्तों के लिए ग्रामीण चक्कर काट रहे हैं।
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कागजों में ओडीएफ हुआ मारहरा
विकासखंड मारहरा का चौथाई भाग भी ओडीएफ नहीं हुआ है, जबकि कागजों में इसे डेढ़ वर्ष पहले ही ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। अब जिले को आगामी दो अक्तूबर को पूरी तरह से ओडीएफ घोषित किए जाने की योजना बनाई जा रही है। ऐसे में सवाल है कि बिना विकासखंडों को ओडीएफ हुए, जिले को ओडीएफ कैसे घोषित किया जा सकता है?
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जिन्हैरा को मिल चुका है स्वच्छता पुरस्कार
ब्लॉक की एक और ग्राम पंचायत जिन्हैरा को शौच मुक्त होने पर शासन सेे एक लाख का चेक देकर पुरस्कृत भी किया जा चुका है। ग्राम पंचायत के लोगों ने शौचालयों का दस लाख अस्सी हजार रुपया तत्कालीन जिलाधिकारी अमित किशोर को सरकार के लिए वापस सौंपा था। गांव की स्वच्छता की हकीकत की पड़ताल विदेशी टीम भी कर चुकी है। जिसमें लंदन से आईं प्रोफेसर वावारा ईवंश, संयुक्त सचिव भारत सरकार राधा, स्वच्छ भारत मिशन की सलाहकर महिमा सिंह के साथ अलीगढ़ से उपनिदेशक पंचायत नंदनी जैन ने निरीक्षण किया। जिसमें अव्वल पाए जाने पर ग्राम प्रधान लक्ष्मी उपाध्याय के विकास कार्यों की लंदन में जाकर सराहना की गई। जो जिले के लिए स्वच्छता की मिसाल बन रही है।
गांव में सभी पात्रों को धनराशि मुहैया करा दी गई है। अगर कोई ग्रामीण वंचित रह गया है तो जानकारी करते हुए उसे भी धनराशि मुहैया करा दी जाएगी। अगर किसी ने धनराशि प्राप्त करने के बाद शौचालय का निर्माण नहीं किया है तो यह भी चेक किया जाएगा।
वीरेंद्र सिंह लोधी, विधायक मारहरा तथा सांसद प्रतिनिधि
अमरौली रतनपुर भी ओडीएफ नहीं
फर्रुखाबाद सांसद मुकेश राजपूत के गोद लिए गांव अमरौली रतनपुर का हाल भी कुछ ऐसा ही है। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक गांव में 488 में से महज 481 शौचालयों का निर्माण हो चुका है। जबकि हकीकत में तमाम शौचालय बने ही नहीं है। सांसद ने भी गांव को ओडीएफ करने को लेकर कोई सुध नहीं ली है।
प्रशासनिक अमला मदद नहीं कर रहा है। इसलिए गांव ओडीएफ घोषित नहीं हो पा रहा है। गांव में पानी की समस्या है। टैंक बनवा दिया गया है। मगर सप्लाई पूरे गांव में नहीं हो पा रही है। हालांकि धनराशि सभी के खातों में पहुंचवा दी गई है। सभी के शौचालय जल्द बन जाएंगे।
मुन्नाबाबू राजपूत, फर्रुखाबाद - सांसद प्रतिनिधि
जिले को ओडीएफ करने के साथ-साथ सांसद आदर्श गांवों पर प्राथमिकता से ध्यान दिया जा रहा है। गांवों में शौचालयों का निर्माण अंतिम चरण में है। इसे जल्द ओडीएफ किया जाएगा।
उग्रसेन पांडेय, सीडीओ