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श्रीराम आचार्य ने मथुरा से कियौ युग निर्माण कौ शंखनाद
Updated Thu, 05 Apr 2018 07:36 PM IST
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डैमो
- फोटो : डैमो
मथुरा। आध्यात्मिक द्वारा शांति और सद्भाव का संदेश देने वाले पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने मथुरा से ही युग निर्माण योजना का शंखनाद करते हुए गायत्री परिवार की स्थापना की थी। आज दुनिया के 87 देशों में यही गायत्री परिवार आध्यात्मिक संदेश दे रहा है।
आगरा के आंवलखेड़ा में वर्ष 1911 में जन्मे पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने पंडित मदन मोहन मालवीय से गायत्री मंत्र की दीक्षा लेने के बाद 1940 में मथुरा में डेरा डाल दिया था। बालकाल से ही गायत्री मंत्र की साधना करने वाले श्रीराम शर्मा ने अखंड ज्योति पत्रिका का प्रकाशन भी यहां से ही शुरू कर दिया। यहां जयसिंहपुरा में गायत्री तपोभूमि में रहकर ही गायत्री महाविद्या विश्व कोष का प्रकाशन किया। इसके बाद चार वेद, 18 पुराण और 108 उपनिषिद का अपनी भाषा में प्रकाशित किया। 1963 में उन्होंने युग निर्माण की 100 सूत्रीय योजना का उद्घोष किया। इसमें यज्ञ संचालन, गायत्री मंत्र लेखन, गायत्री साधना, जातिवाद सहित विभिन्न कुरीतियों के खिलाफ अभियान शामिल था।
युग निर्माण योजना के संपादक ईश्वर शरण पांडेय बताते हैं कि पहले समाज में प्रचारित था कि गायत्री मंत्र का जाप सिर्फ ब्राह्मण करेगा। महिलाएं गायत्री मंत्र का जाप नहीं करेंगी, लेकिन इन कुरीतियों को तोड़ा गया। इसी योजना को लेकर दुनिया के 87 देशों में गायत्री परिवार की शाखाएं स्थापित कीं। विभिन्न धर्म के लोगों को इनसे जोड़ा है। 20 जून 1971 को पंडित आचार्य मथुरा छोड़ हरिद्वार चले गए। यहां शांतिकुंज की स्थापना की। विज्ञान और आध्यात्मिक के समन्वय करते हुए गायत्री महाशास्त्र और यज्ञ विद्या पर अनुसंधान के लिए शोध संस्थान की स्थापना भी की। उनकी लिखी हुई 3032 पुस्तकें वर्तमान में उनके इस अभियान को गति दे रही हैं। गायत्री परिवार से जुडे़ अनिल कुमार पाठक बताते हैं कि देश में ही चार हजार से ज्यादा शाखाएं गायत्री परिवार की संचालित हो रही हैं।
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आगरा के आंवलखेड़ा में वर्ष 1911 में जन्मे पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने पंडित मदन मोहन मालवीय से गायत्री मंत्र की दीक्षा लेने के बाद 1940 में मथुरा में डेरा डाल दिया था। बालकाल से ही गायत्री मंत्र की साधना करने वाले श्रीराम शर्मा ने अखंड ज्योति पत्रिका का प्रकाशन भी यहां से ही शुरू कर दिया। यहां जयसिंहपुरा में गायत्री तपोभूमि में रहकर ही गायत्री महाविद्या विश्व कोष का प्रकाशन किया। इसके बाद चार वेद, 18 पुराण और 108 उपनिषिद का अपनी भाषा में प्रकाशित किया। 1963 में उन्होंने युग निर्माण की 100 सूत्रीय योजना का उद्घोष किया। इसमें यज्ञ संचालन, गायत्री मंत्र लेखन, गायत्री साधना, जातिवाद सहित विभिन्न कुरीतियों के खिलाफ अभियान शामिल था।
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युग निर्माण योजना के संपादक ईश्वर शरण पांडेय बताते हैं कि पहले समाज में प्रचारित था कि गायत्री मंत्र का जाप सिर्फ ब्राह्मण करेगा। महिलाएं गायत्री मंत्र का जाप नहीं करेंगी, लेकिन इन कुरीतियों को तोड़ा गया। इसी योजना को लेकर दुनिया के 87 देशों में गायत्री परिवार की शाखाएं स्थापित कीं। विभिन्न धर्म के लोगों को इनसे जोड़ा है। 20 जून 1971 को पंडित आचार्य मथुरा छोड़ हरिद्वार चले गए। यहां शांतिकुंज की स्थापना की। विज्ञान और आध्यात्मिक के समन्वय करते हुए गायत्री महाशास्त्र और यज्ञ विद्या पर अनुसंधान के लिए शोध संस्थान की स्थापना भी की। उनकी लिखी हुई 3032 पुस्तकें वर्तमान में उनके इस अभियान को गति दे रही हैं। गायत्री परिवार से जुडे़ अनिल कुमार पाठक बताते हैं कि देश में ही चार हजार से ज्यादा शाखाएं गायत्री परिवार की संचालित हो रही हैं।
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