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जनपद में 177 बच्चे टीबी रोग से ग्रसित
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कासगंज। जनपद में 14 वर्ष तक की आयु के 177 बच्चे टीबी रोग से ग्रसित हैं। बच्चे के शरीर में गांठ या गिल्ठी होने पर लापरवाही न बरतें यह टीबी हो सकती है। बच्चे को बुखार व दो सप्ताह से लगातार खांसी होने पर तुरंत चिकित्सक से जांच कराएं।
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. अतुल सारस्वत का कहना है कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। समय रहते अगर इसका उपचार हो जाए तो यह पूरी तरह से सही हो सकती है। भारत को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त बनाना है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उनके खान-पान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। टीबी और पोषण का बहुत गहरा नाता है। क्योंकि टीबी के दौरान पोषक तत्वों की आवश्यकता सामान्य दिनों से ज्यादा होती है। रोगी को उपचार के साथ पोषण युक्त भोजन दालें, अनाज, घी, दही, दूध, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, अंडा, मछली आदि भरपूर मात्रा में देना चाहिए। दवाइयों के साथ बेहतर आहार टीबी मरीज को जल्द से जल्द सही करने में सहायक होता है।
जिला कार्यक्रम समन्वयक धर्मेंद्र यादव ने बताया टीबी के लक्षणों का पता चलते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच जरूर कराएं, पुष्टि होने पर तुरंत उपचार शुरू करें। बीच में उपचार अधूरा न छोड़ें। छ: माह तक पूरा उपचार कराएं। मरीज को उपचार के दौरान निक्षय पोषण योजना के तहत प्रति माह 500 रुपये रोगी के खाते में बेहतर खानपान के लिए भेजे जाते हैं।
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जिला क्षय रोग अधिकारी डा. अतुल सारस्वत का कहना है कि टीबी लाइलाज बीमारी नहीं है। समय रहते अगर इसका उपचार हो जाए तो यह पूरी तरह से सही हो सकती है। भारत को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त बनाना है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उनके खान-पान पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। टीबी और पोषण का बहुत गहरा नाता है। क्योंकि टीबी के दौरान पोषक तत्वों की आवश्यकता सामान्य दिनों से ज्यादा होती है। रोगी को उपचार के साथ पोषण युक्त भोजन दालें, अनाज, घी, दही, दूध, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, अंडा, मछली आदि भरपूर मात्रा में देना चाहिए। दवाइयों के साथ बेहतर आहार टीबी मरीज को जल्द से जल्द सही करने में सहायक होता है।
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जिला कार्यक्रम समन्वयक धर्मेंद्र यादव ने बताया टीबी के लक्षणों का पता चलते ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच जरूर कराएं, पुष्टि होने पर तुरंत उपचार शुरू करें। बीच में उपचार अधूरा न छोड़ें। छ: माह तक पूरा उपचार कराएं। मरीज को उपचार के दौरान निक्षय पोषण योजना के तहत प्रति माह 500 रुपये रोगी के खाते में बेहतर खानपान के लिए भेजे जाते हैं।
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