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बिना कोच के हॉकी खिलाड़ी कैसे बनें ध्यानचंद

Fri, 22 Feb 2019 11:15 PM IST
Pavan kumar पवन कुमार
Updated Fri, 22 Feb 2019 11:15 PM IST
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बिना कोच के हॉकी खिलाड़ी कैसे बनें ध्यानचंद
hocky - फोटो : demo pic
मैनपुरी। एक तरफ जहां सरकार खेल को लेकर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। वहीं दूसरी तरफ खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षकों की तैनाती नहीं की जा रही है। जिले के युवा भी हॉकी के खेल में हाथ आजमाना चाहते हैं। वह भी मेजर ध्यानचंद की तरह खिलाड़ी बनना चाहते हैं, लेकिन उनकी अभ्यास पर ध्यान देकर उन्हें सही मार्गदर्शन देने वाला कोच ही जिले में नहीं है।
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जिले के 95 प्रतिशत विद्यालयों में हॉकी का प्रशिक्षक की नहीं है। इन विद्यालयों में हॉकी भी नहीं खेली जाती है। विद्यालय की तो बात छोड़ो नगर में पंडित जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम है, लेकिन यहां भी हॉकी का खेल नहीं खेला जाता है। इसका कारण है कि हॉकी का स्टेडियम में कोई कोच ही नहीं है।
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हॉकी का कोच न होने के कारण स्टेडियम में हॉकी ग्राउंड भी बदहाल हो गया है। वहीं हॉकी के लिए बना गोल कोर्ट भी बदहाल पड़ा है। यहां तक कि स्टेडियम में हॉकी खेलने के लिए स्थानीय खिलाड़ी भी नहीं आते हैं। इससे हॉकी का खेल जिले में दम तोड़ता जा रहा है।
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हॉकी की खेलकूद प्रतियोगिताओं के आयोजन को लेकर जिले में खानापूरी की जाती है। मेजर ध्यानचंद के जन्मदिवस व विभिन्न अवसरों पर आयोजित होने वाली हॉकी प्रतियोगिताओं में टीम तक नहीं पहुंचती है। ऐसे में क्रिकेट व वॉलीबाल के खिलाडिय़ों को ही हॉकी पकड़ा कर प्रतियोगिताओं की इतिश्री करा दी जाती है। अभी दो दिन पहले भी पंडित जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में हॉकी की प्रतियोगिता कराई गई, जिसमें क्रिकेट के खिलाड़ियों को शामिल कर खानापूरी करा दी गई।

हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है। इसके बावजूद खेल के प्रशिक्षण के लिए कोच की व्यवस्था नहीं है। यह बहुत ही चिंता का विषय है। कोच मिले तो निश्चित ही जिले से प्रतिभाएं निकलें।
आलोक यादव

हॉकी अब कहने मात्र के लिए राष्ट्रीय खेल रह गया है। राष्ट्रीय खेल की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। यदि यही हाल रहा तो जिले से हॉकी का नामोनिशान मिट जाएगा।
राहुल सरोज

ऐसा नहीं है कि जिले में हॉकी के खिलाड़ी नहीं है या फिर कोई हॉकी खेलना नहीं चाहता है। हॉकी की तरफ न तो शासन का ध्यान है और ना ही प्रशासन का। हॉकी का प्रशिक्षक मिले तो निश्चित ही जिले में हॉकी की खोई प्रतिभा का हासिल किया जा सकता है।

आनंद पासवान

हॉकी ऐसा खेल है जिसमें खिलाड़ी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग कर अपने जिले व देश का नाम रोशन कर सकता है। लेकिन जिले में कोई कोच न होने के कारण हॉकी की प्रतिभाएं पैदा ही नहीं हो पा रही हैं।
सारांश शर्मा
 
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