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निर्मल गांव में सड़क किनारे, गलियों में गंदगी ही गंदगी
Updated Sat, 09 Sep 2017 11:41 PM IST
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गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
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मैनपुरी। पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम आजाद की पहल पर जिले में निर्मल गांव के रूप में चयनित बेवर ब्लाक का गांव रामपुर सैदपुर आज उपेक्षा की शिकार है। गड्ढे में तब्दील रास्ते के अलावा हैंडपंप खराब पड़े हैं। शिकायतों के बाद भी आज ग्रामीणों की समस्याओं के निराकरण के लिए किसी भी अधिकारियों के पास कोई समय नहीं है।
बेवर से पांच किलोमीटर दूर स्थित इस ग्रामसभा की आबादी लगभग तीन हजार है। वर्ष 2009 में छह मंडलों के बीच यह इसे निर्मल गांव चयनित किया गया था। तत्कालीन ग्राम प्रधान अनीता देवी दिवाकर वर्तमान में भी प्रधान हैं। बता दें कि निर्मल गांव चयनित होने के बाद यहां के लोगों को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए शासन के प्रमुख सचिव, विशेष सचिव ने दौरा किया था।
बनारस से भी वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गांव आई थी। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी, आवास की समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए तत्कालीन डीएम दिनेश चंद्र शुक्ला के कई बार गांव जाकर शिकायतें सुनी। पर, वर्तमान सरकार में यह गांव उपेक्षित हो चुका है।
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नगला जाटवान निवासी श्रीकृष्ण जाटव के परिवार में 10 सदस्य हैं। पर, उनके राशनकार्ड में दो ही यूनिट हैं। भूमिहीन होने के बाद भी आवास न मिल पाने के कारण कच्चे मकान में ही पूरा परिवार रहता है। आवेदन के बाद भी पेंशन नहीं मिली है। चंद्रसेन जाटव के पास राशनकार्ड ही नहीं है।
कई बार आवेदन करने के बाद भी उनकी पेंशन स्वीकृत नहीं हो पाई है। वहीं नेत्रपाल बताते हैं कि उनकी समाजवादी पेंशन स्वीकृत की गई थी। कुछ महीनों तक पेंशन मिली। फिर अचानक बंद कर दी गई। धनपाल बताते हैं कि गांव में सफाईकर्मी नहीं आता है, वहीं पूजा कहती हैं सरकार बदली तो
रामपुर सैदपुर में एक लोक शिक्षा केंद्र है। यह केंद्र अक्सर बंद ही रहता है। एबीएसए बेवर, ब्लाक समन्वयक साक्षरता को निरीक्षण में केंद्र बंद मिल चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि जब निर्मल गांव था तो डर की वजह से केंद्र रोजाना समय से खुलता था। अब मनमानी हो रही है।
प्रधान अनीता देवी दिवाकर का कहना है कि गांव में नलों की कमी है। विधायक निधि से तीन नल लगवाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। अगस्त माह में ही खराब पड़े पांच हैंडपंप सही कराए गए हैं। राशनकार्ड तथा पेंशन की समस्या के संबंध में अधिकारियों से संपर्क किया है। आवेदकों को पात्रता के आधार पर राशनकार्ड तथा पेंशन दिलाई जाएगी।
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बेवर से पांच किलोमीटर दूर स्थित इस ग्रामसभा की आबादी लगभग तीन हजार है। वर्ष 2009 में छह मंडलों के बीच यह इसे निर्मल गांव चयनित किया गया था। तत्कालीन ग्राम प्रधान अनीता देवी दिवाकर वर्तमान में भी प्रधान हैं। बता दें कि निर्मल गांव चयनित होने के बाद यहां के लोगों को मूलभूत सुविधाएं देने के लिए शासन के प्रमुख सचिव, विशेष सचिव ने दौरा किया था।
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बनारस से भी वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गांव आई थी। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी, आवास की समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए तत्कालीन डीएम दिनेश चंद्र शुक्ला के कई बार गांव जाकर शिकायतें सुनी। पर, वर्तमान सरकार में यह गांव उपेक्षित हो चुका है।
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नगला जाटवान निवासी श्रीकृष्ण जाटव के परिवार में 10 सदस्य हैं। पर, उनके राशनकार्ड में दो ही यूनिट हैं। भूमिहीन होने के बाद भी आवास न मिल पाने के कारण कच्चे मकान में ही पूरा परिवार रहता है। आवेदन के बाद भी पेंशन नहीं मिली है। चंद्रसेन जाटव के पास राशनकार्ड ही नहीं है।
कई बार आवेदन करने के बाद भी उनकी पेंशन स्वीकृत नहीं हो पाई है। वहीं नेत्रपाल बताते हैं कि उनकी समाजवादी पेंशन स्वीकृत की गई थी। कुछ महीनों तक पेंशन मिली। फिर अचानक बंद कर दी गई। धनपाल बताते हैं कि गांव में सफाईकर्मी नहीं आता है, वहीं पूजा कहती हैं सरकार बदली तो
रामपुर सैदपुर में एक लोक शिक्षा केंद्र है। यह केंद्र अक्सर बंद ही रहता है। एबीएसए बेवर, ब्लाक समन्वयक साक्षरता को निरीक्षण में केंद्र बंद मिल चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि जब निर्मल गांव था तो डर की वजह से केंद्र रोजाना समय से खुलता था। अब मनमानी हो रही है।
प्रधान अनीता देवी दिवाकर का कहना है कि गांव में नलों की कमी है। विधायक निधि से तीन नल लगवाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। अगस्त माह में ही खराब पड़े पांच हैंडपंप सही कराए गए हैं। राशनकार्ड तथा पेंशन की समस्या के संबंध में अधिकारियों से संपर्क किया है। आवेदकों को पात्रता के आधार पर राशनकार्ड तथा पेंशन दिलाई जाएगी।