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हड़ताल पर डाक्टर, इलाज को भटके मरीज
Updated Tue, 06 Jun 2017 11:27 PM IST
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फिरोजाबाद।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर चिकित्सकों ने हड़ताल कर दी। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी गंभीर मरीजों को उठानी पड़ी। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हो गया।
डाक्टरों की हड़ताल से मरीजों को खसी परेशानी का सामना करना पड़ा। डाक्टरों ने मरीजों को देखने से इंकार कर दिया, इस कारण बहुत से मरीज कराहते नजर आए।
सुबह 9:30 बजे छिंगामल बाग स्थित डा. अपूर्व चतुर्वेदी के क्लीनिक के सामने दर्जनों मरीज बैठे नजर आए। एक मरीज फतेहाबाद से लाया गया, जो चार पहिया वाहन में दर्द से तड़पता रहा लेकिन किसी ने उसका इलाज नहीं किया। ओम हास्पिटल में प्रसव के लिए एक महिला आई, मगर डाक्टर के क्लीनिक पर न बैठने की जानकारी पर परिवारीजन उसे महिला अस्पताल ले गए।
जिला अस्पताल के सामने हड्डी विशेषज्ञ के क्लीनिक पर फ्रेक्चर सही कराने को एक मरीज आया लेकिन डाक्टर न होने के कारण मरीज को वापस ले जाना पड़ा। सेवार्थ संस्थान ट्रामा सेंटर की ओपीडी बंद दी। मरीज अल्ट्रासाउंड एवं ब्लड रिपोर्ट लेकर पहुंचे। जिन मरीजों के आपरेशन होने थे, उन्हें आगे के लिए टाल दिया। आईएमए के पदाधिकारी दिल्ली आंदोलन में हिस्सा लेने पहुंचे।
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मेडिकल स्टोर से दवा लेकर चलाया काम
फिरोजाबाद। बीमारियाें का मौसम चल रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को होती है। डायरिया, उल्टी दस्त आदि से पीड़ित मरीज थे। चिकित्सक क्लीनिक पर नहीं बैठे तो अभिभावकों ने बच्चों के लिए मेडिकल स्टोर से दवा ली।
जिला अस्पताल में बढ़ी भीड़
फिरोजाबाद। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ। इधर-उधर भटकने के बाद लोग मरीजों को ट्रामा सेंटर में इलाज कराने के लिए लाए। वहीं, जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या 1150 के करीब रही।
चिकित्सकों की प्रमुख मांगे
फिरोजाबाद। डाक्टर एवं मेडिकल सेक्टर्स पर हिंसा मारपीट एवं तोड़फोड़ के खिलाफ सख्त कानून पार्लियामेंट में बनाया जाए। डाक्टर एवं चिकित्सकों के रजिस्ट्रेशन एकल विंडो से किया जाए और लाइसेंस राज समाप्त किया जाए। केवल जेनेरिक दवाओं को लिखने की बाध्यता न हो। उन्होंने कहा कि सरकार दवा कंपनियों पर लगाम लगाए न की चिकित्सकों पर। झोलाछापों के खिलाफ अभियान चलाया जाए। सरकारी कर्मचारियों से आईएमए के सदस्यों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
सुनिए मरीजों के परिजनों का दर्द
- पटीकरा से आए मोहसिन ने कहा कि उनके भाई को पेट दर्द की वजह से चिल्ला रहा है, लेकिन हड़ताल के कारण चिकित्सक नहीं बैठे हैं। इससे परेशानी का सामना करना पड़ा।
राम नगर से आई मुन्नी देवी का कहना है कि पुत्र बधु के आपरेशन होना है। कई नर्सिंग होम में गए लेकिन कहीं कोई डाक्टर नहीं मिले, इससे परेशानी हुई।
- हनुमानगंज से आई मीना अग्रवाल का कहना है कि उनके बेटे को डायरिया है। मेडिकल से दवा लेकर खिलाई, कोई आराम नहीं है।
क्या कहते हैं आईएमए के पदाधिकारी
आईएमए अध्यक्ष डा. वीपी कौशिक का कहना है कि चिकित्सकों पर हमले बढ़ रहे हैं। चिकित्सक अपनी सुरक्षा को देखते हुए कड़ा कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। वहीं, जेनेरिक दवाएं लिखने का दबाव बनाने के लिए आदेश दिया जा रहा है, सरकार को चाहिए कि दवा कंपनियों पर लगाम लगाएं।
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इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर चिकित्सकों ने हड़ताल कर दी। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी गंभीर मरीजों को उठानी पड़ी। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हो गया।
डाक्टरों की हड़ताल से मरीजों को खसी परेशानी का सामना करना पड़ा। डाक्टरों ने मरीजों को देखने से इंकार कर दिया, इस कारण बहुत से मरीज कराहते नजर आए।
सुबह 9:30 बजे छिंगामल बाग स्थित डा. अपूर्व चतुर्वेदी के क्लीनिक के सामने दर्जनों मरीज बैठे नजर आए। एक मरीज फतेहाबाद से लाया गया, जो चार पहिया वाहन में दर्द से तड़पता रहा लेकिन किसी ने उसका इलाज नहीं किया। ओम हास्पिटल में प्रसव के लिए एक महिला आई, मगर डाक्टर के क्लीनिक पर न बैठने की जानकारी पर परिवारीजन उसे महिला अस्पताल ले गए।
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जिला अस्पताल के सामने हड्डी विशेषज्ञ के क्लीनिक पर फ्रेक्चर सही कराने को एक मरीज आया लेकिन डाक्टर न होने के कारण मरीज को वापस ले जाना पड़ा। सेवार्थ संस्थान ट्रामा सेंटर की ओपीडी बंद दी। मरीज अल्ट्रासाउंड एवं ब्लड रिपोर्ट लेकर पहुंचे। जिन मरीजों के आपरेशन होने थे, उन्हें आगे के लिए टाल दिया। आईएमए के पदाधिकारी दिल्ली आंदोलन में हिस्सा लेने पहुंचे।
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मेडिकल स्टोर से दवा लेकर चलाया काम
फिरोजाबाद। बीमारियाें का मौसम चल रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को होती है। डायरिया, उल्टी दस्त आदि से पीड़ित मरीज थे। चिकित्सक क्लीनिक पर नहीं बैठे तो अभिभावकों ने बच्चों के लिए मेडिकल स्टोर से दवा ली।
जिला अस्पताल में बढ़ी भीड़
फिरोजाबाद। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ। इधर-उधर भटकने के बाद लोग मरीजों को ट्रामा सेंटर में इलाज कराने के लिए लाए। वहीं, जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या 1150 के करीब रही।
चिकित्सकों की प्रमुख मांगे
फिरोजाबाद। डाक्टर एवं मेडिकल सेक्टर्स पर हिंसा मारपीट एवं तोड़फोड़ के खिलाफ सख्त कानून पार्लियामेंट में बनाया जाए। डाक्टर एवं चिकित्सकों के रजिस्ट्रेशन एकल विंडो से किया जाए और लाइसेंस राज समाप्त किया जाए। केवल जेनेरिक दवाओं को लिखने की बाध्यता न हो। उन्होंने कहा कि सरकार दवा कंपनियों पर लगाम लगाए न की चिकित्सकों पर। झोलाछापों के खिलाफ अभियान चलाया जाए। सरकारी कर्मचारियों से आईएमए के सदस्यों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
सुनिए मरीजों के परिजनों का दर्द
- पटीकरा से आए मोहसिन ने कहा कि उनके भाई को पेट दर्द की वजह से चिल्ला रहा है, लेकिन हड़ताल के कारण चिकित्सक नहीं बैठे हैं। इससे परेशानी का सामना करना पड़ा।
राम नगर से आई मुन्नी देवी का कहना है कि पुत्र बधु के आपरेशन होना है। कई नर्सिंग होम में गए लेकिन कहीं कोई डाक्टर नहीं मिले, इससे परेशानी हुई।
- हनुमानगंज से आई मीना अग्रवाल का कहना है कि उनके बेटे को डायरिया है। मेडिकल से दवा लेकर खिलाई, कोई आराम नहीं है।
क्या कहते हैं आईएमए के पदाधिकारी
आईएमए अध्यक्ष डा. वीपी कौशिक का कहना है कि चिकित्सकों पर हमले बढ़ रहे हैं। चिकित्सक अपनी सुरक्षा को देखते हुए कड़ा कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। वहीं, जेनेरिक दवाएं लिखने का दबाव बनाने के लिए आदेश दिया जा रहा है, सरकार को चाहिए कि दवा कंपनियों पर लगाम लगाएं।