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विवि के 14 बाबुओं पर गिरफ्तारी की तलवार
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Thu, 06 Aug 2015 01:38 AM IST
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डा. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के फर्जी डिग्री घोटाले में 14 बाबुओं पर गिरफ्तारी की तलवार लटकी हुई है। शक है कि इन्होंने फर्जी डिग्रियों को असली साबित करने के लिए गोपनीय चार्ट में विवरण दर्ज किया। एसआईटी की जांच में चार्ट पर इनके हस्ताक्षर पाए गए थे। अब इनकी लिखावट के साथ हस्ताक्षरों के मिलान की फोरेंसिक रिपोर्ट आने का इंतजार है।
डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय से जिन अभ्यर्थियों को मार्क्सशीट जारी होती है, उनका रिकार्ड गोपनीय चार्ट रखा जाता है। इसके अलावा मार्क्सशीट का एक रिकार्ड उस कॉलेज में भी रहता है, जहां अभ्यर्थी ने पढ़ाई की हो। बीएड की हजारों फर्जी मार्क्सशीट की जांच के दौरान एसआईटी ने पाया कि इनका रिकार्ड न विवि में है, न कालेज में, लेकिन गोपनीय चार्ट में उन छात्राें के नाम दर्ज हैं, जिनकी फर्जी मार्क्सशीट बनी है।
बाबुओं की गर्दन क्यों फंसी
गोपनीय चार्ट रूम में बाबुओं की ड्यूटी तो लगी है, लेकिन उनके नाम से जिम्मेदारी तय नहीं मिली। गोपनीय चार्ट पर अलग-अलग 14 बाबुओं के हस्ताक्षर हैं। कई ने फर्जी हस्ताक्षर भी कर रखे हैं।फोरेंसिक लैब के सूत्रों का कहना है कि परीक्षण सिर्फ हस्ताक्षर मिलान का नहीं, लिखावट का भी होता है। अगर किसी बाबू ने अपनी जगह किसी और के हस्ताक्षर किए हैं, तो भी वह बच नहीं पाएगा।
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असली मार्क्सशीट में भी फर्जीवाड़ा
एसआईटी में शामिल रहे उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि हजारों की संख्या में ऐसी मार्क्सशीट मिली हैं, जिनका कॉलेज में भी रिकार्ड है और विवि में भी, लेकिन ये जिन अभ्यर्थियों की हैं, वे परीक्षा में गैरहाजिर रहे। इनकी मार्क्सशीट विवि ने ही जारी की, लेकिन फर्जीवाड़ा करके। इस घोटाले में आगरा रेंज पुलिस कीएसआईटी पहले जांच कर चुकी है। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर नई एसआईटी गठित की गई। इसमें लखनऊ के अधिकारी हैं। इस टीम को अपनी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट के सामने पेश करनी है।
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डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय से जिन अभ्यर्थियों को मार्क्सशीट जारी होती है, उनका रिकार्ड गोपनीय चार्ट रखा जाता है। इसके अलावा मार्क्सशीट का एक रिकार्ड उस कॉलेज में भी रहता है, जहां अभ्यर्थी ने पढ़ाई की हो। बीएड की हजारों फर्जी मार्क्सशीट की जांच के दौरान एसआईटी ने पाया कि इनका रिकार्ड न विवि में है, न कालेज में, लेकिन गोपनीय चार्ट में उन छात्राें के नाम दर्ज हैं, जिनकी फर्जी मार्क्सशीट बनी है।
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बाबुओं की गर्दन क्यों फंसी
गोपनीय चार्ट रूम में बाबुओं की ड्यूटी तो लगी है, लेकिन उनके नाम से जिम्मेदारी तय नहीं मिली। गोपनीय चार्ट पर अलग-अलग 14 बाबुओं के हस्ताक्षर हैं। कई ने फर्जी हस्ताक्षर भी कर रखे हैं।फोरेंसिक लैब के सूत्रों का कहना है कि परीक्षण सिर्फ हस्ताक्षर मिलान का नहीं, लिखावट का भी होता है। अगर किसी बाबू ने अपनी जगह किसी और के हस्ताक्षर किए हैं, तो भी वह बच नहीं पाएगा।
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असली मार्क्सशीट में भी फर्जीवाड़ा
एसआईटी में शामिल रहे उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि हजारों की संख्या में ऐसी मार्क्सशीट मिली हैं, जिनका कॉलेज में भी रिकार्ड है और विवि में भी, लेकिन ये जिन अभ्यर्थियों की हैं, वे परीक्षा में गैरहाजिर रहे। इनकी मार्क्सशीट विवि ने ही जारी की, लेकिन फर्जीवाड़ा करके। इस घोटाले में आगरा रेंज पुलिस कीएसआईटी पहले जांच कर चुकी है। इसके बाद हाईकोर्ट के आदेश पर नई एसआईटी गठित की गई। इसमें लखनऊ के अधिकारी हैं। इस टीम को अपनी जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट के सामने पेश करनी है।