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संवेदनहीनताः बेटे के इलाज के लिए रात भर अस्पतालों में भटकता रहा...नहीं बची जान

Sun, 26 Apr 2020 09:42 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 26 Apr 2020 09:42 AM IST
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12 year old sick boy dies due to not getting treatment in agra
निहाल का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
यह संवेदनहीनता की दर्दनाक दास्तान है। छीपीटोला के औलिया रोड निवासी जूता कारीगर लाखन अपने 12 वर्षीय बेटे निहाल को पेट दर्द होने पर रात भर अस्पताल-दर-अस्पताल भटकता रहा लेकिन कहीं उसे उपचार नहीं मिला।
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अंततः शनिवार सुबह सात बजे उसकी मौत हो गई। शुक्रवार रात निहाल के पेट में दर्द होने पर परिजन रातभर उसे निजी अस्पताल और एसएन मेडिकल कॉलेज लेकर गए लेकिन किसी ने उसे भर्ती नहीं किया। वे घर ले आए, सुबह तबीयत बिगड़ने पर एसएन ले गए जहां चिकित्सकों ने उसे मृत बता दिया। 
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...तो बच जाता 
लाखन ने बताया कि जब दिल्ली रोड स्थित दो निजी अस्पताल ने बेटे को भर्ती नहीं किया तो वे एसएन ले गए। वहां डॉक्टर ने कहा कि वे सिर्फ कोरोना वार्ड में भर्ती कर सकते हैं। अन्य कोई मरीज नहीं देखेंगे। इस पर वह बेटे को घर ले गए।
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एडीएम वित्त को फोन मिलाया। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी का नंबर दे दिया। उन्हें फोन करते रहे, उन्होंने फोन नहीं उठाया। अगर उनके बेटे को उपचार मिलता तो उसकी जान न जाती। 
 

नब्ज तक नहीं देखी
अपने 12 साल के बेटे निहाल को लेकर उसके पिता लाखन और अन्य परिजन सात घंटे तक एसएन सहित अस्पताल दर अस्पताल भटकते रहे। लेकिन किसी ने भर्ती नहीं किया। डीएम की सूची में शामिल चिह्नित अस्पतालों ने भी इलाज से इनकार कर दिया।

एसएन अस्पताल लेकर गए लेकिन वहां भी भर्ती नहीं किया गया। आखिरकार मासूम ने दम तोड़ दिया। बच्चे के पिता लाखन ने बताया कि उसे सात अस्पतालों में ले गए लेकिन किसी ने नब्ज तक नहीं देखी। हर प्राइवेट हॉस्पिटल से एक ही जवाब मिला, इसे एसएन ले जाओ। आखिरकार एसएन लेकर गए पर वहां भी भर्ती नहीं किया गया। आखिर उसने दम तोड़ दिया।

लाखन ने बताया कि उनके घर के पास भी अस्पताल  हैं, लेकिन ये बन्द हैं। इसलिये वे उन अस्पताल में गए, जिनकी सूची डीएम ने जारी की थी। वे दिल्ली रोड पर सिनर्जी, रेनबो हॉस्पिटल में गए। इसके बाद देहली गेट पर पुष्पांजलि में गए। पुष्पांजलि से जीवन  ज्योति हॉस्पिटल गए। सब जगह एक ही जवाब मिला, एसएन जाओ।

रात में एक बजे एसएन पहुंचे। वहां डॉक्टर आए। वे बोले, इसे सिर्फ कोरोना वार्ड में भर्ती किया जा सकता है, अन्य रोगों के उपचार की व्यवस्था इस समय नहीं है। लाखन ने बताया कि बच्चे को पेट दर्द था, उसे कोरोना मरीजों के बीच रखने में खतरा लगा, इसलिए घर ले गए। सुबह तबीयत बिगड़ने पर सात बजे फिर से एसएन ले गए। वहां डॉक्टरों ने मृत बताया। 

इलाज से इनकार पर एफआईआर की दी थी चेतावनी इलाज न होने के कारण चार मौतों के बाद डीएम ने शुक्रवार को चिह्नित अस्पतालों को इलाज से इनकार करने पर एफआईआर की चेतावनी दी थी। फिर भी अस्पतालों ने इलाज से इनकार करते हुए मरीज को एसएन में इलाज के लिए बोलकर टहला दिया।

पढ़ाई में होशियार था निहाल
निहाल छीपीटोला के बाल विद्या मंदिर में पांचवीं कक्षा का छात्र था। पढ़ाई में होशियार था । लाखन की तीन बेटियों और दो बेटों में वह सबसे छोटा था।

इमरजेंसी सेवा के निर्देश
 निजी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवा शुरू करने के शासन के निर्देश दिए हैं। इसके लिए अस्पतालों को गाइड लाइन भी जारी की है, जिन अस्पतालों से मरीजों को लौटाया गया है, उसकी रिपोर्ट बनाकर डीएम को सौंपेंगे। - डॉ. मुकेश वत्स, मुख्य चिकित्सा अधिकारी 

इनकार पर होगी कार्रवाई
मरीज भर्ती न करने पर पीड़ितों के बयान दर्ज कर अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, इसके लिए जांच भी कराई जा रही है। शासन के तय सुरक्षा मानकों का अमल में लाते हुए इमरजेंसी सेवाएं देना जरूरी है। - प्रभु नारायण सिंह, डीएम
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