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एनजीटी ने घाटों से निर्माण सामग्री हटाने के निर्देश दिए
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वृंदावन (मथुरा)। क्षेत्र में यमुना किनारे के घाटों का सौंदर्यीकरण उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कराया जा रहा है। इस परियोजना को एनजीटी ने रोकने के साथ-साथ यमुना के तटवर्ती क्षेत्रों से निर्माण सामग्री हटाने के निर्देश दिए हैं।
सोमवार को याचिकाकर्ता आकाश वशिष्ठ द्वारा 2016 में दायर वाद की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रघुवेंद्र सिंह राठौर और विशेषज्ञ सदस्य सत्यवान एस गब्रयाल ने यह आदेश दिया है। इस आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यमुना रिवर फ्रंट से निर्माण सामग्री हटाने का आदेश दिया गया है।
एनजीटी ने कहा कि भूमिगत जल इंटरसेप्टर ड्रेन प्रोजेक्ट और रिवर फ्रंट परियोजना का काम टीटीजेड अथॉरिटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनापत्ति के बिना नहीं चल सकते। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर सेे पेश अधिवक्ता प्रदीप मिश्रा ने दलील देते हुए कहा कि परियोजना के लिए अनुमति इस शर्त पर प्रदान की गई थी कि कार्यदायी संस्था टीटीजेड अथॉरिटी से भी एनओसी प्राप्त कर लेंगे।
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ऐसा न होने पर एनजीटी ने अपील को निष्पादित करते हुए सामग्री हटाकर काम बंद करने का आदेश दिया है। वहीं, एनजीटी ने याचिकाकर्ता के लिए अनापत्ति के खिलाफ चुनौती प्रस्तुत करने का विकल्प भी खुला रखा।
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सोमवार को याचिकाकर्ता आकाश वशिष्ठ द्वारा 2016 में दायर वाद की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रघुवेंद्र सिंह राठौर और विशेषज्ञ सदस्य सत्यवान एस गब्रयाल ने यह आदेश दिया है। इस आदेश में उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को यमुना रिवर फ्रंट से निर्माण सामग्री हटाने का आदेश दिया गया है।
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एनजीटी ने कहा कि भूमिगत जल इंटरसेप्टर ड्रेन प्रोजेक्ट और रिवर फ्रंट परियोजना का काम टीटीजेड अथॉरिटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनापत्ति के बिना नहीं चल सकते। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर सेे पेश अधिवक्ता प्रदीप मिश्रा ने दलील देते हुए कहा कि परियोजना के लिए अनुमति इस शर्त पर प्रदान की गई थी कि कार्यदायी संस्था टीटीजेड अथॉरिटी से भी एनओसी प्राप्त कर लेंगे।
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ऐसा न होने पर एनजीटी ने अपील को निष्पादित करते हुए सामग्री हटाकर काम बंद करने का आदेश दिया है। वहीं, एनजीटी ने याचिकाकर्ता के लिए अनापत्ति के खिलाफ चुनौती प्रस्तुत करने का विकल्प भी खुला रखा।