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बाढ़ की वजह से सड़क पर खाना बनाने को मजबूर हैं लोग
amar ujala bureau
Updated Sun, 13 Aug 2017 11:12 PM IST
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बाढ़
- फोटो : amar ujala
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कासगंज।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में एक सप्ताह बाद भी राहत नहीं मिल पा रही। ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का पानी से जनजीवन अस्त व्यस्त है। फसलें जलमग्न हैं। पशुओं को चारा नहीं है। कई लोग सड़क पर रहने को मजबूर हैं। रविवार को कछला ब्रिज पर जलस्तर पांच सेमी और बढ़ गया।
गौरतलब है कि गंगा में रविवार को नरौरा बैराज से 194077 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज बना रहा। कछला ब्रिज पर गेज 163.75 के निशान पर जा पहुंचा, हालांकि बिजनौर पर पानी के डिस्चार्ज में करीब 20 हजार क्यूसेक की कमी आई है। हरिद्वार से भी 5 हजार क्यूसेक पानी की कमी हुई है। ऐसे में आज जलस्तर में कुछ गिरावट की उम्मीद है, लेकिन इससे प्रभावित इलाकों में मुसीबतें कम होने के आसार नहीं हैं। किलौनी, किसौल, देवकली, नगला जयकिशन, नगला हंशी, सनौड़ी सिहिमन, नरदौली, राजेपुर कुर्रा, मेहोला, कादरगंज, सुन्नगढ़ी, नगला टिकुड़ी, नगला मेहरी, गठैरा, नगला खिमाई, पनसोती, जिझौल, हिम्मतनगर, बझेरा सहित कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
बमनपुरा गांव के कुछ परिवार बाढ़ की वजह से सड़क पर रह रहे हैं और सड़क पर ही खाना बनाने को मजबूर हैं। ग्रामीण नन्नू सिंह ने बताया कि उनका कच्चा मकान पूरी तरह पानी में घिर गया है, उसके गिरने का खतरा है। इस वजह से वे सड़क पर रह रहे हैं। बाढ़ की वजह से वायरल बुखार, संक्रमण का असर होने लगा है, तो वहीं पशुओं में भी खुरपका एवं मुंहपका जैसे संक्रामक रोग फैल रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की नींद अब भी नहीं टूटी है। आवागमन के लिए नाव ही लोगों का सहारा है।
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सिंचाईं विभाग के सहायक बाढ़ प्रभारी एके सिंह का कहना है कि कछला ब्रिज पर 5 सेंटीमीटर का जलस्तर बढ़ा है। बिजनौर और हरिद्धार में ही डिस्चार्ज कम हुआ है। जिससे पानी कम होने की उम्मीद की जा रही है।
डिस्चार्ज-
नरौरा से 194077 क्यूसेक
बिजनौर से 98076 क्यूसेक
हरिद्वार से 54516 क्यूसेक
कछला गेज 163.75 के निशान पर
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बाढ़ प्रभावित इलाकों में एक सप्ताह बाद भी राहत नहीं मिल पा रही। ग्रामीण इलाकों में बाढ़ का पानी से जनजीवन अस्त व्यस्त है। फसलें जलमग्न हैं। पशुओं को चारा नहीं है। कई लोग सड़क पर रहने को मजबूर हैं। रविवार को कछला ब्रिज पर जलस्तर पांच सेमी और बढ़ गया।
गौरतलब है कि गंगा में रविवार को नरौरा बैराज से 194077 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज बना रहा। कछला ब्रिज पर गेज 163.75 के निशान पर जा पहुंचा, हालांकि बिजनौर पर पानी के डिस्चार्ज में करीब 20 हजार क्यूसेक की कमी आई है। हरिद्वार से भी 5 हजार क्यूसेक पानी की कमी हुई है। ऐसे में आज जलस्तर में कुछ गिरावट की उम्मीद है, लेकिन इससे प्रभावित इलाकों में मुसीबतें कम होने के आसार नहीं हैं। किलौनी, किसौल, देवकली, नगला जयकिशन, नगला हंशी, सनौड़ी सिहिमन, नरदौली, राजेपुर कुर्रा, मेहोला, कादरगंज, सुन्नगढ़ी, नगला टिकुड़ी, नगला मेहरी, गठैरा, नगला खिमाई, पनसोती, जिझौल, हिम्मतनगर, बझेरा सहित कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
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बमनपुरा गांव के कुछ परिवार बाढ़ की वजह से सड़क पर रह रहे हैं और सड़क पर ही खाना बनाने को मजबूर हैं। ग्रामीण नन्नू सिंह ने बताया कि उनका कच्चा मकान पूरी तरह पानी में घिर गया है, उसके गिरने का खतरा है। इस वजह से वे सड़क पर रह रहे हैं। बाढ़ की वजह से वायरल बुखार, संक्रमण का असर होने लगा है, तो वहीं पशुओं में भी खुरपका एवं मुंहपका जैसे संक्रामक रोग फैल रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग की नींद अब भी नहीं टूटी है। आवागमन के लिए नाव ही लोगों का सहारा है।
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सिंचाईं विभाग के सहायक बाढ़ प्रभारी एके सिंह का कहना है कि कछला ब्रिज पर 5 सेंटीमीटर का जलस्तर बढ़ा है। बिजनौर और हरिद्धार में ही डिस्चार्ज कम हुआ है। जिससे पानी कम होने की उम्मीद की जा रही है।
डिस्चार्ज-
नरौरा से 194077 क्यूसेक
बिजनौर से 98076 क्यूसेक
हरिद्वार से 54516 क्यूसेक
कछला गेज 163.75 के निशान पर