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यमुना नदी का जलस्तर तीन फुट तक बढ़ा
Updated Sun, 09 Jul 2017 01:39 AM IST
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आगरा। पहाड़ों पर हो रही बारिश की वजह से यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। जीवनी मंडी वाटर वर्क्स पर यमुना नदी स्तर करीब 483 फुट पहुंच गया है। पानी की साथ आ रही जलकुंभी और मिट्टी की वजह से जल शोधन में दिक्कत हो रही है।
जलकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बारिश की वजह से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, इस वजह से बैराजों से पानी का डिस्चार्ज बढ़ गया है। गोकुल बैराज से प्रतिदिन करीब 5500 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। इसकी वजह से शहर की यमुना नदी में जलस्तर बढ़ गया है। पानी के साथ जलकुंभी भी बड़ी मात्रा में आ रही है। हथिनीकुंड, ओखला और गोकुल बैराज की मिट्टी भी पानी में आ रही है। इसकी वजह से जीवनी मंडी वाटर वर्क्स के ट्रीटमेंट प्लांट के फिल्टर चौक हो रहे हैं। जलकल विभाग के कर्मचारी जलकुंभी को रोकने के लिए जाल का सहारा ले रहे हैं लेकिन उसके बाद भी जलकुंभी फिल्टर तक पहुंच जाती है। एक बार फिल्टर साफ करने में कम से कम दो घंटे का समय खराब होता है। इसकी वजह से जलशोधन की क्षमता प्रभावित हो रही है।
जलकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जलकुंभी बैराजों में रुके हुआ पानी की वजह से आ रही है। अधिकांश जलकुंभी निकल चुकी है, एक दो दिन में जलकुंभी आना बंद हो जाएगा। पानी की गुणवत्ता भी ठीक होगी लेकिन मिट्टी की मात्रा की बढ़ जाएगी।
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जलकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बारिश की वजह से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, इस वजह से बैराजों से पानी का डिस्चार्ज बढ़ गया है। गोकुल बैराज से प्रतिदिन करीब 5500 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। इसकी वजह से शहर की यमुना नदी में जलस्तर बढ़ गया है। पानी के साथ जलकुंभी भी बड़ी मात्रा में आ रही है। हथिनीकुंड, ओखला और गोकुल बैराज की मिट्टी भी पानी में आ रही है। इसकी वजह से जीवनी मंडी वाटर वर्क्स के ट्रीटमेंट प्लांट के फिल्टर चौक हो रहे हैं। जलकल विभाग के कर्मचारी जलकुंभी को रोकने के लिए जाल का सहारा ले रहे हैं लेकिन उसके बाद भी जलकुंभी फिल्टर तक पहुंच जाती है। एक बार फिल्टर साफ करने में कम से कम दो घंटे का समय खराब होता है। इसकी वजह से जलशोधन की क्षमता प्रभावित हो रही है।
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जलकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जलकुंभी बैराजों में रुके हुआ पानी की वजह से आ रही है। अधिकांश जलकुंभी निकल चुकी है, एक दो दिन में जलकुंभी आना बंद हो जाएगा। पानी की गुणवत्ता भी ठीक होगी लेकिन मिट्टी की मात्रा की बढ़ जाएगी।
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