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अमौसी के 9 गावों में सीमा खींचेगा रक्षा मंत्रालय
Lucknow
Updated Sun, 16 Jun 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। वर्षों से लावारिस हालत में पड़ी बेशकीमती जमीनों की सुरक्षा को लेकर आखिरकार रक्षा मंत्रालय की नींद खुल गई है। रक्षा मंत्रालय लखनऊ सर्किल अमौसी में एयरपोर्ट से जुड़े 9 गावों की अपनी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराने के साथ नए सिरे से उसकी सीमा निर्धारित करने के लिए राज्य सरकार के राजस्व विभाग के साथ संयुक्त सर्वे करेगा। इस सर्वे की रिपोर्ट 30 जून तक रक्षा मंत्रालय भेजी जाएगी। साथ ही सर्वे में सामने आने वाली जमीन पर रक्षा मंत्रालय अपने पिलर भी लगा देगा।
दो माह पहले वाराणसी में देश भर के छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारियों (सीईओ) और रक्षा संपदा अधिकारी (डीईओ) के सेमिनार में लखनऊ, मेरठ और बरेली सहित सभी प्रमुख शहरों में छावनी सीमा के बाहर खाली पड़ी जमीनों पर कब्जे के मामले सामने आए थे। इस पर महानिदेशक कैंट रविकांत चोपड़ा ने सभी सीईओ और डीईओ को 30 जून तक उनके क्षेत्र की छावनी सीमा के बाहर खाली पड़ी जमीन का सर्वे कर पिलर लगाकर उसकी सीमा निर्धारित करने के आदेश दिए थे। इसके बाद रक्षा संपदा कार्यालय लखनऊ सर्किल ने लखनऊ, कानपुर और फतेहगढ़ कैंट की बाहरी सीमा के साथ सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी और हरदोई में अपनी 8424.77 एकड़ जमीन का सर्वे करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। लखनऊ शहर में छावनी के बाहर अमौसी एयरफील्ड की 185.37 एकड़ जमीन के संयुक्त सर्वे के लिए रक्षा संपदा कार्यालय ने राजस्व विभाग को पत्र लिखा है। सूत्रों के मुताबिक अगले सप्ताह सर्वे की तिथि मिल जाएगी।
ऐसे हुआ था अधिग्रहण ः रक्षा मंत्रालय के दस्तावेजों के अनुसार डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स 75-ए के तहत 1942-43 में अमौसी एयरफील्ड बनाने के लिए 169125.67 रुपए में 414.61 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद रक्षा मंत्रालय ने 229.15 एकड़ भूमि नागरिक उड्डयन मंत्रालय विभाग को दे दी थी। बाकी बची 185.46 एकड़ भूमि के प्रबंधन का जिम्मा मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस के हवाले कर दिया गया। वर्ष 1969 में रक्षा मंत्रालय के आदेश के बाद 0.09 एकड़ जमीन उन किसानों को वापस दे दी गई, जिनसे रक्षा मंत्रालय ने उसे अधिग्रहीत किया था। इसके बाद से रक्षा मंत्रालय के पास अमौसी एयरफील्ड की 185.37 एकड़ जमीन ही बची रह गई थी। इन जमीनों पर कई कब्जे हो चुके हैं। प्रापर्टी डीलरों ने उनकी प्लाटिंग तक कर डाली है।
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यहां इतनी जमीन
- औरंगाबाद जागीर (73.23 एकड़)
- औरंगाबाद खालसा (3.45 एकड़)
- अमौसी (19.00 एकड़)
- फर्रुखाबाद चिल्लावां (8.77 एकड़)
- रहीमाबाद (0.22 एकड़)
- भक्तिखेड़ा (1.95 एकड़)
- बिजनौर (51.30 एकड़)
- गुडैरा (गरौरा) (15.91 एकड़)
- बेहसा (11.54 एकड़)
हटेंगे अवैध निर्माण
लखनऊ सर्किल के रक्षा संपदा अधिकारी बी रेड्डी शंकर बाबू का कहना है कि लखनऊ अमौसी के साथ मोहनलालगंज की रक्षा विभाग की भूमि का सर्वे होगा। इसका उद्देश्य रक्षा मंत्रालय की भूमि को चिह्नित कर पिलर लगाकर उसकी सीमा का निर्धारण करना है। जमीनों पर बने अवैध निर्माण पुलिस की मदद से हटाए जाएंगे।
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दो माह पहले वाराणसी में देश भर के छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारियों (सीईओ) और रक्षा संपदा अधिकारी (डीईओ) के सेमिनार में लखनऊ, मेरठ और बरेली सहित सभी प्रमुख शहरों में छावनी सीमा के बाहर खाली पड़ी जमीनों पर कब्जे के मामले सामने आए थे। इस पर महानिदेशक कैंट रविकांत चोपड़ा ने सभी सीईओ और डीईओ को 30 जून तक उनके क्षेत्र की छावनी सीमा के बाहर खाली पड़ी जमीन का सर्वे कर पिलर लगाकर उसकी सीमा निर्धारित करने के आदेश दिए थे। इसके बाद रक्षा संपदा कार्यालय लखनऊ सर्किल ने लखनऊ, कानपुर और फतेहगढ़ कैंट की बाहरी सीमा के साथ सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी और हरदोई में अपनी 8424.77 एकड़ जमीन का सर्वे करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। लखनऊ शहर में छावनी के बाहर अमौसी एयरफील्ड की 185.37 एकड़ जमीन के संयुक्त सर्वे के लिए रक्षा संपदा कार्यालय ने राजस्व विभाग को पत्र लिखा है। सूत्रों के मुताबिक अगले सप्ताह सर्वे की तिथि मिल जाएगी।
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ऐसे हुआ था अधिग्रहण ः रक्षा मंत्रालय के दस्तावेजों के अनुसार डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स 75-ए के तहत 1942-43 में अमौसी एयरफील्ड बनाने के लिए 169125.67 रुपए में 414.61 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की गई थी। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद रक्षा मंत्रालय ने 229.15 एकड़ भूमि नागरिक उड्डयन मंत्रालय विभाग को दे दी थी। बाकी बची 185.46 एकड़ भूमि के प्रबंधन का जिम्मा मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस के हवाले कर दिया गया। वर्ष 1969 में रक्षा मंत्रालय के आदेश के बाद 0.09 एकड़ जमीन उन किसानों को वापस दे दी गई, जिनसे रक्षा मंत्रालय ने उसे अधिग्रहीत किया था। इसके बाद से रक्षा मंत्रालय के पास अमौसी एयरफील्ड की 185.37 एकड़ जमीन ही बची रह गई थी। इन जमीनों पर कई कब्जे हो चुके हैं। प्रापर्टी डीलरों ने उनकी प्लाटिंग तक कर डाली है।
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यहां इतनी जमीन
- औरंगाबाद जागीर (73.23 एकड़)
- औरंगाबाद खालसा (3.45 एकड़)
- अमौसी (19.00 एकड़)
- फर्रुखाबाद चिल्लावां (8.77 एकड़)
- रहीमाबाद (0.22 एकड़)
- भक्तिखेड़ा (1.95 एकड़)
- बिजनौर (51.30 एकड़)
- गुडैरा (गरौरा) (15.91 एकड़)
- बेहसा (11.54 एकड़)
हटेंगे अवैध निर्माण
लखनऊ सर्किल के रक्षा संपदा अधिकारी बी रेड्डी शंकर बाबू का कहना है कि लखनऊ अमौसी के साथ मोहनलालगंज की रक्षा विभाग की भूमि का सर्वे होगा। इसका उद्देश्य रक्षा मंत्रालय की भूमि को चिह्नित कर पिलर लगाकर उसकी सीमा का निर्धारण करना है। जमीनों पर बने अवैध निर्माण पुलिस की मदद से हटाए जाएंगे।