{"_id":"124-59861","slug":"Lucknow-59861-124","type":"story","status":"publish","title_hn":"छात्र बताएंगे गुरुजी कितने पानी में ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छात्र बताएंगे गुरुजी कितने पानी में
Lucknow
Updated Tue, 04 Jun 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में अब शिक्षक ही छात्र का मूल्यांकन नहीं करेंगे। छात्र भी यह बताएंगे कि गुरुजी कितने पानी में है। नए सत्र से लखनऊ विवि इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज में संचालित सात कोर्सेज में स्टूडेंट फीडबैक सिस्टम लागू करने जा रहा है। इसमें हर सेमेस्टर के अंत में स्टूडेंट से शिक्षकों के शिक्षण कार्य के बारे में प्रोफार्मा भरवाकर फीडबैक लिया जाएगा। सत्र के पहले दिन ही छात्रों को सेशन प्लान उपलब्ध होगा जिसमें उन्हें पढ़ाए जाने वाले विषय और उसका कंटेंट भी बता दिया जाएगा। कवायद सफल रही तो सत्र 2014-15 से इसे पूरे विश्वविद्यालय में लागू करने की तैयारी है। नवागत कुलपति ने शैक्षणिक सुधार के एजेंडे पर काम शुरू कर दिया है। छात्रों का मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों की शिक्षण पद्धति भी कितनी मुफीद है इसको भी समीक्षा के दायरे में लाने की पहल शुरू हो गई है। देश के टॉप बिजनेस स्कूलों की तर्ज पर लविवि भी स्टूडेंट फीडबैक प्रणाली तैयार कर रहा है। कुलपति प्रो. एसबी निमसे का कहना है कि इस प्रक्रिया में छात्र की पहचान गुप्त रहेगी। हर सेमेस्टर के अंत में छात्र से शिक्षक के बारे में विस्तृत फीडबैक लिया जाएगा। पहले सालों मेें तो इनका इस्तेमाल शिक्षण को प्रभावी एवं छात्रोन्मुखी बनाने में किया जाएगा। बाद में इस प्रदर्शन को शिक्षकों की प्रगति से भी जोड़ा जा सकता है। नए सत्र में इसे आईएमएस में लागू किया जा रहा है। इसके बाद अगले चरण में यह प्रक्रिया विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रमों में लागू की जाएगी।
यह होगा फीडबैक का सिस्टम ः आईएमएस के ओएसडी प्रो. अरविंद मोहन बताते हैं कि फीडबैक का जो प्रोफार्मा विकसित किया गया है उसमें पांच रेटिंग प्वाइंट तय किए गए हैं। 5- एक्सीलेंट, 4-गुड, 3-एवरेज, 2-फेयर और 1 रेटिंग का मतलब पुअर होगा। छात्रों से शिक्षण की स्पष्टता, शिक्षण में उदाहरण, केस, एक्सरसाइज का इस्तेमाल, शिक्षण सामग्री की सटीकता, प्रोजेक्ट के प्रभाव, समझाने की प्रभावी कला, नियम एवं सारिणी का प्रभावी क्रियान्वयन, मूल्यांकन में स्पष्टता एवं शुचिता, पाठ्यक्रम के उद्देश्य की प्राप्ति, विषय में रुचि उत्पन्न करने की कला, कुल शिक्षण में ओवरआल रेटिंग के आधार पर फीडबैक लिया जाएगा। इसके अलावा भी यदि छात्र कोई टिप्पणी करना चाहते हैं तो उसके लिए अलग से कॉलम तय किया गया है।
स्नातक में भी लागू होगा सेमेस्टर सिस्टम ः लविवि प्रशासन ने स्नातक कक्षाओं में भी सेमेस्टर सिस्टम लागू करने की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी है। अभी लविवि के पीजी पाठ्यक्रमों में ही सेमेस्टर प्रणाली लागू है। स्नातक के ऑनर्स पाठ्यक्रमों की भी परीक्षा सेमेस्टर सिस्टम में होती है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का भी जोर सेमेस्टर सिस्टम को प्रभावी बनाने पर है। इसके पहले जब लविवि ने नैक मूल्यांकन कराया था तो भी नैक टीम ने सेमेस्टर लागू करने का सुझाव दिया था। लविवि प्रशासन अब नैक मूल्यांकन की तैयारी कर रहा है। ऐसे में अब इस सुझाव को अमली जामा पहनाने की तैयारी है। कुलपति कहते हैं कि यदि बात केवल परिसर की होती तो इसे हम नए सत्र से ही लागू कर सकते थे। लविवि की स्नातक कक्षाओं की शिक्षण प्रणाली 118 संबद्ध कॉलेजों पर भी लागू होती है। इसलिए हम इसको 2014-15 में अमल में लाएंगे। तब तक परिसर में भी नई आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षकों एवं संसाधनों की कमी पूरी कर ली जाएगी। इसके साथ ही उसके लिए पाठ्यक्रम भी विकसित किए जा सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह होगा फीडबैक का सिस्टम ः आईएमएस के ओएसडी प्रो. अरविंद मोहन बताते हैं कि फीडबैक का जो प्रोफार्मा विकसित किया गया है उसमें पांच रेटिंग प्वाइंट तय किए गए हैं। 5- एक्सीलेंट, 4-गुड, 3-एवरेज, 2-फेयर और 1 रेटिंग का मतलब पुअर होगा। छात्रों से शिक्षण की स्पष्टता, शिक्षण में उदाहरण, केस, एक्सरसाइज का इस्तेमाल, शिक्षण सामग्री की सटीकता, प्रोजेक्ट के प्रभाव, समझाने की प्रभावी कला, नियम एवं सारिणी का प्रभावी क्रियान्वयन, मूल्यांकन में स्पष्टता एवं शुचिता, पाठ्यक्रम के उद्देश्य की प्राप्ति, विषय में रुचि उत्पन्न करने की कला, कुल शिक्षण में ओवरआल रेटिंग के आधार पर फीडबैक लिया जाएगा। इसके अलावा भी यदि छात्र कोई टिप्पणी करना चाहते हैं तो उसके लिए अलग से कॉलम तय किया गया है।
विज्ञापन
स्नातक में भी लागू होगा सेमेस्टर सिस्टम ः लविवि प्रशासन ने स्नातक कक्षाओं में भी सेमेस्टर सिस्टम लागू करने की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी है। अभी लविवि के पीजी पाठ्यक्रमों में ही सेमेस्टर प्रणाली लागू है। स्नातक के ऑनर्स पाठ्यक्रमों की भी परीक्षा सेमेस्टर सिस्टम में होती है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का भी जोर सेमेस्टर सिस्टम को प्रभावी बनाने पर है। इसके पहले जब लविवि ने नैक मूल्यांकन कराया था तो भी नैक टीम ने सेमेस्टर लागू करने का सुझाव दिया था। लविवि प्रशासन अब नैक मूल्यांकन की तैयारी कर रहा है। ऐसे में अब इस सुझाव को अमली जामा पहनाने की तैयारी है। कुलपति कहते हैं कि यदि बात केवल परिसर की होती तो इसे हम नए सत्र से ही लागू कर सकते थे। लविवि की स्नातक कक्षाओं की शिक्षण प्रणाली 118 संबद्ध कॉलेजों पर भी लागू होती है। इसलिए हम इसको 2014-15 में अमल में लाएंगे। तब तक परिसर में भी नई आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षकों एवं संसाधनों की कमी पूरी कर ली जाएगी। इसके साथ ही उसके लिए पाठ्यक्रम भी विकसित किए जा सकेंगे।
विज्ञापन