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वकील को सात साल की कैद
Lucknow
Updated Thu, 11 Apr 2013 05:30 AM IST
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लखनऊ। संपत्ति केलालच में मकान मालकिन को प्रताड़ित करके आत्महत्या के लिए उकसाने केआरोपी दिवाकर गौतम को दोषी ठहराते हुए अपर सत्र न्यायाधीश रणधीर सिंह ने सात वर्ष केकठोर कारावास एवं दस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में अन्य आरोपी रमेश कुमार को बरी कर दिया है।
कोर्ट में सरकारी वकील का तर्क था कि मामले की रिपोर्ट वादी सजल कुमार साहा ने कृष्णानगर थाने में दर्ज कराई थी।
इसमें बताया गया कि वादी की बहन पॉली साहा के पति की मृत्यु 2006 में हो गई थी। पॉली के घर में वकील दिवाकर गौतम किराए पर रहता था। पॉली को दिवाकर ने अपने जाल में फंसा लिया तथा उसके साथ रहने लगा।
पता चला कि बाद में दोनों ने कथित रूप से विवाह कर लिया था। 22 मार्च 2010 को वादी की बहन का शव संदिग्ध परिस्थिति में कमरे में लटकता पाया गया था। स्कूल से लौटने के बाद पॉली की पुत्री ने देखा कि उसकी मां फंदे से लटकी हुई है। वादी के भांजा व भांजी ने बताया कि दिवाकर गौतम तथा रमेश कुमार उसकी बहन पॉली को जायदाद हथियाने के लिए मारते-पीटते तथा प्रताड़ित करते थे।
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कोर्ट में सरकारी वकील का तर्क था कि मामले की रिपोर्ट वादी सजल कुमार साहा ने कृष्णानगर थाने में दर्ज कराई थी।
इसमें बताया गया कि वादी की बहन पॉली साहा के पति की मृत्यु 2006 में हो गई थी। पॉली के घर में वकील दिवाकर गौतम किराए पर रहता था। पॉली को दिवाकर ने अपने जाल में फंसा लिया तथा उसके साथ रहने लगा।
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पता चला कि बाद में दोनों ने कथित रूप से विवाह कर लिया था। 22 मार्च 2010 को वादी की बहन का शव संदिग्ध परिस्थिति में कमरे में लटकता पाया गया था। स्कूल से लौटने के बाद पॉली की पुत्री ने देखा कि उसकी मां फंदे से लटकी हुई है। वादी के भांजा व भांजी ने बताया कि दिवाकर गौतम तथा रमेश कुमार उसकी बहन पॉली को जायदाद हथियाने के लिए मारते-पीटते तथा प्रताड़ित करते थे।
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